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BPSC TRE 4.0
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नागोर्नो-काराबाख के संबंध में निम्नलिखित कथनों में से कौन से सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
दोनों कथन ऐतिहासिक और राजनीतिक रूप से गलत हैं।
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आरबीसी (RBC) का निर्माण कहाँ होता है?
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बिहार विधान परिषद के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. बिहार विधान परिषद एक स्थायी सदन है जो कभी भंग नहीं होता, और इसके सदस्यों का कार्यकाल 6 वर्ष होता है।
2. भारतीय संविधान के अनुच्छेद 171 के अनुसार, बिहार विधान परिषद की कुल सदस्य संख्या राज्य की विधानसभा के कुल सदस्यों की संख्या की एक-तिहाई से अधिक नहीं हो सकती, और इसकी न्यूनतम संख्या 40 निर्धारित है।
3. विधान परिषद के कुल सदस्यों में से 1/12 भाग का निर्वाचन ऐसे स्नातकों द्वारा किया जाता है जो उस राज्य क्षेत्र के निवासी हों और जिन्हें स्नातक की उपाधि प्राप्त किए कम से कम तीन वर्ष हो चुके हों।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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निम्नलिखित में से कौन सा देश लाल सागर के साथ सीमा साझा नहीं करता है?
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चंपारण सत्याग्रह (1917) और स्वतंत्रता आंदोलन में बिहार की भूमिका के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राजकुमार शुक्ल के विशेष आग्रह पर महात्मा गांधी चंपारण आए थे, और इस सत्याग्रह के दौरान किसानों की समस्याओं की जाँच के लिए ब्रिटिश सरकार द्वारा गठित 'चंपारण कृषि जाँच समिति' (Champaran Agrarian Enquiry Committee) के सदस्यों में महात्मा गांधी के साथ-साथ प्रसिद्ध कांग्रेसी नेता मदन मोहन मालवीय और एम. के. गांधी स्वयं इसके सदस्य थे।
2. चंपारण सत्याग्रह की सफलता के बाद महात्मा गांधी को 'महात्मा' की उपाधि से सम्मानित किया गया था, और रविन्द्रनाथ टैगोर ने उन्हें पहली बार इस उपाधि से भूषित किया था, जबकि इसी आंदोलन के दौरान बिहार के स्थानीय वकीलों जैसे ब्रजकिशोर प्रसाद, राजेंद्र प्रसाद, और अनुग्रह नारायण सिंह ने गांधीजी के मुख्य सहयोगियों के रूप में कार्य किया था।
3. तिनकाठिया पद्धति के तहत चंपारण के किसानों को अपनी ज़मीन के कुल 3/20वें हिस्से पर अनिवार्य रूप से नील (Indigo) की खेती करनी पड़ती थी, जिसके विरुद्ध यूरोपीय नील बागान मालिकों द्वारा किसानों का आर्थिक व शारीरिक शोषण किया जा रहा था।
4. चंपारण सत्याग्रह के दौरान ही ब्रिटिश प्रशासन ने महात्मा गांधी को चंपारण छोड़ने का औपचारिक आदेश (Notice) दिया था, जिसका उल्लंघन करने पर गांधीजी पर मुकदमा चलाया गया, परंतु जनसमर्थन के भारी दबाव और किसानों की एकजुटता को देखते हुए भारत के तत्कालीन वायसराय लॉर्ड चेम्सफोर्ड के आदेश पर यह मुकदमा वापस ले लिया गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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1757 से 1857 के मध्य ब्रिटिश औपनिवेशिक नीतियों और भू-राजस्व व्यवस्था के विरुद्ध भारत में हुए 'अन्य जन आंदोलनों' के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. वर्ष 1799 में विजयनगरम के राजा की मृत्यु के बाद ब्रिटिश कंपनी द्वारा वहाँ के राजा के उत्तराधिकारी पर अत्यधिक सेना व्यय का भार लादने और किले को नष्ट करने के आदेश के विरुद्ध वहाँ की जनता और पोलिगारों ने उमातुर के विद्रोह का नेतृत्व किया था, जिसे ब्रिटिश सेना ने कड़ाई से कुचल दिया।
2. केरल (मालाबार क्षेत्र) में ब्रिटिश शासन के विरुद्ध 1800-1805 के दौरान 'पझस्सी राजा' (Kerala Varma Pazhassi Raja) के नेतृत्व में हुए कोर्लियोट (कटीरी) विद्रोह ने अंग्रेजों को भारी क्षति पहुंचाई थी, जिसमें स्थानीय नायरों और कुरिचिया जनजातियों ने गोरिल्ला युद्ध की रणनीति का उपयोग किया था।
3. वर्ष 1824 में असम में अहोम राजवंश के राजकुमार गोपिनाथ बरदलोई के नेतृत्व में हुए अहोम विद्रोह का मुख्य कारण ब्रिटिश कंपनी द्वारा प्रथम आंग्ल-बर्मा युद्ध के पश्चात असम को ब्रिटिश साम्राज्य में मिलाने का वचन पूरा न करना और स्थानीय प्रशासन में भारी हस्तक्षेप करना था।
4. गंजाम (ओडिशा) के जमींदार धनंजय भंज (किंग्स ऑफ़ घुमसर) द्वारा 1835-1837 के दौरान ब्रिटिश कंपनी की नई भू-राजस्व नीतियों और प्रशासनिक नियंत्रण के विरुद्ध एक शक्तिशाली विद्रोह किया गया था, जिसे दबाने के लिए ब्रिटिश सरकार को जॉर्ज रसेल के नेतृत्व में विशेष सेना भेजनी पड़ी थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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