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वैज्ञानिक रूप से आयु-निर्धारित विश्व का सबसे पुराना बरगद कहाँ पाया गया है?

Detailed Explanation

वैज्ञानिक रूप से आयु-निर्धारित विश्व का सबसे पुराना बरगद का पेड़ मैसूर, कर्नाटक में पाया गया है।
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→ भारतीय और विश्व भूगोल के संदर्भ में, 'एल् नीनो-दक्षिणी दोलन' (ENSO - El Niño-Southern Oscillation) और 'इंडियन ओशन डिपोल' (IOD - Indian Ocean Dipole) की अंतःक्रिया के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. एल् नीनो के दौरान मध्य और पूर्वी प्रशांत महासागर के सतही जल का तापमान सामान्य से अधिक हो जाता है, जिससे प्रशांत महासागर में वायुमंडलीय दबाव की स्थिति बदल जाती है, जिसे 'दक्षिणी दोलन' कहा जाता है। 2. 'धनात्मक इंडियन ओशन डिपोल' (Positive IOD) की स्थिति में पश्चिमी हिंद महासागर (अफ़्रीका के तट के पास) का जल असामान्य रूप से ठंडा हो जाता है, जबकि पूर्वी हिंद महासागर (इंडोनेशिया के पास) का जल गर्म हो जाता है, जिससे भारतीय मानसून पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। 3. एक मजबूत धनात्मक IOD अक्सर प्रशांत महासागर में उत्पन्न होने वाले मजबूत एल् नीनो के नकारात्मक प्रभावों को आंशिक रूप से संतुलित या कमजोर कर सकता है, जिससे भारत में मानसून की वर्षा पर पड़ने वाला विपरीत प्रभाव कम हो जाता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → शुक्र और यूरेनस की परिक्रमण दिशा अन्य ग्रहों से कैसे भिन्न है? → भारतीय और विश्व भूगोल के संदर्भ में, 'भूकंपीय तरंगों' (Seismic Waves) और पृथ्वी के आंतरिक भाग की संरचना के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. भूकंप के दौरान उत्पन्न होने वाली 'प्राथमिक तरंगें' (P-Waves) ध्वनि तरंगों की तरह अनुदैर्ध्य (Longitudinal) तरंगें होती हैं, जो ठोस, तरल और गैस तीनों माध्यमों से गुजर सकती हैं, हालांकि तरल माध्यम में इनकी गति कम हो जाती है। 2. 'द्वितीयक तरंगें' (S-Waves) प्रकाश तरंगों की तरह अनुप्रस्थ (Transverse) तरंगें होती हैं, जो केवल ठोस माध्यम से ही गमन कर सकती हैं और तरल या गैसीय माध्यम में पूरी तरह लुप्त हो जाती हैं, जिसका उपयोग वैज्ञानिकों ने पृथ्वी के बाहरी कोर (Outer Core) के तरल होने का पता लगाने में किया है। 3. 'धरातलीय तरंगें' (Surface Waves या L-Waves) पृथ्वी के भीतर गहराई में गमन करती हैं और सबसे पहले भूकंप मापी यंत्र (Seismograph) पर दर्ज की जाती हैं, तथा ये किसी भी भूकंप के दौरान सबसे कम विनाशकारी होती हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → भारतीय इतिहास के संदर्भ में, 'महायान बौद्ध धर्म' (Mahayana Buddhism) के उद्भव, विकास और इसके दार्शनिक तथा कलात्मक स्वरूप के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. महायान बौद्ध धर्म का उदय कुषाण काल के दौरान स्पष्ट रूप से सामने आया, और इसके अनुयायियों ने बुद्ध को एक साधारण मार्गदर्शक या शिक्षक मानने के बजाय एक अलौकिक शक्ति और देवत्व के रूप में स्वीकार किया, जिन्हें प्रार्थना और भक्ति के माध्यम से मोक्ष प्राप्ति में सहायक माना गया। 2. महायान परंपरा में 'बोधिसत्वों' (Bodhisattvas) की अवधारणा को अत्यधिक केंद्रीय महत्व दिया गया, जिसके तहत बोधिसत्व वे पुण्यात्मा व्यक्ति हैं जो स्वयं अपना निर्वाण (Enlightenment) प्राप्त करने के बाद तुरंत संसार से विरक्त हो जाते हैं और अन्य सभी सचेतन प्राणियों के उद्धार के लिए अपनी आध्यात्मिक प्रगति का त्याग कर देते हैं। 3. गांधार और मथुरा कला शैलियाँ महायान बौद्ध धर्म के विकास से सीधे तौर पर जुड़ी हुई हैं, क्योंकि बुद्ध की मानव रूप में प्रथम मूर्तियों का निर्माण इन्हीं शैलियों के अंतर्गत किया गया था, जिससे बौद्ध धर्म में मूर्तिपूजा (Icon Worship) का प्रचलन प्रारंभ हुआ। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → भारतीय पर्यावरण कानून और 'राष्ट्रीय हरित अधिकरण' (National Green Tribunal - NGT) की विधिक शक्तियों तथा अधिकारक्षेत्र के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम, 2010 की धारा 14 और 15 के तहत NGT को पर्यावरण से जुड़े उन सभी सिविल मामलों में न्यायनिर्णयन की व्यापक शक्ति प्राप्त है जो अधिनियम की अनुसूची I में सूचीबद्ध सात विशिष्ट पर्यावरण कानूनों (जैसे पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, वन संरक्षण अधिनियम आदि) के प्रवर्तन से संबंधित हैं। 2. 'सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन बनाम भारत संघ' या NGT से जुड़े अन्य न्यायिक निर्णयों में यह स्पष्ट रूप से अभिनिर्धारित किया गया है कि अधिकरण के पास पर्यावरण संबंधी मामलों में आपराधिक अवमानना (Criminal Contempt) के मामलों को छोड़कर, अपने स्वयं के आदेशों, निर्देशों या निर्णयों की अवमानना के लिए सिविल अवमानना (Civil Contempt) के तहत दंडित करने की वही शक्ति प्राप्त है जो देश के उच्च न्यायालयों को होती है। 3. 'सेव मोनोआ बेसिन कमिटी बनाम भारत संघ' और अन्य मामलों में उच्चतम न्यायालय ने यह स्पष्ट किया है कि NGT के किसी भी आदेश या निर्णय के विरुद्ध सीधे सर्वोच्च न्यायालय में अपील करने से पहले aggrieved party (व्यथित पक्षकार) को संबंधित उच्च न्यायालय की खंडपीठ के समक्ष रिट याचिका दायर करना एक अनिवार्य और पूर्ववर्ती शर्त (Condition Precedent) है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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