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पूर्वोत्तर भारत एवं पूर्वी हिमालय से खोजी गई नई ब्लाइंड फिश प्रजाति का नाम क्या है?

Detailed Explanation

पूर्वोत्तर भारत और पूर्वी हिमालय में खोजी गई नई ब्लाइंड फिश प्रजाति का नाम 'नियोलिसोसिटिलस पनर' (Neolissochilus pnar) है।
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→ भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग V' (संघ - अनुच्छेद 52 से 151) के अंतर्गत 'भारत के महान्यायवादी' (Attorney General of India) और 'महाधिवक्ता' (Solicitor General) के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 76 के अनुसार राष्ट्रपति द्वारा भारत के महान्यायवादी की नियुक्ति ऐसे व्यक्ति को की जाती है जो उच्चतम न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्त होने के लिए अर्ह (Qualified) हो, और महान्यायवादी को भारत के सभी न्यायालयों में सुनवाई का अधिकार प्राप्त होता है, तथा उसे संसद के दोनों सदनों की कार्यवाही में भाग लेने और बोलने का अधिकार है, किंतु उसे मतदान करने का कोई अधिकार नहीं होता है। 2. भारतीय संविधान के मूल पाठ में 'महाधिवक्ता' (Solicitor General of India) और अन्य 'अतिरिक्त महाधिवक्ताओं' (Additional Solicitors General) के पदों का स्पष्ट उल्लेख किया गया है, जो महान्यायवादी को उनके आधिकारिक कर्तव्यों के निर्वहन में सहायता प्रदान करते हैं, तथा ये सभी अधिकारी संघीय मंत्रिमंडल के राजनीतिक निर्णयों के तहत नियुक्त किए जाते हैं और सरकार बदलने पर इन्हें अनिवार्य रूप से इस्तीफा देना पड़ता है। 3. महान्यायवादी को अपने निजी विधिक अभ्यास (Private Legal Practice) से वंचित नहीं किया जाता है, बशर्ते कि वह जिस मामले में भारत सरकार के खिलाफ या ऐसे मामले में जिसमें भारत सरकार की रुचि हो, कोई सलाह या वकालत न करे, और वह संसद की किसी समिति का सदस्य भी बनाया जा सकता है, किंतु उसे उस समिति में भी मतदान करने का कोई अधिकार नहीं होता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग V' के अंतर्गत 'संघीय न्यायपालिका' (Union Judiciary) अर्थात् उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) के अधिकारक्षेत्र और शक्तियों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 131 के अंतर्गत उच्चतम न्यायालय के 'मूल आरंभिक अधिकारक्षेत्र' (Original Jurisdiction) के दायरे में वे विवाद आते हैं जो केंद्र सरकार और एक या अधिक राज्यों के बीच, या एक तरफ केंद्र सरकार और कोई राज्य तथा दूसरी तरफ एक या अधिक राज्यों के बीच, या दो या अधिक राज्यों के बीच उत्पन्न होते हैं, तथापि इस अधिकारक्षेत्र में रियासतों के समय से चली आ रही किसी संधि या समझौते से उत्पन्न विवाद भी पूर्णतः शामिल होते हैं। 2. संविधान के अनुच्छेद 143 के तहत राष्ट्रपति को उच्चतम न्यायालय से परामर्श करने की शक्ति प्राप्त है, जिसके अंतर्गत यदि कानून या तथ्‍य का कोई ऐसा प्रश्न उत्पन्न होता है जो सार्वजनिक महत्व का है, तो राष्ट्रपति उस पर उच्चतम न्यायालय की राय मांग सकता है, और ऐसी स्थिति में उच्चतम न्यायालय के लिए राष्ट्रपति को अपनी राय देना संवैधानिक रूप से अनिवार्य होता है। 3. उच्चतम न्यायालय एक 'अभिलेख न्यायालय' (Court of Record) है, जिसका अर्थ यह है कि उसके निर्णय और अभिलेख सर्वदा साक्ष्य के रूप में रखे जाते हैं और उनकी प्रामाणिकता पर किसी भी न्यायालय में प्रश्न नहीं उठाया जा सकता है, साथ ही उसे अपने अवमान के लिए दंडित करने की शक्ति भी प्राप्त है जिसमें संसद की अनुमति के बिना किसी को भी कारावास की सजा देना शामिल है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → मिस्र की राजधानी काहिरा किस नदी के किनारे स्थित है? → भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग XI' के अंतर्गत 'वित्तीय संबंधों' (Financial Relations - Articles 268-293) से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 268 के तहत कुछ ऐसे शुल्क (जैसे औषधीय और प्रसाधन तैयारियों पर उत्पाद शुल्क) हैं, जिन्हें संघ द्वारा लगाया और कलेक्ट किया जाता है, किंतु उनका संग्रहण उस राज्य के भीतर से होने के कारण उस राजस्व का पूर्ण हिस्सा उस संबंधित राज्य को ही सौंप दिया जाता है। 2. अनुच्छेद 270 के अंतर्गत संघ द्वारा लगाए और संगृहीत किए जाने वाले सभी कर और शुल्क (कुछ विशिष्ट उपकरों, सरचार्ज आदि को छोड़कर) केंद्र और राज्यों के बीच 'वित्त आयोग' (Finance Commission) की सिफारिशों के आधार पर वितरित किए जाते हैं, और इस प्रकार प्राप्त होने वाला राजस्व भारत की संचित निधि (Consolidated Fund of India) का हिस्सा नहीं बनता है। 3. अनुच्छेद 275 के तहत संसद को यह शक्ति प्राप्त है कि वह संघ से उन राज्यों को वित्तीय सहायता (Grants-in-aid) दे, जिन्हें संसद की दृष्टि में वित्तीय सहायता की आवश्यकता है, तथा असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम राज्यों के जनजाति क्षेत्रों के कल्याण के लिए इस अनुच्छेद के अंतर्गत अनिवार्य रूप से विशेष अनुदान दिए जाने का प्रावधान किया गया है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 123' के अंतर्गत राष्ट्रपति की 'ध्यादेश जारी करने की शक्ति' (Ordinance-making Power) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. राष्ट्रपति की अध्यादेश प्रख्यापित करने की शक्ति संसद की कानून बनाने की शक्ति के सह-विस्तार (Co-extensive) है, जिसका अर्थ है कि राष्ट्रपति केवल उन्हीं विषयों पर अध्यादेश जारी कर सकता है जिन पर संसद कानून बनाने की शक्ति रखती है। 2. ऐतिहासिक 'कुशल सिंह बनाम बिहार राज्य' मामले और अन्य संवैधानिक निर्णयों के अनुसार, राष्ट्रपति द्वारा जारी किया गया अध्यादेश न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) के दायरे से पूरी तरह बाहर होता है, क्योंकि यह कार्यपालिका के सर्वोच्च प्राधिकारी द्वारा लिया गया एक नीतिगत निर्णय है। 3. संसद के पुनः समवेत होने पर प्रत्येक अध्यादेश को संसद के दोनों सदनों के समक्ष रखना अनिवार्य है, और यदि संसद इसे बिना किसी अनुमोदन के छह सप्ताह की अवधि समाप्त होने से पहले अस्वीकार कर देती है, तो अध्यादेश तुरंत प्रभाव से निष्प्रभावी हो जाता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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