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1857 के क्रांतिकारी तात्या टोपे का वास्तविक नाम क्या था?

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तात्या टोपे का मूल नाम रामचंद्र पांडुरंग था।
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→ प्रकाश के परावर्तन, अपवर्तन और वर्ण-विक्षेप से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. जब प्रकाश की किरण सघन माध्यम से विरल माध्यम में प्रवेश करती है और आपतन कोण का मान क्रांतिक कोण (Critical Angle) से अधिक हो जाता है, तो प्रकाश किरण उसी माध्यम में वापस लौट जाती है, जिसे प्रकाश का पूर्ण आंतरिक परावर्तन (Total Internal Reflection) कहा जाता है, जिसका एक व्यावहारिक उदाहरण रेगिस्तान में मरीचिका (Mirage) का बनना है। 2. लेंस की क्षमता (Power of Lens) का एसआई मात्रक 'डायोप्टर' (Diopter) होता है, जो लेंस की फोकस दूरी (मीटर में व्यक्त) का व्युत्क्रम होता है, तथा उत्तल लेंस की क्षमता धनात्मक होती है जबकि अवतल लेंस की क्षमता ऋणात्मक होती है। 3. जब श्वेत प्रकाश की किरण किसी प्रिज्म से गुजरती है, तो विभिन्न रंगों के प्रकाश का विचलन (Deviation) अलग-अलग होता है, जिसमें लाल रंग का विचलन सबसे अधिक और बैंगनी रंग का विचलन सबसे कम होता है, क्योंकि लाल रंग का अपवर्तनांक सबसे अधिक होता है। 4. इंद्रधनुष (Rainbow) का निर्माण जल की सूक्ष्म बूंदों द्वारा प्रकाश के पूर्ण आंतरिक परावर्तन, अपवर्तन और वर्ण-विक्षेप (Dispersion) की संयुक्त परिघटना का परिणाम है, जिसमें प्राथमिक इंद्रधनुष के भीतर बैंगनी रंग और बाहर की ओर लाल रंग दिखाई देता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं? → मौर्य कालीन प्रशासन, अर्थव्यवस्था और मौयोत्तर काल की राजनीतिक एवं सांस्कृतिक प्रवृत्तियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. मौर्य काल में 'समान्हर्त्ता' (Samahartri) का मुख्य कार्य राज्य में करों का निर्धारण और आय-व्यय का लेखा-जोखा रखना (राजस्व संग्रह विभाग का प्रमुख) था, जबकि 'संनिधाता' (Sanidhata) राजकीय कोषागार और भण्डारगृह का मुख्य अधिकारी होता था। 2. सातवाहन वंश (मौयोत्तर काल) के शासकों ने सबसे पहले शीशे के सिक्के जारी किए थे, तथा उन्होंने भूमि अनुदान (Land Grants) देने की प्रथा की शुरुआत की थी, जो मुख्य रूप से बौद्ध भिक्षुओं और ब्राह्मणों को धार्मिक और प्रशासनिक छूट के साथ दिए जाते थे। 3. मौर्य साम्राज्य के पतन के बाद उत्तर-भारत में स्थापित शुंग वंश के संस्थापक पुष्यमित्र शुंग ने बौद्ध धर्म का पूर्णतः उन्मूलन कर दिया था और सभी बौद्ध स्तूपों को नष्ट कर दिया था, जिसके कारण बौद्ध साहित्यों में उन्हें क्रूर शासक के रूप में चित्रित किया गया है। 4. कुषाण काल (मौयोत्तर काल) के दौरान गांधार कला शैली पर ग्रीक-रोमन (हेलेनिस्टिक) प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखाई देता है, जिसमें बुद्ध की मूर्तियों को यथार्थवादी रूप में काले स्लेटी रंग के पाषाण से नीले-धूसर पत्थरों पर उकेरा गया था, जबकि मथुरा कला शैली पूरी तरह से स्वदेशी लाल बलुआ पत्थर पर आधारित थी। