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सुमेलित कीजिए: A-2 (अलाई मीनार-अलाउद्दीन खिलजी), B-3 (फिरोजशाह कोटला-फिरोजशाह तुगलक), C-4 (तुगलकाबाद-गयासुद्दीन तुगलक), D-1 (दौलताबाद-मुहम्मद बिन तुगलक)।

Detailed Explanation

सभी स्मारक उनके संबंधित शासकों के साथ सही सुमेलित हैं।
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Related Questions

→ भारतीय अर्थव्यवस्था और सतत विकास के संदर्भ में, 'हरित बॉन्ड' (Green Bonds) और अंतर्राष्ट्रीय पूंजी बाजार संघ (ICMA) के 'हरित बॉन्ड सिद्धांत' (Green Bond Principles - GBP) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. हरित बॉन्ड एक प्रकार का निश्चित आय वाला वित्तीय उपकरण है जिसे विशेष रूप से जलवायु-अनुकूल, नवीकरणीय ऊर्जा, ऊर्जा दक्षता और सतत जल प्रबंधन जैसी पर्यावरण-अनुकूल परियोजनाओं के लिए धन जुटाने हेतु जारी किया जाता है। 2. अंतर्राष्ट्रीय पूंजी बाजार संघ (ICMA) द्वारा जारी 'हरित बॉन्ड सिद्धांत' स्वैच्छिक दिशा-निर्देश हैं जो पारदर्शिता, प्रकटीकरण और आय के उपयोग के प्रबंधन के संबंध में बाजार के मानक स्थापित करते हैं, और यह निवेशकों को हरित वित्तपोषण में विश्वास प्रदान करते हैं। 3. भारत में सॉवरेन ग्रीन बॉन्ड (Sovereign Green Bonds) फ्रेमवर्क के तहत जारी किए जाने वाले बॉन्ड से प्राप्त आय को भारत सरकार की कंसोलिडेटेड फंड ऑफ इंडिया (संचित निधि) में जमा किया जाता है, जिसका उपयोग देश के किसी भी सरकारी राजकोषीय घाटे को पूरा करने के लिए बिना किसी प्रतिबंध के किया जा सकता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → भारतीय अर्थव्यवस्था और सतत विकास के संदर्भ में, 'हरित बांड' (Green Bonds) और उनके नियमन के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. हरित बांड ऐसे निश्चित आय वाले वित्तीय उपकरण (Fixed-income instruments) हैं जिनका उपयोग विशेष रूप से पर्यावरण के अनुकूल, जलवायु-लचीली और नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं के वित्तपोषण या पुनर्वित्तपोषण के लिए किया जाता है। 2. भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने भारत में हरित ऋण पत्रों (Green Debt Securities) के निर्गम और लिस्टिंग के लिए दिशा-निर्देश जारी किए हैं, जिसके तहत ग्रीनवॉश (Greenwashing) से बचने के लिए जारीकर्ता को बांड की आय के उपयोग के संबंध में एक स्वतंत्र तीसरे पक्ष के प्रमाणीकरण (Third-party certification) का खुलासा करना अनिवार्य होता है। 3. संप्रभु हरित बांड (Sovereign Green Bonds) जारी करने वाला भारत दुनिया का पहला देश है, और इन बांडों से प्राप्त आय को भारत सरकार के समेकित निधि (Consolidated Fund of India) में जमा किया जाता है, जिसका उपयोग देश के राजकोषीय घाटे को पाटने के लिए किसी भी सरकारी कार्य में किया जा सकता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → भारतीय इतिहास और कला एवं संस्कृति के संदर्भ में, सल्तनत काल के दौरान प्रशासनिक व्यवस्था और राजस्व शब्दावली के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. सल्तनत काल में 'दीवान-ए-मुस्तखराज' (Diwan-i-Mustakhraj) नामक विभाग की स्थापना अलाउद्दीन खिलजी द्वारा की गई थी, जिसका प्रमुख कार्य लगान बकायेदारों की जाँच करना और राजस्व की वसूली में हुई हेराफेरी को रोकना था। 