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BPSC TRE 4.0
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जनांकिकीय संक्रमण सिद्धांत के प्रथम चरण के संबंध में निम्नलिखित कथनों में से कौन से गलत हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
प्रथम चरण में उच्च जन्मदर और उच्च मृत्युदर होती है, और पिरामिड का आधार चौड़ा व शीर्ष संकीर्ण होता है।
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भारतीय संविधान के अंतर्गत संघ की न्यायपालिका (उच्चतम न्यायालय) और भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) के संवैधानिक प्रावधानों, स्वतंत्रताओं और उनकी कार्यप्रणाली के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 143 के तहत राष्ट्रपति को यह अधिकार प्राप्त है कि वह विधि या तथ्य के किसी ऐसे व्यापक सार्वजनिक महत्व के प्रश्न पर उच्चतम न्यायालय से परामर्श कर सकता है, जिस पर उच्चतम न्यायालय परामर्श देने के लिए बाध्य है, बशर्ते वह मामला किसी पूर्व-संविधान संधि या समझौते से संबंधित हो।
2. नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) को पदमुक्त करने की प्रक्रिया और आधार ठीक उसी प्रकार से निर्धारित किए गए हैं जैसे कि उच्चतम न्यायालय के किसी न्यायाधीश को हटाने के लिए संसद द्वारा महाभियोग (दुराचार या असमर्थता) की प्रक्रिया अपनाई जाती है।
3. सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों और CAG दोनों के वेतन, भत्ते और पेंशन भारत की संचित निधि (Consolidated Fund of India) पर भारित (Charged) होते हैं, जिसका अर्थ है कि इन खर्चों पर संसद में मतदान नहीं हो सकता है, हालांकि इन पर सामान्य बहस की जा सकती है।
4. CAG सेवानिवृत्ति या अपने पद की समाप्ति के पश्चात भारत सरकार या किसी भी राज्य सरकार के अधीन किसी अन्य कार्यालय या लाभ के पद (Office of Profit) को धारण करने के लिए पात्र होता है, बशर्ते उसने संसद की लोक लेखा समिति (Public Accounts Committee) से पूर्व अनुमति प्राप्त कर ली हो।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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प्राचीन भारतीय इतिहास के विभिन्न कालों, राजवंशों तथा सांस्कृतिक एवं आर्थिक गतिविधियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मौर्य साम्राज्य के प्रशासनिक तंत्र में 'अध्यक्ष' विभिन्न विभागों के अधीक्षक (Superintendents) होते थे, जिनका मुख्य कार्य कृषि, व्यापार, नौकायन और खनन जैसी आर्थिक गतिविधियों का नियंत्रण और नियमन करना था, जैसा कि कौटिल्य के 'अर्थशास्त्र' में वर्णित है।
2. गुप्त काल के दौरान भूमि अनुदान (Land Grants) की प्रथा में व्यापक वृद्धि हुई, जिसमें 'अग्रहार' अनुदान मुख्य रूप से ब्राह्मणों और धार्मिक संस्थानों को दिए जाने वाले कर-मुक्त भूमि अनुदान थे, जबकि 'निबी-धर्म' का अर्थ ऐसी भूमि से था जिसे प्राप्तकर्ता केवल भोग सकता था, उसे बेचने या किसी अन्य को हस्तांतरित करने का कोई अधिकार नहीं था।
3. सातवाहन वंश के शासकों ने शीशे (Lead), तांबे और प्रोटीन के सिक्कों का बड़े पैमाने पर प्रचलन किया था, तथा उन्होंने ब्राह्मणों और बौद्ध भिक्षुओं को कर-मुक्त भूमि देने की परंपरा की शुरुआत की थी, जिसका विस्तृत उल्लेख नानाघाट और नासिक के अभिलेखों में मिलता है।
