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कुंवर सिंह 1857 के विद्रोह का नेतृत्व कहाँ से कर रहे थे?

Detailed Explanation

कुंवर सिंह ने बिहार के जगदीशपुर से विद्रोह का नेतृत्व किया था।
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→ भारतीय राजव्यवस्था और भारतीय संविधान के अंतर्गत 'संविधान की सातवीं अनुसूची' तथा विधायी शक्तियों के वितरण से संबंधित 'अवशिष्ट शक्तियों' (Residuary Powers - Article 248) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 248 और सातवीं अनुसूची की संघ सूची (List I) की प्रविष्टि 97 के अनुसार, संसद को किसी भी ऐसे मामले के संबंध में विधि बनाने की अनन्य शक्ति प्राप्त है जो समवर्ती सूची या राज्य सूची में स्पष्ट रूप से प्रगणित नहीं है, जिसमें कराधान से संबंधित कोई नया विषय भी शामिल हो सकता है। 2. संयुक्त राज्य अमेरिका या ऑस्ट्रेलिया जैसे पारंपरिक संघीय संविधानों के विपरीत, भारतीय संविधान ने अवशिष्ट शक्तियाँ अमेरिकी मॉडल के अनुरूप राज्यों (प्रांतों) को न देकर केंद्र सरकार को प्रदान की हैं, जो कनाडा के संविधान के मॉडल पर आधारित है। 3. 'कर्नाटक राज्य बनाम यूनियन ऑफ़ इंडिया' और अन्य वित्तीय विधायी मामलों में उच्चतम न्यायालय ने यह अभिनिर्धारित किया है कि यदि किसी नए विषय पर कानून बनाने की आवश्यकता उत्पन्न होती है, तो संसद को अनुच्छेद 248 का उपयोग करने से पहले सभी राज्यों की विधानसभाओं से कम से कम दो-तिहाई बहुमत से पूर्व अनुमोदन लेना अनिवार्य है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग XVI' के अंतर्गत 'कुछ वर्गों के संबंध में विशेष उपबंध' (Special Provisions Relating to Certain Classes - अनुच्छेद 330 से 342A) के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 330 और 332 के अनुसार लोकसभा तथा राज्यों की विधानसभाओं में अनुसूचित जातियों (SCs) और अनुसूचित जनजातियों (STs) के लिए स्थानों का आरक्षण उन निर्वाचन क्षेत्रों की जनसंख्या के अनुपात के आधार पर किया जाता है, और मूल संविधान में यह प्रावधान अनिश्चित काल के लिए लागू किया गया था जिसे कभी भी संविधान संशोधन द्वारा समाप्त नहीं किया जा सकता है। 2. 104वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2019 द्वारा लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के आरक्षण की अवधि को बढ़ाकर 80 वर्ष कर दिया गया, जिसके तहत यह आरक्षण 25 जनवरी 2030 तक प्रभावी रहेगा, किंतु इसी संशोधन द्वारा संसद और विधानसभाओं में आंग्ल-भारतीय (Anglo-Indian) समुदाय के सदस्यों के लिए नामांकित किए जाने वाले स्थानों के विशेष प्रावधान को आगे नहीं बढ़ाया गया, जिससे वह समाप्त हो गया। 3. संविधान के अनुच्छेद 338 और 338A के अंतर्गत क्रमशः 'राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग' (NCSC) और 'राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग' (NCST) की स्थापना की गई है, जिनमें से एनसीएसटी (NCST) का गठन मूल संविधान में ही किया गया था, जबकि राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग (NCBC) को 102वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2018 द्वारा संवैधानिक दर्जा प्रदान किया गया। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग IV-क' (मूल कर्तव्य - अनुच्छेद 51-क) तथा स्वर्ण सिंह समिति (Swaran Singh Committee) की सिफारिशों के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. मूल कर्तव्यों को मूल संविधान में शामिल नहीं किया गया था, बल्कि इन्हें वर्ष 1976 में 42वें संविधान संशोधन अधिनियम द्वारा सरदार स्वर्ण सिंह समिति की संस्तुतियों के आधार पर संविधान के भाग IV-क में जोड़ा गया था, जिसमें मूल रूप से 10 मूल कर्तव्य थे, जबकि 11वां मूल कर्तव्य वर्ष 2002 में 86वें संविधान संशोधन अधिनियम के माध्यम से जोड़ा गया। 2. संविधान के अनुच्छेद 51-क के अंतर्गत उल्लिखित सभी मूल कर्तव्य केवल भारत के नागरिकों पर ही लागू होते हैं, और इनमें से कुछ कर्तव्य प्रकृति में पूर्णतः नैतिक (Moral) हैं जबकि कुछ कर्तव्य नागरिक (Civic) प्रकृति के हैं, किंतु इनमें से कोई भी कर्तव्य न्यायोचित (Justiciable) नहीं है, अर्थात् इनके उल्लंघन पर सीधे तौर पर न्यायालय द्वारा कोई कानूनी दंड या प्रवर्तन स्वतः लागू नहीं किया जाता है, जब तक कि संसद इसके लिए कोई विशिष्ट विधि न बनाए। 3. स्वर्ण सिंह समिति ने मूल रूप से संविधान में आठ मूल कर्तव्यों को शामिल करने की संस्तुति की थी और साथ ही यह भी सिफारिश की थी कि संसद को किसी भी मूल कर्तव्य का पालन न करने या करों का भुगतान न करने पर नागरिकों के लिए दंडात्मक उपाय (Penalties or Punishments) या कर लगाने का प्रावधान करने की शक्ति होनी चाहिए, जिसे केंद्र सरकार ने स्वीकार करते हुए 42वें संशोधन अधिनियम में दंड का कड़ा प्रावधान अनिवार्य रूप से शामिल किया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग XII' के अंतर्गत 'वित्त, संपत्ति, संविदाएं और वाद' (Finance, Property, Contracts and Suits) से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 266 के अनुसार भारत की संचित निधि (Consolidated Fund of India) से कोई भी धन विधि के प्राधिकार के बिना नहीं निकाला जा सकता है, तथा इस निधि में सरकार द्वारा प्राप्त सभी राजस्व, ऋण और ट्रेजरी बिलों के निर्गमन से प्राप्त धन जमा किए जाते हैं। 2. अनुच्छेद 267 के तहत संसद को विधि द्वारा एक 'भारत की आकस्मिकता निधि' (Contingency Fund of India) स्थापित करने की शक्ति दी गई है, जो राष्ट्रपति के नियंत्रण में होती है और संसद की पूर्व स्वीकृति के बिना इस निधि से किसी भी अप्रत्याशित व्यय के लिए अग्रिम धन दिया जा सकता है। 3. भारत के प्रत्येक राज्य की अपनी एक संचित निधि होती है, किंतु संविधान के अनुच्छेद 283 के तहत यह प्रावधान किया गया है कि राज्यों की संचित निधि और लोक लेखा (Public Account) के संबंध में धन की अभिरक्षा, भुगतान और निकासी के लिए नियम केवल संबंधित राज्य का राज्यपाल ही बना सकता है, और इसमें राज्य विधानमंडल की कोई विधाई शक्ति नहीं होती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → किन दो भारतीयों को 'व्हिटली अवार्ड 2026' से सम्मानित किया गया है?
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