2. 'इक्ता प्रणाली' (Iqta System) के अंतर्गत सल्तनत के सुल्तानों द्वारा सैन्य अधिकारियों और अमीरों को वेतन के बदले भूमि के टुकड़े (इक्ता) प्रशासनिक नियंत्रण के लिए दिए जाते थे, तथा इल्तुतमिश के शासनकाल में ये इक्ता आनुवंशिक (Hereditary) बन गए थे और इनका हस्तांतरण पूर्णतः प्रतिबंधित था। 3. सल्तनत कालीन राजस्व व्यवस्था में 'खराज' (Kharaj) गैर-मुसलमानों पर लगाया जाने वाला भूमि कर था जो उनकी कुल उपज का एक-तिहाई से आधा हिस्सा होता था, जबकि 'जकात' (Zakat) मुसलमानों से उनकी संपत्ति पर लिया जाने वाला एक धार्मिक कर था जो केवल धार्मिक कार्यों और दान के लिए उपयोग किया जाता था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) द्वारा निर्धारित 'न्यायिक पुनरावलोकन' (Judicial Review) और संविधान की व्याख्या से संबंधित शक्तियों के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 13 के अंतर्गत न्यायिक पुनरावलोकन की शक्ति स्पष्ट रूप से उल्लेखित की गई है, जिसके तहत सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालय किसी भी ऐसे कानून को असंवैधानिक घोषित कर सकते हैं जो भाग III (मौलिक अधिकार) का उल्लंघन करता हो, और यह शक्ति न्यायपालिका की 'मूल संरचना' (Basic Structure) का भी अभिन्न हिस्सा है। 2. एल. चंद्रकुमार वाद (1997) में सर्वोच्च न्यायालय ने यह स्पष्ट किया कि संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत सर्वोच्च न्यायालय और अनुच्छेद 226 के तहत उच्च न्यायालयों की न्यायिक समीक्षा की शक्ति संविधान के बुनियादी ढाँचे का हिस्सा है, जिसे संसद द्वारा संवैधानिक संशोधन के माध्यम से भी छीना नहीं जा सकता है। 3. केशवानंद भारती वाद (1973) के निर्णय के बाद से, संसद द्वारा पारित किसी भी संविधान संशोधन अधिनियम को न्यायिक समीक्षा के दायरे से पूरी तरह बाहर रखा गया है, बशर्ते वह संशोधन अनुच्छेद 368 की निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार दोनों सदनों द्वारा विशेष बहुमत से पारित किया गया हो। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 32' के अंतर्गत सर्वोच्च न्यायालय की रिट अधिकारिता (Writ Jurisdiction) और इसके क्षेत्र के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान का अनुच्छेद 32 मौलिक अधिकारों के प्रवर्तन के लिए सर्वोच्च न्यायालय से संपर्क करने का एक मौलिक अधिकार प्रदान करता है, और डॉ. बी.आर. अम्बेडकर ने इसे 'संविधान की आत्मा और हृदय' की संज्ञा दी थी। 2. सर्वोच्च न्यायालय की रिट अधिकारिता केवल 'मूल अधिकारों' (Fundamental Rights) के उल्लंघन के मामलों तक ही सीमित है, जबकि उच्च न्यायालयों को अनुच्छेद 226 के तहत मूल अधिकारों के साथ-साथ किसी अन्य विधिक अधिकार (Legal Right) के प्रवर्तन के लिए भी रिट जारी करने की शक्ति प्राप्त है। 3. संसद को विधि द्वारा किसी अन्य न्यायालय (उच्च न्यायालयों को छोड़कर) को सर्वोच्च न्यायालय की सभी या किसी भी रिट अधिकारिता का स्थानीय सीमाओं के भीतर प्रयोग करने के लिए सशक्त करने का अनन्य अधिकार प्राप्त है, और यह शक्ति सर्वोच्च न्यायालय की रिट शक्तियों को कम करने के लिए भी प्रयोग की जा सकती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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