4. संगम काल के दौरान दक्षिण भारत में रोम और पश्चिमी देशों के साथ अत्यधिक समृद्ध विदेशी व्यापार होता था, जिसका मुख्य केंद्र केरल तट पर स्थित 'मुजिरीस' (Muziris) था, और इस व्यापार की पुष्टि प्लिनी के प्राकृतिक इतिहास (Naturalis Historia) तथा पुरातात्विक उत्खनन में मिले रोमन मृद्भांडों (Amphorae) से होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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बिहार राज्य में प्राकृतिक आपदाओं (विशेषकर बाढ़ और भूकंप) के प्रबंधन और उनकी भौगोलिक संवेदनशीलता के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. बिहार का उत्तरी भाग हिमालयी नदी तंत्र (जैसे कोसी, गंडक, बागमती) के कारण अत्यधिक बाढ़ प्रवण है, जहाँ प्रतिवर्ष मानसून के दौरान नेपाल से आने वाले भारी जलస్రાવ के कारण गंभीर जलभराव और भू-कटाव की समस्या उत्पन्न होती है।
2. भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) के भूकंपीय क्षेत्रीय वर्गीकरण के अनुसार, बिहार राज्य का उत्तरी क्षेत्र भूकंपीय क्षेत्र-V (Zone V) के अंतर्गत आता है जो अत्यंत उच्च जोखिम वाला क्षेत्र है, जबकि दक्षिणी बिहार का क्षेत्र अपेक्षाकृत कम जोखिम वाले क्षेत्र-III और IV में आता है।
3. वर्ष 1934 में आया महान नेपाल-बिहार भूकंप इस क्षेत्र का सबसे विनाशकारी भूकंप था, जिसके केंद्र के प्रभाव से मुंगेर, दरभंगा और पटना जिलों में भारी तबाही हुई थी, और इसी आपदा के पश्चात राज्य में आपदा प्रबंधन की दीर्घकालिक रणनीतियों पर विचार शुरू हुआ था।
4. बिहार सरकार द्वारा आपदा जोखिम न्यूनीकरण के लिए 'बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण' (BSDMA) का गठन किया गया है, जो त्रिस्तरीय पंचायती राज संस्थाओं के माध्यम से समुदाय-आधारित आपदा प्रबंधन (Community-Based Disaster Management) और प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों को बढ़ावा देता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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किस मुगल शासक ने अपनी 'आत्मकथा' (Tuzk-e-Baburi) स्वयं लिखी थी?
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पारिस्थितिकीय पिरामिड (Ecological Pyramids) और उनके विभिन्न प्रकारों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. पारिस्थितिकीय पिरामिड की अवधारणा का प्रतिपादन सबसे पहले चार्ल्स एल्टन (Charles Elton) ने किया था, जिन्हें 'एल्टोनियन पिरामिड' के नाम से भी जाना जाता है, जो विभिन्न पोषण स्तरों (Trophic Levels) पर जीवों की संख्या, जैवभार या ऊर्जा के संबंधों को रेखांकित करते हैं।
2. एक सामान्य स्थलीय पारिस्थितिकी तंत्र में 'संख्या का पिरामिड' (Pyramid of Numbers) सदैव सीधा (Upright) होता है, क्योंकि इसमें उत्पादकों (पेड़-पौधों) की संख्या शाकाहारी और मांसाहारी जीवों की तुलना में अत्यधिक अधिक होती है।
3. इसके विपरीत, एक बड़े वृक्ष के पारिस्थितिकी तंत्र में 'संख्या का पिरामिड' उल्टा (Inverted) हो जाता है, क्योंकि एक विशाल वृक्ष (उत्पादक) पर आश्रित पक्षियों (शाकाहारी) और उन पर पलने वाले परजीवियों (परजीवी पोषण स्तर) की संख्या क्रमिक रूप से बढ़ती जाती है।
4. 'ऊर्जा का पिरामिड' (Pyramid of Energy) किसी भी पारिस्थितिकी तंत्र में सर्वदा और अनिवार्य रूप से सीधा ही होता है, जो लिंडमैन के 10 प्रतिशत नियम (10% Law) का पालन करता है, जिसके तहत एक पोषण स्तर से दूसरे पोषण स्तर पर केवल 10 प्रतिशत ऊर्जा ही स्थानांतरित होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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