BaalVikas
Menu

त्वरित लिंक्स

BPSC TRE 4.0
31 views

वह एंजाइम, जो हमारे मुँह में भोजन के साथ मिलता है/हैं–

Detailed Explanation

लार में एमाइलेस (टायलिन) एंजाइम पाया जाता है।
Share:

Related Questions

→ बिहार के छात्र आंदोलन और जयप्रकाश नारायण (जेपी) की संपूर्ण क्रांति के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. वर्ष 1974 के छात्र आंदोलन की शुरुआत मूल रूप से छात्रों द्वारा बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और शिक्षा प्रणाली में सुधार की मांग को लेकर 'बिहार छात्र संघर्ष समिति' के गठन के साथ हुई थी। 2. जयप्रकाश नारायण ने इस आंदोलन का नेतृत्व करने के लिए दो मुख्य शर्तें रखी थीं—पहला यह कि आंदोलन पूरी तरह से अहिंसक रहेगा और दूसरा यह कि इसका प्रभाव केवल बिहार राज्य तक ही सीमित रहेगा, राष्ट्रीय राजनीति में इसका कोई हस्तक्षेप नहीं होगा। 3. गांधी मैदान, पटना में 5 जून 1974 को ऐतिहासिक जनसभा के दौरान जयप्रकाश नारायण ने सत्ता परिवर्तन और व्यवस्था परिवर्तन के लिए 'सम्पूर्ण क्रांति' (Total Revolution) का आह्वान किया था, जिसमें सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक बदलाव शामिल थे। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं? → प्रकाश के परावर्तन, अपवर्तन, पूर्ण आंतरिक परावर्तन और विवर्तन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. जब प्रकाश किसी सघन माध्यम से विरल माध्यम में प्रवेश करता है और आपतन कोण का मान क्रांतिक कोण (Critical Angle) से अधिक हो जाता है, तो प्रकाश किरण उसी माध्यम में वापस लौट जाती है, जिसे पूर्ण आंतरिक परावर्तन कहते हैं और मृगतृष्णा (Mirage) इसी का एक प्रमुख उदाहरण है। 2. लेंस की क्षमता (Power of Lens) उसकी फोकस दूरी (Focal Length) के व्युत्क्रमानुपाती होती है, और यदि फोकस दूरी मीटर में मापी जाए तो लेंस की क्षमता का मात्रक डायोप्टर (Dioptre) होता है, जहाँ उत्तल लेंस की क्षमता धनात्मक तथा अवतल लेंस की क्षमता ऋणात्मक होती है। 3. प्रकाश के प्रकीर्णन (Scattering of Light) के कारण ही आकाश का रंग नीला और सूर्योदय तथा सूर्यास्त के समय सूर्य का रंग लाल दिखाई देता है, क्योंकि लाल रंग का तरंगदैर्ध्य (Wavelength) सबसे अधिक होने के कारण इसका प्रकीर्णन न्यूनतम होता है। 4. प्रकाश का विवर्तन (Diffraction) यह दर्शाता है कि प्रकाश केवल एक सीधी रेखा में गमन नहीं करता है, बल्कि जब इसके मार्ग में कोई अत्यंत सूक्ष्म अवरोध आता है, तो यह उसके किनारों पर आंशिक रूप से मुड़ जाता है, जो तरंगीय प्रकृति का स्पष्ट प्रमाण है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं? → भारतीय संविधान में प्रदत्त मूल अधिकार, राज्य के नीतिनिदेशक तत्वों (DPSP) और मूल कर्तव्यों के अंतर्संबंधों तथा उनके न्यायिक पुनरावलोकन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. केशवानंद भारती मामले (1973) के पश्चात न्यायपालिका ने यह स्पष्ट किया कि यद्यपि मौलिक अधिकार और नीतिनिदेशक तत्व एक-दूसरे के पूरक हैं, तथापि किसी भी स्थिति में संसद अनुच्छेद 368 के तहत संविधान संशोधन करके नीतिनिदेशक तत्वों को लागू करने के लिए भाग III (मूल अधिकारों) के प्रावधानों को पूर्णतः निष्प्रभावी या समाप्त नहीं कर सकती यदि वह संविधान के 'मूल ढांचा' (Basic Structure) का उल्लंघन करता हो। 