त्वरित लिंक्स
Indian Polity
21 views
नि:शुल्क विधिक सहायता (Free Legal Aid) से संबंधित प्रावधान किस अनुच्छेद में है?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
अनुच्छेद 39A, जो 42वें संशोधन द्वारा जोड़ा गया, गरीब नागरिकों को नि:शुल्क विधिक सहायता प्रदान करने का निर्देश देता है।
Related Questions
→
भारतीय संविधान के भाग I के अंतर्गत 'संघ एवं उसके राज्य क्षेत्र' (अनुच्छेद 1-4) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 2 के अंतर्गत संसद को यह शक्ति प्राप्त है कि वह संघ में नए राज्यों का प्रवेश या उनकी स्थापना ऐसे निबंधनों और शर्तों पर कर सके जो वह ठीक समझे, और इस शक्ति का प्रयोग विदेशी भू-भाग को भारत में शामिल करने के लिए किया जाता है।
2. संविधान के अनुच्छेद 3 के तहत किसी राज्य के नाम, सीमा या क्षेत्रफल में परिवर्तन करने से संबंधित कोई भी विधेयक राष्ट्रपति की पूर्व सिफारिश के बिना संसद के किसी भी सदन में पुनः स्थापित नहीं किया जा सकता है, और राष्ट्रपति के लिए यह अनिवार्य है कि वह ऐसे विधेयक को संबंधित राज्य के विधानमंडल के पास उसके विचार जानने के लिए भेजे, तथा राज्य विधानमंडल द्वारा दी गई सलाह राष्ट्रपति और संसद दोनों पर पूर्णतः बाध्यकारी होती है।
3. अनुच्छेद 4 के यह प्रावधान स्पष्ट करते हैं कि अनुच्छेद 2 और अनुच्छेद 3 के अधीन नए राज्यों के प्रवेश, स्थापना, या वर्तमान राज्यों के क्षेत्रों, सीमाओं या नामों में परिवर्तन से संबंधित विधियों को अनुच्छेद 368 के प्रयोजन के लिए संविधान संशोधन नहीं माना जाएगा, अर्थात इन्हें साधारण बहुमत द्वारा पारित किया जा सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
भारतीय संविधान के अंतर्गत मूल कर्तव्यों (Fundamental Duties) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मूल कर्तव्यों को स्वर्ण सिंह समिति (Swaran Singh Committee) की संस्तुति के आधार पर 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा संविधान के भाग-IVक के अनुच्छेद 51क में जोड़ा गया था, और मूलतः इसमें 10 मूल कर्तव्य शामिल किए गए थे, जबकि 11वां मूल कर्तव्य 86वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2002 द्वारा जोड़ा गया।
2. संविधान के अनुच्छेद 51क के अंतर्गत प्रदत्त मूल कर्तव्य केवल भारतीय नागरिकों पर ही लागू होते हैं, विदेशी नागरिकों पर नहीं, तथा ये सभी कर्तव्य प्रकृति में न्यायोचित (Justiciable) हैं, अर्थात् इनके उल्लंघन या अनुपालन न होने पर संसद द्वारा बनाए गए किसी कानून के तहत सीधे उच्चतम न्यायालय में रिट याचिका दायर की जा सकती है।
3. वर्मा समिति (Verma Committee on Teaching of Fundamental Duties, 1999) ने अपने प्रतिवेदन में कुछ मूल कर्तव्यों के कानूनी क्रियान्वयन के लिए विभिन्न विधियों (जैसे- राष्ट्र गौरव अपमान निवारण अधिनियम, 1971 और वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972) की पहचान की थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
भारतीय संविधान की प्रस्तावना (उद्देशिका) और उसके ऐतिहासिक पृष्ठभूमि के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. पंडित जवाहरलाल नेहरू द्वारा 13 दिसंबर 1946 को संविधान सभा में प्रस्तुत 'उद्देश्य प्रस्ताव' (Objectives Resolution) को 22 जनवरी 1947 को सर्वसम्मति से स्वीकार किया गया था, जिसका परिवर्तित रूप ही भारतीय संविधान की प्रस्तावना बना।