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं? → स्वामी दयानंद सरस्वती का जन्म कहाँ हुआ था? → पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी के संदर्भ में 'जैव विविधता हॉटस्पॉट' (Biodiversity Hotspots) की अवधारणा तथा भारत में स्थित हॉटस्पॉट क्षेत्रों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. 'जैव विविधता हॉटस्पॉट' की अवधारणा सबसे पहले वर्ष 1988 में ब्रिटिश पर्यावरणविद् नॉर्मन मेयर्स (Norman Myers) द्वारा प्रतिपादित की गई थी, जिसके अनुसार किसी क्षेत्र को हॉटस्पॉट घोषित करने के लिए उस क्षेत्र में कम से कम 1,500 स्थानिक (Endemic) पौधों की प्रजातियाँ होनी चाहिए और उस क्षेत्र ने अपनी मूल वानस्पतिक भूमि का कम से कम 70% या उससे अधिक हिस्सा नष्ट कर दिया हो। 2. विश्व स्तर पर वर्तमान में कुल 36 जैव विविधता हॉटस्पॉट की पहचान की गई है, जिनमें से भारत के भूभाग के अंतर्गत मुख्य रूप से चार प्रमुख क्षेत्र शामिल हैं: पश्चिमी घाट (Western Ghats), पूर्वी हिमालय (Eastern Himalaya), इंडो-बर्मा क्षेत्र (Indo-Burma Region) और सुंडालैंड (Sundaland)। 3. भारत का 'पश्चिमी घाट' क्षेत्र अपनी अत्यधिक जैव विविधता और उच्च स्थानिक प्रजातियों के कारण यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थलों की सूची में शामिल है, और माधाव गाडगिल समिति तथा कस्तूरीरंगन समिति का गठन इसी क्षेत्र के पारिस्थितिकीय रूप से संवेदनशील क्षेत्रों (Ecologically Sensitive Areas) के संरक्षण और प्रबंधन की सिफारिशों के लिए किया गया था। 4. भारत में स्थित 'सुंडालैंड' हॉटस्पॉट के अंतर्गत संपूर्ण अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के साथ-साथ लक्षद्वीप द्वीप समूह का संपूर्ण भूभाग भी शामिल है, जो जलीय और स्थलीय दोनों प्रकार की अनूठी पारिस्थितिकी को प्रदर्शित करता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं? → बिहार की निम्नलिखित सिंचाई एवं नदी घाटी परियोजनाओं पर विचार कीजिए: 1. बागमती परियोजना के अंतर्गत कटिहार और मुजफ्फरपुर जिलों में बागमती नदी के बाढ़ नियंत्रण और सिंचाई क्षमता के विस्तार के लिए ढेंग और अनुमंडल स्तर पर नहर प्रणालियों का विकास किया गया है। 2. उत्तरी कोयल जलाशय परियोजना (North Koel Reservoir Project), जो मुख्य रूप से सोन नदी की सहायक नदी उत्तरी कोयल पर स्थित है, झारखंड के पलामू जिले के साथ-साथ बिहार के औरंगाबाद और गया जिलों के अर्ध-शुष्क क्षेत्रों को सिंचाई सुविधा प्रदान करती है। 3. बरई जलाशय परियोजना (Barai Reservoir Project) कैमूर जिले में स्थित एक मध्यम सिंचाई परियोजना है, जो कर्मनाशा नदी बेसिन के अंतर्गत स्थानीय किसानों को मानसूनी अनिश्चितता से सुरक्षा प्रदान करती है। 4. पुनपुन बराज परियोजना का मुख्य उद्देश्य पटना और जहानाबाद जिलों में पुनपुन नदी के जल का उपयोग करके पारंपरिक आहर-पायन प्रणालियों को पुनर्जीवित करना और खरीफ फसलों के समय अतिरिक्त सिंचाई जल उपलब्ध कराना है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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