2. स्वर्ण सिंह समिति की संस्तुतियों के आधार पर 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा संविधान में जोड़े गए अनुच्छेद 31-C के अंतर्गत यह प्रावधान किया गया कि अनुच्छेद 39(b) और 39(c) में वर्णित नीतिनिदेशक तत्वों को प्रभावी बनाने के लिए बनाए गए किसी भी कानून को इस आधार पर शून्य घोषित नहीं किया जा सकता कि वह अनुच्छेद 14 या अनुच्छेद 19 द्वारा प्रदत्त मूल अधिकारों का उल्लंघन करता है। 3. वर्ष 2002 में 86वें संविधान संशोधन अधिनियम के माध्यम से जोड़े गए 11वें मूल कर्तव्य (अनुच्छेद 51A(k)) के अंतर्गत 6 से 14 वर्ष की आयु के बच्चों के माता-पिता या संरक्षक का यह कर्तव्य बनाया गया कि वे अपने बच्चों को शिक्षा के अवसर प्रदान करें, तथा इसी संशोधन द्वारा संविधान में अनुच्छेद 21A जोड़कर शिक्षा के अधिकार को मौलिक अधिकार का दर्जा दिया गया। 4. मूल कर्तव्य, जो कि मुख्य रूप से आयरिश संविधान से प्रेरित होकर भारतीय संविधान के भाग IV-A में शामिल किए गए हैं, प्रकृति में न्यायोचित (Justiciable) हैं, अर्थात उनके उल्लंघन की स्थिति में देश के उच्च न्यायालयों या उच्चतम न्यायालय द्वारा रिट (Writ) जारी करके इन्हें प्रवर्तित कराया जा सकता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं? → शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के संबंध में निम्नलिखित कथनों में से कौन से सही हैं? → मौर्य कालीन प्रशासन और अर्थव्यवस्था के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. मौर्य प्रशासन में 'अध्यक्ष' विभिन्न विभागों के प्रमुख अधिकारी होते थे, जिनका मुख्य कार्य आर्थिक गतिविधियों का नियमन करना और राज्य के लिए राजस्व एकत्र करना था, जैसे 'शूल्काध्यक्ष' व्यापारिक करों की वसूली करता था और 'सीताध्यक्ष' कृषि विभाग की देखरेख करता था। 2. मेगस्थनीज की 'इंडिका' के अनुसार, मौर्य साम्राज्य में भूमि का स्वामित्व सम्राट के पास होता था, और राजा कुल उपज का एक-चौथाई से एक-तिहाई भाग कर (भाग) के रूप में वसूलता था, तथा सिंचाई की सुविधा प्रदान करने के लिए राज्य द्वारा 'सेतुबंध' का निर्माण कराया जाता था। 3. मौर्योत्तर काल (विशेषकर सातवाहन और कुषाण काल) में स्वर्ण सिक्कों का बड़े पैमाने पर प्रचलन शुरू हुआ, जिसमें कुषाणों के 'दीनार' शुद्ध सोने के सिक्के थे, जबकि सातवाहनों ने मुख्य रूप से 'सीस' (Lead) और 'प्राकृत' मिश्रित धातुओं के सिक्के चलाए। 4. मौर्य काल में व्यापारिक मार्गों की सुरक्षा और आवागमन को सुगम बनाने के लिए 'ार्थशास्त्र' में 'पथ' और 'यानपथ' का उल्लेख मिलता है, तथा विदेशों के साथ व्यापार मुख्य रूप से भरूच (भृगुकच्छ) और ताम्रलिप्ति बंदरगाहों के माध्यम से होता था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.