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Indian Polity
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दल-बदल विरोधी कानून (Anti-Defection Law) किस संविधान संशोधन द्वारा जोड़ा गया?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
52वें संविधान संशोधन (1985) द्वारा दसवीं अनुसूची (Tenth Schedule) जोड़कर दल-बदल विरोधी कानून लागू किया गया।
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भारतीय संविधान के किस अनुच्छेद के तहत सर्वोच्च न्यायालय को 'रिट' (Writ) जारी करने की शक्ति प्राप्त है?
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भारतीय संविधान के अंतर्गत भारत के राष्ट्रपति की विधायी, कार्यपालिका और क्षमादान शक्तियों (Pardoning Powers) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 72 के अंतर्गत राष्ट्रपति को किसी भी ऐसे मामले में, जिसमें दंड या दंडादेश ऐसे विषय से संबंधित है जिस पर संघ की कार्यकारी शक्ति का विस्तार होता है, सेना न्यायालय (Court Martial) द्वारा दिए गए दंड के मामले में तथा मृत्युदंड (Death Sentence) के मामले में क्षमा, प्रवિલंबन, विराम या परिहार करने की शक्ति प्राप्त है, और राष्ट्रपति की यह क्षमादान शक्ति राज्यपाल की तुलना में अधिक विस्तृत है क्योंकि राज्यपाल को मृत्युदंड के मामलों में क्षमादान की शक्ति प्राप्त नहीं है।
2. संविधान के अनुच्छेद 123 के तहत राष्ट्रपति को अध्यादेश प्रख्यापित करने की जो शक्ति प्राप्त है, वह उसकी स्वविवेक की शक्ति (Discretionary Power) है, जिसका प्रयोग वह प्रधानमंत्री या मंत्रिपरिषद के परामर्श के बिना अपनी स्वतंत्र इच्छा से कर सकता है, बशर्ते संसद के दोनों सत्र न चल रहे हों।
3. जब कोई साधारण विधेयक संसद के दोनों सदनों द्वारा पारित होकर राष्ट्रपति के पास उसकी अनुमति के लिए प्रस्तुत किया जाता है, तो राष्ट्रपति अनुच्छेद 111 के अंतर्गत विधेयक पर अपनी अनुमति रोक सकता है (अत्यधिक वीटो) या उसे पुनर्विचार के लिए वापस भेज सकता है, किंतु यदि संसद उस विधेयक को संशोधन के साथ या बिना संशोधन के पुनः पारित कर देती है, तो राष्ट्रपति को उस पर अनुमति देना संवैधानिक रूप से अनिवार्य हो जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान के अंतर्गत राज्य विधानमंडल (विधानसभा और विधान परिषद) की संरचना, शक्तियों और विधायी प्रक्रियाओं के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 169 के अनुसार संसद किसी राज्य में विधान परिषद के सृजन या उत्सादन के लिए विधि बना सकती है, बशर्ते संबंधित राज्य की विधानसभा कुल सदस्य संख्या के बहुमत तथा उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई बहुमत से इस आशय का संकल्प पारित कर दे।
2. राज्य विधान परिषद में कुल सदस्यों की संख्या उस राज्य की विधानसभा के कुल सदस्यों की संख्या के एक-तिहाई से अधिक नहीं हो सकती है, और किसी भी स्थिति में विधान परिषद में सदस्यों की न्यूनतम संख्या 40 से कम नहीं होनी चाहिए (अपवादस्वरूप जम्मू-कश्मीर का इतिहास छोड़ दें)।
3. धन विधेयक (Money Bill) केवल विधान परिषद में ही पुनः स्थापित किया जा सकता है, और यदि विधान परिषद धन विधेयक को 14 दिनों के भीतर वापस नहीं करती है, तो उसे दोनों सदनों द्वारा पारित मान लिया जाता है, तथा विधान परिषद के पास धन विधेयक में संशोधन करने की पूर्ण शक्ति होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान के अंतर्गत उपराष्ट्रपति की शक्तियों, प्रधानमंत्री की स्थिति तथा मंत्रिपरिषद और उनके सामूहिक उत्तरदायित्व के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 63 के अनुसार भारत का एक उपराष्ट्रपति होगा, और अनुच्छेद 64 के तहत वह राज्यसभा का पदेन सभापति (Ex-officio Chairman) होगा तथा राष्ट्रपति के पद पर आकस्मिक रिक्ति के दौरान वह राष्ट्रपति के रूप में कार्य करते समय राज्यसभा के सभापति के रूप में किसी भी कर्तव्य का पालन नहीं करेगा और न ही उसे राज्यसभा के सभापति के वेतन या भत्ते प्राप्त होंगे।
2. अनुच्छेद 75(1) के अंतर्गत प्रधानमंत्री की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है और अन्य मंत्रियों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा प्रधानमंत्री की सलाह पर की जाती है, किंतु संविधान में यह स्पष्ट रूप से उपबंधित किया गया है कि प्रधानमंत्री या किसी भी अन्य मंत्री के लिए यह अनिवार्य है कि वह नियुक्ति के समय संसद के किसी भी सदन का सदस्य अवश्य होना चाहिए, अन्यथा छह माह के भीतर उसकी सदस्यता समाप्त हो जाएगी।
3. अनुच्छेद 75(3) के अनुसार केंद्रीय मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से लोकसभा के प्रति उत्तरदायी होती है, जिसका विधिक और संवैधानिक अर्थ यह है कि लोकसभा में मंत्रिपरिषद के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव पारित होने पर संपूर्ण मंत्रिपरिषद को त्यागपत्र देना पड़ता है, और यदि प्रधानमंत्री अपने पद से त्यागपत्र दे देता है या उसकी मृत्यु हो जाती है, तो मंत्रिपरिषद स्वतः विघटित हो जाती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान के अंतर्गत राज्य की कार्यपालिका, विशेष रूप से राज्यपाल की शक्तियों, अध्यादेश निर्माण और मुख्यमंत्री की नियुक्ति के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 213 के तहत राज्यपाल को राज्य विधानमंडल के सत्र में न होने पर अध्यादेश प्रख्यापित करने की शक्ति प्राप्त है, और राज्यपाल द्वारा जारी ऐसा अध्यादेश विधानमंडल के पुनः समवेत होने पर छह सप्ताह के भीतर विधानमंडल द्वारा अनुमोदित होना अनिवार्य है, अन्यथा यह स्वतः निष्प्रभावी हो जाता है।
2. राज्यपाल द्वारा प्रख्यापित अध्यादेश के लिए राज्य मंत्रिपरिषद की पूर्व सलाह या संस्तुति आवश्यक होती है, किंतु कुछ विशिष्ट मामलों में (जैसे कि ऐसा अध्यादेश जिसके प्रावधानों को यदि राज्य विधानसभा का विधेयक बनाया जाए तो राष्ट्रपति के विचारार्थ आरक्षित रखना अनिवार्य हो) राज्यपाल राष्ट्रपति के निर्देशों के बिना अध्यादेश प्रख्यापित नहीं कर सकता है।
3. राज्य के मुख्यमंत्री की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा की जाती है, और अन्य मंत्रियों की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा मुख्यमंत्री की सलाह पर की जाती है, तथा संविधान के अनुच्छेद 164 के अनुसार झारखंड, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और ओडिशा राज्यों में जनजातीय कल्याण के लिए एक पृथक् मंत्री का होना अनिवार्य किया गया है, जिसके पास गृह विभाग का प्रभार होना संविधान की अनिवार्य शर्त है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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