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होम रूल लीग का मुख्य उद्देश्य क्या था?

Detailed Explanation

होम रूल लीग का मुख्य उद्देश्य ब्रिटिश साम्राज्य के भीतर भारतीयों के लिए स्वशासन प्राप्त करना था।
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Related Questions

→ भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 76' के अंतर्गत 'भारत के महान्यायवादी' (Attorney General for India) के पद, अधिकारों और उसकी कार्यप्रणाली के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. महान्यायवादी की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है और वह ऐसा व्यक्ति होना चाहिए जो उच्चतम न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्त होने के लिए अर्हित (Qualified) हो, तथा संविधान में महान्यायवादी के लिए कोई निश्चित पदावधि (Fixed Term) तय नहीं की गई है और वह राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत (During the pleasure of the President) पद धारण करता है। 2. महान्यायवादी को भारत के सभी न्यायालयों में सुनवाई का अधिकार प्राप्त है और उसे संसद के दोनों सदनों या उनकी संयुक्त बैठकों में तथा संसद की किसी भी समिति में, जिसका वह सदस्य नामित किया गया हो, बोलने और भाग लेने का अधिकार है, किंतु उसे संसद में मतदान करने का कोई संवैधानिक अधिकार प्राप्त नहीं है। 3. महान्यायवादी को भारत सरकार के एक पूर्णकालिक विधि अधिकारी (Full-time legal officer) के रूप में कार्य करना होता है, और उसे निजी वकालत (Private practice) करने तथा किसी अन्य आपराधिक या दीवानी मामले में केंद्र सरकार के खिलाफ सलाह देने या पेश होने पर पूर्ण संवैधानिक प्रतिबंध होता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → हाल ही में जारी 'India Tech Annual Funding Report 2026' के अनुसार, ग्लोबल स्टार्टअप फंडिंग में भारत की रैंक क्या है? → भारत छोड़ो आंदोलन के समय भारत का वायसराय कौन था? → भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 143' के अंतर्गत सर्वोच्च न्यायालय के 'सलाहकार क्षेत्राधिकार' (Advisory Jurisdiction) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 143 के अनुसार, राष्ट्रपति को यह शक्ति प्राप्त है कि यदि उसे प्रतीत होता है कि विधि या तथ्य का कोई ऐसा प्रश्न उत्पन्न हुआ है या उत्पन्न होने की संभावना है, जो सार्वजनिक महत्व का है, तो वह उस प्रश्न पर उच्चतम न्यायालय की राय प्राप्त करने के लिए उसे विचार हेतु संदर्भित कर सकता है। 2. यदि राष्ट्रपति द्वारा विधि या तथ्य के किसी सार्वजनिक महत्व के प्रश्न को उच्चतम न्यायालय को संदर्भित किया जाता है, तो उच्चतम न्यायालय के लिए यह अनिवार्य (Mandatory) है कि वह उस पर अपनी राय राष्ट्रपति को दे, और न्यायालय इस प्रकार के संदर्भ की सुनवाई से मना नहीं कर सकता है। 3. संविधान लागू होने से पहले की किसी संधि, समझौते, प्रसंविदा, सनद (Sanad) या अन्य तत्सम दस्तावेजों से उत्पन्न विवादों के मामलों में राष्ट्रपति द्वारा संदर्भ भेजे जाने पर उच्चतम न्यायालय के लिए अपनी राय देना अनिवार्य है, और इस विशेष मामले में सर्वोच्च न्यायालय की सलाह राष्ट्रपति के लिए बाध्यकारी (Binding) होती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → मगध के शासकों का सही कालक्रम क्या है?
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