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महात्मा गाँधी को "मलंग बाबा" की उपाधि किसने दी थी?

Detailed Explanation

उत्तर-पश्चिम सीमांत प्रांत (NWFP) के लोगों ने खान अब्दुल गफ्फार खान के नेतृत्व में गाँधी जी को मलंग बाबा कहा था।
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→ भारतीय राजव्यवस्था और संविधान की विविध विविधताओं के अंतर्गत 'संसदीय विशेषाधिकार' (Parliamentary Privileges) तथा संसद सदस्यों की निरर्हताओं (Disqualifications) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 105 के तहत संसद के दोनों सदनों, उसके सदस्यों और समितियों को कुछ विशेषाधिकार प्राप्त हैं, जिनमें संसद के भीतर सदन में कही गई किसी भी बात या दिए गए मत के संबंध में किसी भी न्यायालय में कोई कानूनी कार्यवाही न चलाए जाने की उन्मुक्ति शामिल है, किंतु यह विशेषाधिकार सांसदों को सदन के बाहर दिए गए बयानों पर भी पूर्ण रूप से प्राप्त होता है। 2. जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 8 के अनुसार, यदि संसद या राज्य विधानमंडल के किसी सदस्य को किसी अपराध में दोषी ठहराया जाता है और उसे न्यूनतम 2 वर्ष या उससे अधिक की कैद की सजा सुनाई जाती है, तो वह सजा की तिथि से अयोग्य हो जाता है तथा सजा की अवधि समाप्त होने के पश्चात अगले 6 वर्षों तक चुनाव लड़ने के लिए भी अयोग्य बना रहता है। 3. भारत के संविधान के अनुच्छेद 102(1)(a) के तहत कोई व्यक्ति संसद के किसी सदन का सदस्य चुने जाने और होने के लिए तब निरर्हित हो जाता है जब वह भारत सरकार या किसी राज्य सरकार के अधीन किसी लाभ के पद (Office of Profit) को धारण करता है, बशर्ते कि वह पद संसद द्वारा विधि बनाकर इस अयोग्यता से मुक्त न किया गया हो। 4. दल-बदल विरोधी कानून (संविधान की दसवीं अनुसूची) के तहत किसी सदस्य की अयोग्यता के संबंध में निर्णय लेने की शक्ति उस सदन के सभापति या अध्यक्ष में निहित होती है, और सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के अनुसार पीठासीन अधिकारी के इस निर्णय की न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) किसी भी परिस्थिति में नहीं की जा सकती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं? → निम्नलिखित में से क्या भारत के संविधान में सरदार स्वर्ण सिंह समिति की सिफारिश के बाद जोड़ा गया था? → बिहार के किस जिले में विक्रमशिला गंगा डॉल्फ़िन अभयारण्य स्थित है, जो भारत का एकमात्र डॉल्फ़िन अभयारण्य है? → भारत में अंग्रेजी शासनकाल का सबसे भयंकर अकाल किस दौरान पड़ा? → भारतीय स्वतंत्रता संग्राम और ऐतिहासिक घटनाओं के विविध आयामों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. वर्ष 1928 में भारत आए 'साइमन कमीशन' (Simon Commission) का मुख्य उद्देश्य वर्ष 1919 के मोंटैगू-चेम्सफोर्ड सुधारों (भारत सरकार अधिनियम, 1919) की कार्यप्रणाली की समीक्षा करना था, और चूँकि इस आयोग में सभी सात सदस्य ब्रिटिश (श्वेत) थे, इसलिए कांग्रेस सहित सभी प्रमुख दलों ने 'साइमन वापस जाओ' के नारों के साथ इसका पूर्ण बहिष्कार किया था। 2. वर्ष 1929 के ऐतिहासिक लाहौर अधिवेशन में पंडित जवाहरलाल नेहरू की अध्यक्षता में 'पूर्ण स्वराज' (Complete Independence) का प्रस्ताव पारित किया गया था, और इसी अधिवेशन में यह निर्णय लिया गया कि 26 जनवरी 1930 को पूरे देश में प्रथम 'स्वाधीनता दिवस' के रूप में मनाया जाएगा। 3. मार्च 1931 में संपन्न कराची अधिवेशन (जिसकी अध्यक्षता सरदार वल्लभभाई पटेल ने की थी) में मौलिक अधिकार और राष्ट्रीय आर्थिक नीति से संबंधित महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किए गए थे, तथा इसी अधिवेशन में पहली बार कांग्रेस ने गांधी-इरविन समझौते को औपचारिक रूप से अनुमोदित किया था। 4. वर्ष 1932 में लंदन में आयोजित 'तृतीय गोलमेज सम्मेलन' (Third Round Table Conference) में कांग्रेस की ओर से महात्मा गांधी ने एकमात्र आधिकारिक प्रतिनिधि के रूप में भाग लिया था, जबकि मुस्लिम लीग और रियासतों के प्रतिनिधियों ने इस सम्मेलन का पूरी तरह से बहिष्कार किया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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