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History of India
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जियाउद्दीन बरनी द्वारा रचित वह ग्रंथ कौन सा है जो खिलजी वंश के इतिहास का सबसे महत्वपूर्ण स्रोत है?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
बरनी की तारीख-ए-फिरोजशाही खिलजी इतिहास की अहम कड़ी है।
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उन्नीसवीं शताब्दी के सामाजिक-धार्मिक सुधार आंदोलनों और उनके संस्थापकों/संस्थाओं के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राजा राममोहन राय द्वारा स्थापित 'ब्रह्म समाज' ने मूर्तिपूजा और बहुदेववाद का खंडन किया तथा वेदों की अचूकता या infallibility के सिद्धांत को अस्वीकार करते हुए मानव बुद्धि और समकालीन अंतरात्मा को धार्मिक सत्यों का सर्वोच्च आधार माना।
2. स्वामी दयानंद सरस्वती द्वारा वर्ष 1875 में बॉम्बे में स्थापित 'आर्य समाज' ने 'वेदों की ओर लौटो' का नारा दिया और वेदों को अपौरुषेय एवं सभी ज्ञान का स्रोत मानते हुए उनकी अचूकता में पूर्ण विश्वास व्यक्त किया।
3. केशव चंद्र सेन के ब्रह्म समाज से अलग होने के पश्चात देवेंद्रनाथ टैगोर ने 'साधारण ब्रह्म समाज' की स्थापना की, जिसने बाल विवाह और जाति-प्रथा के विरुद्ध उग्र रूप से कानूनी सुधारों की मांग की।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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मध्यकालीन भारत के सूफी आंदोलनों और उनके विशिष्ट सिलसिलों के वैचारिक तथा व्यवहारिक पक्षों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. चिश्ती सिलसिला संगीत (समां) और स्थानीय लोक भाषाओं के प्रयोग के प्रति अत्यधिक उदार था, तथा इस सिलसिले के संतों ने राजकीय संरक्षण और जागीर-अनुदान स्वीकार करने की नीति का कड़ाई से त्याग किया था।
2. सुहरावर्दी सिलसिला राजनीतिक मामलों में तटस्थता की नीति अपनाता था और वह राज्य के संरक्षण, शाही पदों तथा धन-संपत्ति को स्वीकार करने में विश्वास नहीं रखता था।
3. नक्शबंदी सिलसिला भारत में सबसे अधिक कट्टर और रूढ़िवादी सिलसिला माना जाता था, जिसने अकबर की उदार धार्मिक नीतियों और 'दीन-ए-इलाही' का कड़ा विरोध किया था तथा शेख अहमद सरहिंदी ने इस दिशा में प्रमुख वैचारिक भूमिका निभाई थी।
4. कादिरिया सिलसिला के संतों ने शाहजहां के काल में दरबार में विशेष प्रभाव प्राप्त किया, और इस सिलसिले के राजकुमार दारा शिकोह ने सूफी मत और उपनिषदों के दार्शनिक सामंजस्य पर बल दिया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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बौद्ध धर्म और जैन धर्म के प्रारंभिक दार्शनिक विकास एवं संप्रदायों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. जैन धर्म के श्वेतांबर संप्रदाय के अनुयायी वस्त्र धारण करते हैं और उनका यह विश्वास है कि तीर्थंकर मल्लिनाथ एक पुरुष थे, जबकि दिगंबर संप्रदाय के अनुसार मल्लिनाथ एक स्त्री थीं और इस संप्रदाय के साधु पूर्ण नग्नता का व्रत रखते हैं।
2. बौद्ध धर्म की महायान शाखा के उदय के साथ ही बोधिसत्त्वों की संकल्पना को प्रमुखता मिली, जिसमें अवलोकितेश्वर (पद्मपाणि) को सबसे लोकप्रिय बोधिसत्त्व माना गया जिनका मुख्य कार्य संसार के दुःखों को दूर करना और करुणा का प्रसार करना है।
