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BPSC TRE 4.0
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बिहार में बकास्त आंदोलन किस वर्ष प्रारंभ हुआ था?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
बिहार में बकास्त आंदोलन 1936-37 के दौरान स्वामी सहजानंद के नेतृत्व में शुरू हुआ था।
Related Questions
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सूची-I (स्तर) को सूची-II (विशेषताएँ) से सुमेलित कीजिए?
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बिहार के कृषि उद्योग, व्यापार और आधारभूत संरचना के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. बिहार सरकार की 'बिहार औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन नीति' (Food Processing, Textile & Leather) के अंतर्गत खाद्य प्रसंस्करण और मक्का आधारित उद्योगों को विशेष प्राथमिकता दी गई है, जिसके तहत राज्य के पूर्णिया और खगड़िया जिलों में आधुनिक इथेनॉल संयंत्रों की स्थापना की गई है।
2. भारत और नेपाल के बीच व्यापारिक संबंधों और पारगमन को सुगम बनाने के लिए अररिया जिले के जोगबनी तथा सीतामढ़ी जिले के भिठामोड़ में एकीकृत चेक पोस्ट (ICP) का निर्माण किया गया है, जो अंतर्राष्ट्रीय पारगमन गलियारे के रूप में कार्य करते हैं।
3. राज्य में आधारभूत संरचना के विकास के लिए पटना के बिहटा और वैशाली के गोरौल में 'प्लास्टिक पार्क' तथा मुजफ्फरपुर में 'मेगा फूड पार्क' की स्थापना की जा रही है, जिसका मुख्य उद्देश्य कृषि उत्पादों के मूल्य संवर्धन (Value Addition) को बढ़ावा देना है।
4. बिहार देश का ऐसा पहला भू-आबद्ध (Landlocked) राज्य बन गया है, जिसने अपनी भौगोलिक स्थिति का लाभ उठाते हुए अंतर्देशीय जलमार्गों के विकास के लिए राष्ट्रीय जलमार्ग-1 (गंगा नदी) पर हल्दिया से पटना के बीच बड़े पैमाने पर मालवाहक जहाजों के परिचालन हेतु मल्टी-मोडल टर्मिनल का निर्माण किया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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उत्तर भारत का पहला मानव डीएनए बैंक 30 जनवरी 2024 को कहाँ स्थापित किया गया?
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19वीं शताब्दी में भारत में हुए सामाजिक एवं धार्मिक सुधार आंदोलनों तथा उनके संस्थापकों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राजा राममोहन राय द्वारा स्थापित 'आत्मीय सभा' (1815) और बाद में 'ब्रह्म समाज' (1828) ने मूर्तिपूजा, बहुदेववाद, पुरोहितवाद और सती प्रथा जैसी कुप्रथाओं का कड़ा विरोध किया तथा एकेश्वरवाद और तार्किक वेदांत दर्शन का समर्थन किया।
2. स्वामी दयानंद सरस्वती द्वारा वर्ष 1875 में स्थापित 'आर्य समाज' ने 'वेदों की ओर लौटो' का नारा दिया और वेदों को अपौरुषेय तथा अज्ञानता का नाश करने वाला स्रोत माना, किंतु उन्होंने मूर्तिपूजा और जन्मना जाति व्यवस्था का समर्थन किया।
3. ज्योतिराव फुले द्वारा वर्ष 1873 में स्थापित 'सत्यशोधक समाज' का मुख्य उद्देश्य शूद्रों और अति-शूद्रों (निम्न जातियों) को ब्राह्मणवादी वर्चस्व और धार्मिक पाखंडों से मुक्त कराना तथा शिक्षा के माध्यम से उनका सामाजिक सशक्तिकरण करना था।
4. ईश्वर चंद्र विद्यासागर के अथक प्रयासों के कारण वर्ष 1856 में ब्रिटिश सरकार द्वारा 'हिंदू विधवा पुनर्विवाह अधिनियम' (Act XV of 1856) पारित किया गया, जिसने कानूनी रूप से विधवाओं के पुनर्विवाह को मान्यता प्रदान की।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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1857 के विद्रोह में अधिकांश जमींदारों का क्या रुख था?
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