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केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) के अध्यक्ष के रूप में किसे पुनर्नियुक्त किया गया है?
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Detailed Explanation
रवि अग्रवाल को केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) के अध्यक्ष के रूप में पुनर्नियुक्त किया गया है।
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भारतीय पर्यावरण, पारिस्थितिकी और जैव विविधता संरक्षण के संदर्भ में, भारत में 'राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड' (National Board for Wildlife - NBWL) तथा 'वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972' के विधिक एवं संस्थागत प्रावधानों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड' (NBWL) की स्थापना 'वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972' (वर्ष 2003 के संशोधनों के उपरांत) के अंतर्गत एक सांविधिक (Statutory) शीर्ष सलाहकार निकाय के रूप में की गई है, जिसकी अध्यक्षता पदेन रूप से केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री द्वारा की जाती है, और यह देश में वन्यजीवों तथा संरक्षित क्षेत्रों से जुड़ी नीतियों के निर्धारण के लिए उत्तरदायी है।
2. वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के प्रावधानों के अनुसार, किसी भी राष्ट्रीय उद्यान (National Park) या वन्यजीव अभ्यारण्य (Wildlife Sanctuary) की सीमाओं में परिवर्तन या उसके अंतर्गत किसी भी गैर-वानिकी गतिविधियों के लिए वाणिज्यिक उपयोग हेतु 'राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड' की स्थायी समिति (Standing Committee) की पूर्व अनुमति या संस्तुति लेना अनिवार्य है।
3. 'गोवा फाउंडेशन बनाम भारत संघ' और अन्य संबंधित न्यायिक मामलों में सर्वोच्च न्यायालय ने यह स्पष्ट किया है कि प्रत्येक संरक्षित क्षेत्र (Protected Area) के चारों ओर पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील जोन (Eco-Sensitive Zone - ESZ) का सीमांकन करना अनिवार्य है, जिसकी न्यूनतम चौड़ाई अधिनियम के तहत सभी राज्यों के लिए एकसमान रूप से कम से कम 10 किलोमीटर तय की गई है, जिसमें किसी भी प्रकार के छूट का कोई प्रावधान नहीं है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग V' (संघ) के अंतर्गत 'संसदीय विशेषाधिकारों' (Parliamentary Privileges) तथा उनके उल्लंघन या अवमानना के प्रावधानों के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 105 में संसद के सदनों, उनके सदस्यों और समितियों की शक्तियों, विशेषाधिकारों और उन्मुक्तियों का उल्लेख किया गया है, जिसके अनुसार संसद सदस्यों को सदन या उसकी किसी समिति में कही गई किसी भी बात या दिए गए किसी भी मत के संबंध में किसी भी न्यायालय में कोई कानूनी कार्यवाही या सिविल/आपराधिक मुकदमा चलाने से पूर्ण संरक्षण प्राप्त होता है।
2. संसदीय विशेषाधिकारों के अंतर्गत संसद के प्रत्येक सदन को यह अनन्य अधिकार प्राप्त है कि वह अपने सदस्यों के साथ-साथ बाहरी व्यक्तियों को भी अपने विशेषाधिकार के हनन या सदन की अवमानना (Breach of Privilege or Contempt of the House) के लिए दंडित कर सकता है, जिसमें कारावास की सजा देना भी शामिल है।
3. चूँकि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 105(3) के दूसरे भाग में यह स्पष्ट रूप से उपबंधित किया गया है कि जब तक संसद इन विशेषाधिकारों को संहिताबद्ध (Codify) नहीं करती है, तब तक इसके विशेषाधिकार ब्रिटेन की 'हाउस ऑफ कॉमन्स' के विशेषाधिकारों के समरूप बने रहेंगे, इसलिए वर्तमान में संसद ने एक व्यापक और पूर्ण अधिनियम पारित करके इन सभी विशेषाधिकारों को पूरी तरह संहिताबद्ध कर दिया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 72' के अंतर्गत राष्ट्रपति की 'क्षमादान की शक्ति' (Pardoning Power) और इसकी न्यायिक समीक्षा के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राष्ट्रपति की क्षमादान की शक्ति (अनुच्छेद 72) और राज्यपाल की क्षमादान की शक्ति (अनुच्छेद 161) में एक प्रमुख अंतर यह है कि राष्ट्रपति मृत्युदंड (Death Sentence) को पूरी तरह माफ या क्षमा कर सकता है, जबकि राज्यपाल को मृत्युदंड के मामलों में क्षमादान देने की संवैधानिक शक्ति प्राप्त नहीं है।
2. राष्ट्रपति द्वारा संविधान के अनुच्छेद 72 के तहत दी गई दया याचिका (Mercy Petition) के निर्णय पर न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) लागू नहीं होती है, क्योंकि यह राष्ट्रपति का एक अनन्य और पूर्ण विवेकाधीन (Absolute Discretionary) कार्यकारी विशेषाधिकार है।
3. 'इहरूव बनाम तमिलनाडु राज्य' (1982) और बाद के अन्य मामलों में उच्चतम न्यायालय ने यह स्पष्ट किया है कि राष्ट्रपति को अपनी क्षमादान की शक्तियों का प्रयोग करते समय केंद्रीय मंत्रिमंडल (Council of Ministers) की सलाह के अनुसार कार्य करना बाध्यकारी होता है, और यह स्वविवेक से लिया गया निर्णय नहीं है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारत के 98वें Chess Grandmaster कौन बने हैं?
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सामान्य विज्ञान, पर्यावरण और पारिस्थितिकी के संदर्भ में, 'जैव विविधता और पारिस्थितिकी तंत्र सेवा मंच' (IPBES - Intergovernmental Science-Policy Platform on Biodiversity and Ecosystem Services) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. IPBES एक स्वतंत्र अंतर-सरकारी निकाय है जिसे संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP), यूनेस्को (UNESCO), खाद्य और कृषि संगठन (FAO) और संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) द्वारा संयुक्त रूप से वर्ष 2012 में स्थापित किया गया था।
2. यह मंच केवल सरकारों को वैज्ञानिक आकलन प्रदान करता है और इसे औपचारिक रूप से 'संयुक्त राष्ट्र महासभा' द्वारा स्थापित किया गया है, जिसके कारण यह सीधे संयुक्त राष्ट्र का एक अंग (Organ) है।
3. आईपीबीईएस (IPBES) द्वारा जारी वैश्विक आकलन रिपोर्ट ने यह चेतावनी दी है कि वर्तमान में लगभग 1 मिलियन प्रजातियों के विलुप्त होने का खतरा है, जिसका मुख्य कारण मानवीय गतिविधियाँ हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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