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भारत की पहली चालक रहित पॉड टैक्सी सिस्टम परियोजना किस शहर में शुरू की गई है?

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भारत की पहली चालक रहित पॉड टैक्सी सिस्टम परियोजना हैदराबाद में शुरू की गई है।
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→ भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग IX-B' (सहकारी समितियाँ - अनुच्छेद 243-ZH से 243-ZT) तथा इससे संबंधित 97वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2011 के प्रावधानों के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के 97वें संशोधन अधिनियम, 2011 द्वारा सहकारी समितियों को संवैधानिक संरक्षण प्रदान किया गया, जिसके तहत भाग IX-B को जोड़ा गया, अनुच्छेद 19(1)(c) के तहत सहकारी समितियाँ बनाने के मौलिक अधिकार को स्पष्ट किया गया, तथा नीति निर्देशक तत्वों के अंतर्गत अनुच्छेद 43-B को अंतःस्थापित किया गया जो राज्य को सहकारी समितियों के स्वैच्छिक गठन, स्वायत्त कामकाज, लोकतांत्रिक नियंत्रण और व्यावसायिक प्रबंधन को बढ़ावा देने का निर्देश देता है। 2. सर्वोच्च न्यायालय के 'यूनियन एसोसिएशन ऑफ इंडिया बनाम अन्य' मामले (2021) के निर्णय के अनुसार, बहु-राजकीय सहकारी समितियों (Multi-State Cooperative Societies) से संबंधित मामलों में संसद और राज्य विधानमंडलों दोनों की विधायी शक्तियाँ समान रूप से विस्तृत हैं, और संसद द्वारा बनाए गए किसी भी कानून के विरुद्ध यदि कोई राज्य कानून बनाया जाता है, तो राज्य का कानून ही प्रभावी रहेगा। 3. अनुच्छेद 243-ZK के अनुसार किसी सहकारी समिति के बोर्ड के सदस्यों का कार्यकाल उनके पद ग्रहण करने की तारीख से अधिकतम पाँच वर्ष का होता है, और यदि किसी बोर्ड का विघटन या सुपरसेशन (Supersession) किया जाता है, तो ऐसी विघटन की तारीख से छह मास की अवधि के भीतर चुनाव कराना अनिवार्य होता है, बशर्ते कि सुपरsession की अधिकतम अवधि छह महीने से अधिक न हो (किंतु बहु-राजकीय सहकारी समितियों के मामले में यह अवधि एक वर्ष तक हो सकती है)। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → भारत का प्रथम वायसराय कौन था? → भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 72' के अंतर्गत भारत के राष्ट्रपति की 'क्षमादान की शक्ति' (Pardoning Power) तथा इसकी न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 72 के तहत राष्ट्रपति को सैन्य न्यायालय (Court Martial) द्वारा दिए गए दंड के मामलों में भी क्षमादान देने की शक्ति प्राप्त है, और यह शक्ति उन मामलों में भी प्रयोग की जा सकती है जहाँ मृत्युदंड दिया गया हो। 2. राज्यपाल की क्षमादान शक्ति (अनुच्छेद 161) के विपरीत, राष्ट्रपति की क्षमादान शक्ति में मृत्युदंड के मामलों में निलंबन, परिहार या लघुकरण के साथ-साथ पूर्ण क्षमा देने का अधिकार शामिल है, लेकिन राज्यपाल मृत्युदंड को पूरी तरह से क्षमा (Pardon) नहीं कर सकता है। 3. 'ईश्वर सिंह बनाम उत्तर प्रदेश राज्य' तथा अन्य ऐतिहासिक मामलों में उच्चतम न्यायालय ने यह प्रतिपादित किया है कि राष्ट्रपति द्वारा अनुच्छेद 72 के तहत क्षमादान याचिका पर लिए गए निर्णय की न्यायिक समीक्षा किसी भी आधार पर नहीं की जा सकती, क्योंकि यह राष्ट्रपति का पूर्ण रूप से विवेकपूर्ण और उन्मुक्ति प्राप्त विशेषाधिकार है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → भारतीय पर्यावरण और जैव विविधता के संदर्भ में, 'राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण' (National Biodiversity Authority - NBA) और 'जैविक विविधता अधिनियम, 2002' के प्रावधानों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. जैविक विविधता अधिनियम, 2002 के तहत स्थापित 'राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण' (NBA) एक सांविधिक और स्वायत्त निकाय है, जिसका मुख्यालय चेन्नई में स्थित है, और यह देश के जैविक संसाधनों के संरक्षण, उनके संधारणीय उपयोग तथा जैव संसाधनों तक पहुँच से प्राप्त होने वाले लाभों के न्यायसंगत बँटवारे को विनियमित करता है। 2. यह अधिनियम त्रि-स्तरीय संरचना का प्रावधान करता है, जिसके अंतर्गत राष्ट्रीय स्तर पर राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण, राज्य स्तर पर राज्य जैव विविधता बोर्ड (SBBs), और स्थानीय स्तर पर जैव विविधता प्रबंधन समितियाँ (BMCs) गठित की जाती हैं। 3. भारत के भीतर किसी भी भारतीय नागरिक या भारत में पंजीकृत संस्थाओं के लिए किसी भी जैविक संसाधन को व्यावसायिक उपयोग के लिए प्राप्त करने या उपयोग करने से पहले राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (NBA) से पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य है, भले ही वे राज्य जैव विविधता बोर्ड के अंतर्गत आते हों। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → भारतीय पर्यावरण कानून और 'राष्ट्रीय हरित अधिकरण' (National Green Tribunal - NGT) के विधिक क्षेत्राधिकार तथा संवैधानिक स्थिति के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम, 2010 की धारा 14 के तहत NGT को पर्यावरण से जुड़े उन विशिष्ट सिविल मामलों में न्यायनिर्णयन की व्यापक शक्ति प्राप्त है जो अधिनियम की अनुसूची I में सूचीबद्ध सात पर्यावरण कानूनों (जैसे पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, वायु प्रदूषण निवारण और नियंत्रण अधिनियम आदि) के प्रवर्तन से संबंधित हैं, किंतु इसके पास 'वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972' और 'अनुसूचित जनजाति और अन्य पारंपरिक वन निवासी (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियम, 2006' के अंतर्गत आने वाले मामलों पर विचार करने का वैधानिक अधिकार नहीं है। 2. 'मद्रास बार एसोसिएशन बनाम भारत संघ (2021)' मामले में उच्चतम न्यायालय ने यह स्पष्ट किया है कि राष्ट्रीय हरित अधिकरण के किसी भी आदेश, निर्णय या पुरस्कार के विरुद्ध अपील सीधे भारत के उच्चतम न्यायालय में ही की जा सकती है, और NGT के फैसलों के खिलाफ देश के किसी भी उच्च न्यायालय के समक्ष संविधान के अनुच्छेद 226 या 227 के तहत रिट अधिकारक्षेत्र का प्रयोग पूरी तरह से वर्जित है। 3. 'सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन बनाम भारत संघ' और अन्य न्यायिक निर्णयों के अनुसार, NGT के पास अपने आदेशों, निर्देशों या निर्णयों के पालन न किए जाने पर सिविल अवमानना (Civil Contempt) के साथ-साथ आपराधिक अवमानना (Criminal Contempt) के तहत भी दंडित करने की वही वैधानिक शक्तियाँ प्राप्त हैं जो देश के उच्च न्यायालयों को होती हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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