2. प्रस्तावना में उल्लिखित 'न्याय' (सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक) के आदर्श को रूसी क्रांति (1917) से प्रेरित होकर लिया गया है, जबकि 'स्वतंत्रता, समता और बंधुत्व' के आदर्शों को अमेरिकी स्वतंत्रता संग्राम से ग्रहण किया गया है।
3. केशवानंद भारती वाद (1973) में सर्वोच्च न्यायालय ने यह स्पष्ट रूप से अभिनिर्धारित किया था कि प्रस्तावना संविधान का एक अभिन्न अंग है और अनुच्छेद 368 के तहत इसमें संशोधन किया जा सकता है, बशर्ते संशोधन द्वारा संविधान के 'मूल ढांचे' (Basic Structure) को क्षति न पहुंचे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
भारतीय निर्वाचन आयोग (Election Commission of India) और चुनाव सुधारों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 324 के अंतर्गत निर्वाचन आयोग के मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य आयुक्तों की नियुक्ति संसद द्वारा बनाई गई विधि के अधीन राष्ट्रपति द्वारा की जाती है, और संविधान में निर्वाचन आयोग के सदस्यों की अहर्ताओं या योग्यताओं का उल्लेख स्पष्ट रूप से किया गया है।
2. 'मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्त (नियुक्ति, सेवा की शर्तें और कार्यालय की अवधि) अधिनियम, 2023' के प्रावधानों के अनुसार, चयन समिति में प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता (या सबसे बड़े विपक्षी दल के नेता) और प्रधानमंत्री द्वारा नामित एक केंद्रीय कैबिनेट मंत्री शामिल होते हैं।
3. निर्वाचन आयोग को यह संवैधानिक और विधिक अधिकार प्राप्त है कि वह चुनाव के दौरान राजनीतिक दलों द्वारा अपने घोषणापत्रों (Manifesto) में किए जाने वाले वादों की वित्तीय और आर्थिक व्यवहार्यता की अनिवार्य रूप से पूर्व-जांच कर सके तथा अव्यवहारिक वादों को आचार संहिता के उल्लंघन के रूप में प्रतिबंधित कर सके।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
अंतर-राज्यीय परिषद् (Inter-State Council) के गठन, संवैधानिक स्थिति तथा इसकी कार्यप्रणाली के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 263 के अंतर्गत राष्ट्रपति को यह शक्ति प्रदान की गई है कि यदि किसी समय लोक हित में यह प्रतीत होता है कि एक ऐसी परिषद् की स्थापना की जानी चाहिए जो राज्यों के बीच उत्पन्न होने वाले विवादों की जाँच और सलाह दे तथा राज्यों और संघ के सामान्य हित के विषयों पर चर्चा करे, तो राष्ट्रपति ऐसी परिषद् की स्थापना कर सकता है।
2. अंतर-राज्यीय परिषद् एक स्थायी संवैधानिक निकाय (Permanent Constitutional Body) है जिसका उल्लेख मूल संविधान में स्पष्ट रूप से किया गया था, और इसकी स्थापना वर्ष 1950 में संविधान लागू होने के तुरंत बाद कर दी गई थी।
3. सरकारी आयोग (Sarkaria Commission) की संस्तुति के आधार पर वर्ष 1990 में राष्ट्रपति के आदेश द्वारा 'अंतर-राज्यीय परिषद्' का पहली बार औपचारिक रूप से गठन किया गया था, जिसकी अध्यक्षता प्रधानमंत्री द्वारा की जाती है और इसके सदस्यों में सभी राज्यों के मुख्यमंत्री तथा संघ राज्य क्षेत्रों के प्रशासक या मुख्यमंत्री शामिल होते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.