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न्यायिक पुनरावलोकन के संबंध में कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. भारतीय संविधान में स्पष्ट उल्लेख नहीं है,
- 2. सर्वोच्च और उच्च न्यायालयों को प्राप्त है।
सही विकल्प चुनें?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
दोनों कथन पूरी तरह सही हैं।
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग IX' (पंचायतों - अनुच्छेद 243 से 243-ओ) तथा 'भाग IX-क' (नगरपालिकाओं - अनुच्छेद 243-प से 243-यछ) के उपबंधों के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 73वें और 74वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1992 के माध्यम से त्रि-स्तरीय पंचायती राज व्यवस्था और नगरपालिकाओं को संवैधानिक दर्जा प्रदान किया गया, जिसके तहत प्रत्येक राज्य में पंचायतों और नगरपालिकाओं के निर्वाचन कराने के लिए 'राज्य निर्वाचन आयोग' (State Election Commission) के गठन का प्रावधान किया गया है, जिसकी नियुक्ति संबंधित राज्य के राज्यपाल द्वारा की जाती है, और राज्य निर्वाचन आयुक्त को उच्च न्यायालय के न्यायाधीश को हटाने की प्रक्रिया और आधार के अलावा अन्य किसी रीति से उसके पद से नहीं हटाया जा सकता है।
2. संविधान के अनुच्छेद 243-झ के तहत प्रत्येक राज्य का राज्यपाल, संविधान (73वाँ संशोधन) अधिनियम, 1992 के प्रारंभ से एक वर्ष के भीतर और उसके बाद प्रत्येक पाँचवें वर्ष की समाप्ति पर, एक 'वित्त आयोग' (Finance Commission) का गठन करेगा, जो पंचायतों की वित्तीय स्थिति की समीक्षा करेगा और राज्यपाल को उन सिद्धांतों की संस्तुति करेगा जिनके आधार पर राज्य द्वारा एकत्रित करों, शुल्कों, टोल और फीसों का पंचायतों के बीच शुद्ध आगमों का आबंटन किया जाना चाहिए।
3. 74वें संविधान संशोधन अधिनियम द्वारा शहरों में स्थानीय शासन के लिए तीन प्रकार की नगरपालिकाओं - नगर पंचायत (ग्रामीण से शहरी क्षेत्रों में परिवर्तित हो रहे क्षेत्रों के लिए), नगरपालिका परिषद (छोटे शहरी क्षेत्रों के लिए), और नगर निगम (बड़े शहरी क्षेत्रों के लिए) - के गठन का उपबंध किया गया है, तथा इन सभी तीनों स्तरों के अध्यक्षों के पदों के लिए संसद द्वारा निर्धारित विधि के अनुसार अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और महिलाओं के लिए सीटों के आरक्षण का अनिवार्य प्रावधान किया गया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान के भाग XI के अंतर्गत केंद्र-राज्य विधायी संबंधों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 249 के तहत राज्यसभा उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई बहुमत से यह संकल्प पारित कर सकती है कि संसद राष्ट्रीय हित में राज्य सूची में शामिल किसी भी विषय पर कानून बना सकती है, जिसकी अधिकतम अवधि एक बार में पाँच वर्ष हो सकती है।
2. यदि दो या अधिक राज्यों के विधान-मंडल प्रस्ताव पास करके संसद से अनुरोध करें कि राज्य सूची के किसी विषय पर संसद कानून बनाए, तो ऐसा अधिनियम केवल उन्हीं राज्यों पर लागू होगा जिन्होंने ऐसा प्रस्ताव पारित किया है या बाद में उसे अंगीकृत (Adopt) करते हैं।
उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 32' (संवैधानिक उपचारों का अधिकार) और उच्चतम न्यायालय की रिट अधिकारिता (Writ Jurisdiction) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. अनुच्छेद 32 के तहत उच्चतम न्यायालय को मौलिक अधिकारों के प्रवर्तन के लिए बंदी प्रत्यक्षीकरण (Habeas Corpus), परमादेश (Mandamus), प्रतिषेध (Prohibition), उत्प्रेषण (Certiorari) और अधिकार-पृच्छा (Quo-Warranto) जैसी रिट जारी करने की शक्ति प्राप्त है, और यह अधिकार क्षेत्र केवल उच्चतम न्यायालय तक ही सीमित है, उच्च न्यायालयों को अनुच्छेद 226 के तहत ऐसी रिट जारी करने की कोई शक्ति प्राप्त नहीं है।
2. 'बंदी प्रत्यक्षीकरण' (Habeas Corpus) रिट का शाब्दिक अर्थ 'को शरीर को प्रस्तुत किया जाए' होता है, जो किसी भी व्यक्ति को अवैध रूप से हिरासत में लिए जाने के विरुद्ध एक शक्तिशाली उपाय है, और यह रिट सार्वजनिक प्राधिकरणों के साथ-साथ निजी व्यक्तियों या निजी संस्थाओं के विरुद्ध भी जारी की जा सकती है।
3. 'अधिकार-पृच्छा' (Quo-Warranto) रिट किसी सार्वजनिक पद पर किसी व्यक्ति के दावे की वैधता की जाँच करने के लिए जारी की जाती है, और इस रिट को दायर करने के लिए यह आवश्यक नहीं है कि याचिकाकर्ता स्वयं उस पीड़ित व्यक्ति का मौलिक अधिकार हनन का शिकार हो, बल्कि इसे किसी भी जिम्मेदार नागरिक द्वारा अदालत में प्रस्तुत किया जा सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय और विश्व भूगोल के संदर्भ में, 'महासागरीय धाराओं' (Ocean Currents) और उनके निर्माण तथा जलवायु पर पड़ने वाले प्रभावों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. महासागरीय धाराएँ महासागरीय जल का एक निश्चित दिशा में बड़े पैमाने पर सतत प्रवाह है, जो पृथ्वी के घूर्णन (Coriolis Force), प्रचलित हवाओं (Prevailing Winds), तापमान और लवणता में भिन्नता तथा महाद्वीपीय तटरेखाओं के आकार से प्रभावित होती हैं।
2. उत्तरी गोलार्ध में कोरिऑलिस बल के प्रभाव से महासागरीय धाराएँ अपनी मूल दिशा से दाईं ओर (Clockwise) और दक्षिणी गोलार्ध में बाईं ओर (Anti-clockwise) विक्षेपित हो जाती हैं, जो ग्याइरस (Gyres) के निर्माण के लिए उत्तरदायी है।
3. ठंडी महासागरीय धाराएँ उन क्षेत्रों में वर्षा में वृद्धि करती हैं जहाँ से वे गुजरती हैं, क्योंकि ठंडा जल वाष्पीकरण को अत्यधिक बढ़ावा देता है, जिसके परिणामस्वरूप तटीय क्षेत्रों में घने जंगलों और उष्णकटिबंधीय मरुस्थलों का निर्माण होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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हाल ही में DRDO के लिए Delegation of Financial Powers (DFP-2026) किसने जारी किया?
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