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Child Development
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किशोरावस्था .......... के बीच शुरू और समाप्त होती है।

Detailed Explanation

सामान्यतः किशोरावस्था 11 से 18 वर्ष के बीच मानी जाती है।
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→ प्रगतिशील शिक्षा (Progressive Education) और बाल-केंद्रित शिक्षाशास्त्र के तात्विक एवं दार्शनिक परिप्रेक्ष्य में, जॉन डीवी (John Dewey) के इस कथन का कि 'शिक्षा भविष्य की तैयारी नहीं है, बल्कि शिक्षा ही जीवन है' (Education is not a preparation for life, life itself is the process of living), स्कूल की सामाजिक संरचना और पाठ्यक्रम के संदर्भ में गहन विश्लेषण करने पर, निम्नलिखित में से कौन-सी परिकल्पना एक आदर्श प्रगतिशील विद्यालय की सबसे मौलिक और वैज्ञानिक विशेषता को स्पष्ट करती है? → लॉरेंस कोहलबर्ग के नैतिक विकास के सिद्धांत (Moral Development Theory) के अंतर्गत 'पारंपरिक स्तर' (Conventional Level) के प्रथम चरण—'अच्छा लड़का - अच्छी लड़की अभिविन्यास' (Good Boy - Good Girl Orientation / अंतर-व्यक्तिगत समन्वय) तथा 'उत्तर-पारंपरिक स्तर' (Post-Conventional Level) के प्रथम चरण—'सामाजिक अनुबंध और व्यक्तिगत अधिकार अभिविन्यास' (Social Contract and Individual Rights Orientation)—की तात्विक एवं दार्शनिक गतिकी का सूक्ष्म विश्लेषण करने पर, सामाजिक नियमों और नैतिकता के पालन के संदर्भ में इन दोनों चरणों के मध्य क्या मूलभूत तात्विक अंतर है? → समावेशी शिक्षा (Inclusive Education) के संदर्भ में 'विशिष्ट बालकों' (Children with Special Needs - CWSN) के लिए राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) और निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE Act 2009) के विधिक प्रावधानों का गहन विश्लेषण करने पर, 'समग्र शिक्षा अभियान' (Samagra Shiksha Abhiyan) के अंतर्गत विद्यालयों में 'रिसोर्स रूम' (Resource Room) और 'विशेष शिक्षकों' (Special Educators) की भूमिका के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सर्वाधिक प्रामाणिक एवं वैज्ञानिक है? → सीखने की प्रक्रिया में 'पठार' (Plateau) का मुख्य कारण क्या है? → गेस्टाल्टवादी अधिगम सिद्धांत (सूझ या अंतर्दृष्टि का सिद्धांत) के अंतर्गत वोल्फगैंग कोहलर द्वारा प्रतिपादित 'परिसर का संज्ञानात्मक पुनर्गठन' (Cognitive Restructuring of the Perceptual Field) और 'अकस्मात् समाधान' (Aha! Experience) की अवधारणा का गहन विश्लेषण करने पर, यदि कोई शिक्षार्थी किसी जटिल समस्या से जूझते हुए अचानक से सभी छितरी हुई परिस्थितियों और साधनों के आंतरिक संबंधों को एक समग्र दृष्टि में पिरोकर बिना किसी बाहरी यांत्रिक क्रमिक प्रयास के सीधे सही हल तक पहुँच जाता है, तो इस अधिगम प्रक्रिया के दार्शनिक और मनोवैज्ञानिक स्वरूप के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सर्वाधिक प्रामाणिक रूप से सत्य है?
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