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Civil services
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मौर्यकालीन प्रशासन में 'समाहर्ता' (Samaharta) का कार्य क्या था?
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Detailed Explanation
मौर्य प्रशासन में 'समाहर्ता' राजस्व विभाग का प्रमुख होता था, जो राजस्व एकत्र करने और व्यय का हिसाब रखने के लिए जिम्मेदार था।
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भारतीय इतिहास, कला और संस्कृति के संदर्भ में, सल्तनत काल के दौरान प्रशासनिक व्यवस्था और सैन्य सुधारों से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. सल्तनत काल में 'इक्ता' (Iqta) व्यवस्था एक प्रकार की भू-राजस्व असाइनमेंट प्रणाली थी, जिसके तहत सैन्य कमांडरों या अधिकारियों (जिन्हें इक्तादार या मुक्ती कहा जाता था) को वेतन के बदले एक निश्चित क्षेत्र से राजस्व एकत्र करने का अधिकार दिया जाता था, और यह मूल रूप से सुल्तान इल्तुतमिश के शासनकाल में बड़े पैमाने पर संगठित की गई थी।
2. सुल्तान अलाउद्दीन खिलजी ने अपनी सेना को मजबूत करने और सैनिकों को नकद वेतन देने के लिए बाजार नियंत्रण (Market Control) और मूल्य स्थिरीकरण की नीति लागू की थी, जिसके तहत उसने घोड़ों की पहचान के लिए 'दाग' (Daag) प्रथा और सैनिकों के हुलिया का पंजीकरण करने की प्रणाली शुरू की थी।
3. मुहम्मद बिन तुगलक के शासनकाल में दीवान-ए-कोही (Diwan-e-Kohi) नामक एक नए कृषि विभाग की स्थापना की गई थी, जिसका मुख्य उद्देश्य राज्य की प्रत्यक्ष देखरेख में बंजर भूमि को कृषि योग्य बनाना और किसानों को तकावी (Takavi) ऋण प्रदान करना था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 312' के अंतर्गत 'अखिल भारतीय सेवाओं' (All India Services) के गठन, शक्तियों और राज्यसभा की विशेष शक्तियों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 312 के अनुसार, यदि राज्य सभा उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई बहुमत से यह संकल्प पारित कर दे कि राष्ट्रीय हित में ऐसा करना आवश्यक है, तो संसद कानून द्वारा भारतीय न्यायिक सेवा (All India Judicial Service) सहित नई अखिल भारतीय सेवाओं के सृजन का प्रावधान कर सकती है।
2. अखिल भारतीय सेवाओं के सदस्यों की नियुक्ति और उनका सेवा-प्रबंधन केंद्र सरकार द्वारा किया जाता है, किंतु उनका नियंत्रण और अनुशासनात्मक अधिकार केवल उस राज्य सरकार के पास होता है जहाँ वे वर्तमान में अपनी सेवाएं दे रहे होते हैं, और केंद्र सरकार किसी भी स्थिति में उनके विरुद्ध सीधा अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं कर सकती है।
3. अनुच्छेद 312 के तहत सृجित की जाने वाली किसी भी अखिल भारतीय सेवा के संबंध में संसद द्वारा बनाया गया कानून संविधान के अनुच्छेद 311 द्वारा प्रदत्त सिविल सेवकों के संरक्षण और सुरक्षा के प्रावधानों को पूरी तरह से निरस्त या समाप्त कर सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय इतिहास और राष्ट्रीय आंदोलन के संदर्भ में, 'वर्ष 1931 के कराची अधिवेशन' (Karachi Session) और पारित प्रस्तावों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इस ऐतिहासिक अधिवेशन की अध्यक्षता वल्लभभाई पटेल द्वारा की गई थी, और इसी अधिवेशन में कांग्रेस ने गांधी-इरविन समझौते का समर्थन करते हुए अपनी मुहर लगाई थी।
2. इसी अधिवेशन में कांग्रेस ने पहली बार 'मौलिक अधिकार और आर्थिक नीति' (Fundamental Rights and National Economic Programme) पर एक विस्तृत प्रस्ताव पारित किया था, जिसके प्रारूप को पंडित जवाहरलाल नेहरू द्वारा तैयार किया गया था।
3. कराची अधिवेशन में ही महात्मा गांधी ने प्रसिद्ध रूप से यह घोषणा की थी कि "गांधी मर सकता है, परंतु गांधीवाद हमेशा जीवित रहेगा", और इसी सम्मेलन में उन्होंने गोलमेज सम्मेलन में भाग लेने से पूर्ण रूप से इनकार कर दिया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारत में राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस कब मनाया जाता है?
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भारतीय संविधान के भाग V और भाग VI के अंतर्गत 'संघीय कार्यपालिका' और 'राज्य कार्यपालिका' के बीच शक्तियों, विशेषाधिकारों एवं संवैधानिक प्रावधानों की तुलना के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 72 के तहत राष्ट्रपति को किसी भी मामले में (जिसमें मृत्युदंड का मामला भी शामिल है) क्षमादान देने की शक्ति प्राप्त है, जबकि अनुच्छेद 161 के तहत राज्यपाल को भी राज्य सूची के विषयों पर मृत्युदंड के मामलों को छोड़कर अन्य सभी मामलों में क्षमादान, प्रातिलम्ब, विराम या परिहार की शक्ति प्राप्त होती है।
2. भारतीय संविधान के अनुच्छेद 361 के अंतर्गत राष्ट्रपति या किसी राज्य के राज्यपाल को अपने कार्यालय की शक्तियों के प्रयोग और कर्तव्यों के पालन के लिए देश के किसी भी न्यायालय के प्रति उत्तरदायी नहीं ठहराया जा सकता, और उनके कार्यकाल के दौरान उनके विरुद्ध किसी भी आपराधिक कार्यवाही को किसी भी न्यायालय में संस्थित या जारी नहीं रखा जा सकता।
3. जहाँ एक ओर लोकसभा को भंग करने का विशेषाधिकार पूरी तरह से प्रधानमंत्री की सलाह पर राष्ट्रपति के पास निहित होता है, वहीं दूसरी ओर राज्य के राज्यपाल को मंत्रिपरिषद की सलाह के बिना भी अपनी स्वविवेकनीय शक्तियों के तहत राज्य विधानसभा को विघटित (Dissolve) करने की पूर्ण संवैधानिक शक्ति प्राप्त होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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