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गोल गुम्बद का निर्माण किसने करवाया था?

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गोल गुम्बद का निर्माण बीजापुर के शासक मुहम्मद आदिल शाह ने करवाया था।
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→ भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 359' के अंतर्गत राष्ट्रीय आपातकाल के दौरान मूल अधिकारों के निलंबन (Suspension of Enforcement of Fundamental Rights) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. राष्ट्रपति को यह अधिकार प्राप्त है कि वह राष्ट्रीय आपातकाल की उद्घोषणा के प्रवर्तन में रहने के दौरान आदेश द्वारा भाग III द्वारा प्रदत्त अधिकारों (अनुच्छेद 20 और 21 को छोड़कर) में से किसी भी अधिकार के प्रवर्तन को निलंबित कर सकता है, तथा यह आदेश संपूर्ण भारत या उसके किसी भाग तक सीमित हो सकता है। 2. '44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978' द्वारा यह अनिवार्य कर दिया गया है कि अनुच्छेद 359 के तहत राष्ट्रपति द्वारा जारी किया जाने वाला प्रत्येक आदेश संसद के प्रत्येक सदन के समक्ष अनुमोदन के लिए रखा जाना आवश्यक है, अन्यथा वह आदेश जारी होने की तारीख से एक माह के भीतर निष्प्रभावी हो जाएगा। 3. अनुच्छेद 359 के अंतर्गत केवल 'अनुच्छेद 20' और 'अनुच्छेद 21' द्वारा प्रदत्त मूल अधिकारों के प्रवर्तन को ही किसी भी परिस्थिति में निलंबित नहीं किया जा सकता है, चाहे आपातकाल बाह्य आक्रमण के आधार पर घोषित किया गया हो या सशस्त्र विद्रोह के आधार पर। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → भारतीय अर्थव्यवस्था और सामाजिक विकास के संदर्भ में, 'राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013' (National Food Security Act - NFSA) के प्रावधानों और उसकी विशेषताओं के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. यह अधिनियम देश की लगभग दो-तिहाई जनसंख्या (ग्रामीण क्षेत्रों के 75% और शहरी क्षेत्रों के 50%) को लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली (TPDS) के माध्यम से रियायती दरों पर खाद्यान्न प्राप्त करने का वैधानिक अधिकार प्रदान करता है, जिसके अंतर्गत पात्र व्यक्तियों को चावल, गेहूं और मोटे अनाज क्रमशः 3, 2 और 1 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से प्रदान किए जाते हैं। 2. अधिनियम के प्रावधानों के तहत पात्र परिवारों की प्रत्येक वयस्क महिला (जो 18 वर्ष या उससे अधिक आयु की हो) को परिवार का मुखिया माना जाएगा, ताकि उसके नाम पर राशन कार्ड जारी किया जा सके और महिलाओं के सशक्तिकरण को बढ़ावा दिया जा सके। 3. यदि किसी पात्र परिवार को अधिनियम के तहत खाद्यान्न या कूपन प्राप्त नहीं होता है, तो ऐसी स्थिति में केंद्र या राज्य सरकार द्वारा प्रभावित व्यक्तियों को 'खाद्य सुरक्षा भत्ता' (Food Security Allowance) का भुगतान किया जाना अनिवार्य है, जिसके निर्धारण और वितरण का पूरा अधिकार केंद्र सरकार के पास होता है, राज्य सरकारों की इसमें कोई वित्तीय या प्रशासनिक भूमिका नहीं होती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 124' और 'अनुच्छेद 217' के अंतर्गत उच्चतर न्यायरीति (Judiciary) में न्यायाधीशों की नियुक्ति, 'कॉलेजियम प्रणाली' (Collegium System) तथा इससे संबंधित 'राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग (NJAC) अधिनियम, 2014' के न्यायिक पुनरावलोकन के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के मूल पाठ में उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों की नियुक्ति की प्रक्रिया के लिए 'कॉलेजियम' शब्द का स्पष्ट उल्लेख किया गया था, जिसे वर्ष 1993 के 'द्वितीय न्यायाधीश वाद' (Second Judges Case) में उच्चतम न्यायालय द्वारा अपनी संवैधानिक व्याख्या के माध्यम से संस्थागत रूप दिया गया था। 2. संसद द्वारा पारित 'संविधान (निन्यानबेवां संशोधन) अधिनियम, 2014' और 'राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग (NJAC) अधिनियम' को उच्चतम न्यायालय ने 'सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स-ऑन-रिकॉर्ड एसोसिएशन बनाम भारत संघ (2015)' वाद में इस आधार पर असंवैधानिक और शून्य घोषित कर दिया था कि यह न्यायपालिका की स्वतंत्रता और 'संविधान की मूल संरचना' (Basic Structure) का उल्लंघन करता है। 3. कॉलेजियम प्रणाली के कार्यकरण के अंतर्गत, उच्चतम न्यायालय का कॉलेजियम भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) और सर्वोच्च न्यायालय के चार वरिष्ठतम न्यायाधीशों से मिलकर बनता है, तथा उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए संबंधित उच्च न्यायालय के कॉलेजियम की संस्तुति के अलावा राज्य के मुख्यमंत्री और राज्यपाल की लिखित सहमति को भी संवैधानिक रूप से अनिवार्य और बाध्यकारी बनाया गया है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → फीफा विश्व कप 2026 की मेज़बानी कौन-से देश करेंगे? → भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 32' और 'अनुच्छेद 226' के अंतर्गत सर्वोच्च न्यायालय तथा उच्च न्यायालयों की रिट अधिकारक्षेत्र (Writ Jurisdiction) एवं लोकहित याचिका (PIL) के विकास के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 32 के अंतर्गत सर्वोच्च न्यायालय केवल मौलिक अधिकारों के प्रवर्तन के लिए ही रिट जारी कर सकता है, जबकि अनुच्छेद 226 के तहत उच्च न्यायालयों को न केवल मौलिक अधिकारों बल्कि किसी अन्य उद्देश्य (जैसे सामान्य विधिक अधिकारों के प्रवर्तन) के लिए भी रिट जारी करने की व्यापक शक्ति प्राप्त है, और उच्च न्यायालयों का यह रिट अधिकारक्षेत्र उनका एक अनन्य (Exclusive) अधिकार है जिसे संसद विधि द्वारा भी सर्वोच्च न्यायालय को हस्तांतरित नहीं कर सकती है। 2. 'पी. एन. भगवती' के नेतृत्व में 1980 के दशक में विकसित 'लोकहित याचिका' (PIL) की अवधारणा ने पारंपरिक 'लोकस स्टैंडी' (Locus Standi - यानी केवल पीड़ित व्यक्ति द्वारा ही अदालत जाने का नियम) को शिथिल कर दिया, जिसके तहत अब समाज का कोई भी जिम्मेदार व्यक्ति या सामाजिक संगठन समाज के शोषित, वंचित या गरीबों के मौलिक अधिकारों के हनन के खिलाफ न्यायालय का दरवाजा खटखटा सकता है। 3. 'चंद्र कुमार बनाम भारत संघ (1997)' मामले में सर्वोच्च न्यायालय की संविधान पीठ ने यह स्पष्ट किया था कि उच्च न्यायालयों का अनुच्छेद 226 के अंतर्गत प्राप्त रिट अधिकारक्षेत्र संविधान के 'मूल ढांचे' (Basic Structure) का एक अभिन्न हिस्सा है, और संसद किसी भी सांविधिक न्यायाधिकरण (Tribunal) की स्थापना करके उच्च न्यायालयों के इस न्यायिक समीक्षा के अधिकार को समाप्त नहीं कर सकती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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