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BPSC TRE 4.0
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पंगसौ दर्रा, जो हाल ही में चर्चा में रहा, किस राज्य में स्थित है?

Detailed Explanation

यह अरुणाचल प्रदेश में स्थित है.
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→ प्रकाश के अपवर्तन और लेंसों से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. जब प्रकाश की किरण सघन माध्यम से विरल माध्यम में प्रवेश करती है, तो वह अभिलंब से दूर हट जाती है, तथा इस स्थिति में आपतन कोण का मान अपवर्तन कोण से कम होता है। 2. उत्तल लेंस को 'अभिसारी लेंस' (Converging Lens) कहा जाता है क्योंकि यह मुख्य अक्ष के समांतर आने वाली प्रकाश की किरणों को एक बिंदु पर केंद्रित कर देता है, जबकि अवतल लेंस को 'अपसारी लेंस' कहा जाता है। 3. लेंस की क्षमता (Power) का मात्रक 'डायोप्टर' (Diopter) होता है, जो लेंस की फोकस दूरी (मीटर में) का व्युत्क्रम होता है; उत्तल लेंस की फोकस दूरी और क्षमता दोनों धनात्मक होती हैं, जबकि अवतल लेंस के लिए ये ऋणात्मक होती हैं। 4. यदि किसी उत्तल लेंस को ऐसे द्रव में डुबोया जाए जिसका अपवर्तनांक लेंस के पदार्थ के अपवर्तनांक से अधिक हो, तो लेंस की फोकस दूरी अनंत हो जाती है और वह लेंस अपनी प्रकृति बदलकर 'अपसारी लेंस' की तरह व्यवहार करने लगता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं? → बस्तियों (गोलाकार, तारा-आकार, T-आकार, क्रॉस-आकार) के संबंध में निम्नलिखित कथनों में से कौन से सही हैं? → राजस्थान की भील जनजाति का प्रथम उल्लेख कहाँ मिलता है? → बिहार के जनजातीय आंदोलनों, विशेष रूप से संथाल हूल (1855-56), उलगुलान (बिरसा मुंडा आंदोलन) और ताना भगत आंदोलन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संथाल विद्रोह (हूल) का नेतृत्व करने वाले सिन्हू, कान्हू, चांद और भैरव ने ब्रिटिश शासन, साहूकारों (दीकू) और जमींदारों के शोषण के विरुद्ध भगवा झंडे के तहत सशस्त्र संघर्ष का आह्वान किया था, और इस विद्रोह के परिणाम स्वरूप ही 'संथाल परगना टेनेंसी एक्ट' (SPTA) पारित किया गया था। 2. वर्ष 1899-1900 में हुए 'उलगुलान' (महान हलचल) का नेतृत्व करने वाले बिरसा मुंडा ने मुंडा राज की स्थापना का नारा दिया था, जिसमें अंधविश्वासों, पशुबलि और शराबखोरी का विरोध करते हुए एक नैतिक और संगठित समाज के निर्माण पर बल दिया गया था। 3. जतरा भगत के नेतृत्व में वर्ष 1914 में शुरू हुआ 'ताना भगत आंदोलन' उरांव जनजाति का एक अहिंसक और सुधारवादी आंदोलन था, जिसमें अंग्रेजों को भू-राजस्व देने का विरोध किया गया और उन्होंने असहयोग आंदोलन के दौरान गांधीजी के साथ मिलकर स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय भागीदारी की थी। 4. पहाड़िया विद्रोह, जो राजमहल की पहाड़ियों के क्षेत्र में महतो और पहाड़िया सरदारों द्वारा अंग्रेजों की भू-राजस्व नीतियों के खिलाफ किया गया था, पूरी तरह से एक सफल और स्थायी सुधारवादी आंदोलन साबित हुआ था जिसने अंग्रेजों को अपनी नीतियों को वापस लेने के लिए बाध्य कर दिया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं? → बिहार के किसान आंदोलनों और विद्रोहों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. स्वामी सहजानंद सरस्वती द्वारा वर्ष 1929 में 'बिहार प्रांतीय किसान सभा' की स्थापना की गई थी, जिसका मुख्य उद्देश्य किसानों के जमींदारों द्वारा किए जा रहे उत्पीड़न और बेदखली के विरुद्ध आवाज उठाना था। 2. बकाश्त भूमि (Bakasht Land) आंदोलन का मुख्य उद्देश्य उन जमींदारों के खिलाफ संघर्ष करना था जिन्होंने किसानों की ज़मीनें गैर-कानूनी तरीके से छीन ली थीं, और यह आंदोलन मुख्य रूप से किसानों के स्वत्व और अधिकार की रक्षा से जुड़ा था। 3. वर्ष 1936 में लखनऊ में आयोजित अखिल भारतीय किसान सभा के प्रथम सम्मेलन के अध्यक्ष स्वामी सहजानंद सरस्वती चुने गए थे, जबकि इसके महासचिव एन.जी. रंगा को बनाया गया था। 4. मोकामा ताल क्षेत्र में कार्यानंद शर्मा के नेतृत्व में चलाए गए किसान आंदोलन का मुख्य उद्देश्य किसानों को लगान से पूरी तरह मुक्ति दिलाना और ब्रिटिश शासन को उखाड़ फेंकना था, और इस आंदोलन का कोई आर्थिक या कृषि संबंधी आधार नहीं था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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