3. जैन धर्म में 'स्यादवाद' (अनेकांतवाद या सप्तभंगी नय) का सिद्धांत वस्तु के स्वरूप को बहुआयामी और सापेक्षिक दृष्टिकोण से समझने पर बल देता है, जो बौद्ध धर्म के 'प्रतीत्यसमुत्पाद' के सिद्धांत के समान ही कर्मात्मक कारणों की व्याख्या करता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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सत्रहवीं शताब्दी में छत्रपति शिवाजी महाराज द्वारा स्थापित मराठा साम्राज्य के प्रशासनिक तंत्र, राजस्व संरचना और सैन्य संगठनों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. शिवाजी की प्रशासनिक व्यवस्था में 'अष्टप्रधान' नामक केंद्रीय मंत्रिपरिषद का गठन किया गया था, जिसमें प्रत्येक मंत्री सीधे छत्रपति के प्रति उत्तरदायी होता था और यह कोई आधुनिक अर्थों में मंत्रिमंडल (Cabinet) न होकर विभिन्न प्रशासनिक विभागों के परामर्शदाताओं का एक समूह था, जहाँ 'पंडितराव' धार्मिक मामलों और दादानुसार दान-पुण्य का प्रभारी था।
2. शिवाजी ने अपने राज्य में जागीरदारी प्रथा को कड़ाई से हतोत्साहित किया और सैन्य अधिकारियों व सैनिकों को भूमि अनुदान (जागीर) देने के बजाय सीधे नगद वेतन देने की नीति को अपनाया, हालांकि कुछ विशेष मामलों में राजस्व संग्रह के अधिकार दिए गए थे जिन्हें बाद में पेशवा काल में पूरी तरह समाप्त कर दिया गया।
3. मराठा सेना में घुड़सवार सेना के दो प्रमुख वर्ग थे—'पागा' और 'सिलाहदार'। पागा घुड़सवार वे सैनिक थे जिन्हें राज्य द्वारा घोड़े और शस्त्र सीधे उपलब्ध कराए जाते थे और वे राज्य के पूर्ण नियंत्रण में होते थे, जबकि सिलाहदार सैनिक अपने स्वयं के घोड़े और शस्त्र लेकर सेना में शामिल होते थे।
4. शिवाजी की राजस्व प्रणाली मुख्य रूप से मलिक अंबर द्वारा डेक्कन के सुल्तानों के अधीन विकसित भू-राजस्व व्यवस्था पर आधारित थी, जिसके अंतर्गत भूमि की पैमाइश और उर्वरता के आकलन के बाद प्रारंभिक उपज का दो-तिहाई (66%) हिस्सा राज्य के कर के रूप में अनिवार्य रूप से वसूला जाता था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के राजनीतिक, सामाजिक, धार्मिक और आर्थिक कारणों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. डलहौजी की 'व्यपगत सिद्धांत' (Doctrine of Lapse) नीति के तहत सतारा, नागपुर और झाँसी जैसी रियासतें का ब्रिटिश साम्राज्य में विलय किया गया, जिससे पारंपरिक भारतीय शासक वर्ग और शाही परिवारों में गहरी असुरक्षा और आक्रोश पैदा हुआ।
2. ब्रिटिश सरकार द्वारा 1856 में 'धार्मिक असुविधा अधिनियम' (Religious Disabilities Act) पारित किया गया, जिसने हिंदू धर्म से ईसाई धर्म में परिवर्तित होने वाले व्यक्तियों को उनके पैतृक संपत्ति के अधिकारों से वंचित कर दिया, जिससे पारंपरिक भारतीय समाज में भारी धार्मिक असंतोष फैला।
3. ब्रिटिश प्रशासनिक नीतियों और भू-राजस्व प्रणालियों के कारण पारंपरिक ग्रामीण अर्थव्यवस्था और हस्तशिल्प उद्योग तबाह हो गए, जिससे ग्रामीण कर्जदारी बढ़ी और किसानों तथा कारीगरों का यह आक्रोश 1857 के विद्रोह में सैनिकों के रूप में प्रकट हुआ।
4. सेना के भीतर लागू किए जाने वाले नियमों, जैसे वर्ष 1856 का 'सामान्य सेवा उपनयन अधिनियम' (General Service Enlistment Act) जिसके तहत भारतीय सैनिकों को समुद्र पार ब्रिटिश सीमाओं से बाहर भी सेवा देने के लिए बाध्य किया गया, ने उच्च जातीय हिंदू सैनिकों की धार्मिक भावनाओं को गंभीर रूप से आहत किया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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