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Indian Polity
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राज्यपाल की अध्यादेश जारी करने की शक्ति किस अनुच्छेद में वर्णित है?

Detailed Explanation

अनुच्छेद 213 राज्यपाल को राज्य विधानमंडल के सत्र में न होने पर अध्यादेश जारी करने की शक्ति देता है।
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→ भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 263' के अंतर्गत स्थापित 'अंतर-राज्य परिषद' (Inter-State Council) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. अंतर-राज्य परिषद की स्थापना का अधिकार राष्ट्रपति के पास है, और राष्ट्रपति लोक हित में जब भी ऐसा आवश्यक समझे, इस परिषद की स्थापना कर सकता है तथा इसके सदस्यों की अर्हताएँ और चयन प्रक्रिया निर्धारित कर सकता है। 2. यह परिषद एक स्थायी संवैधानिक निकाय (Permanent Constitutional Body) है जिसकी बैठकें नियमित रूप से प्रत्येक वर्ष कम से कम तीन बार आयोजित होना अनिवार्य रूप से संविधान में ही उपबंधित किया गया है। 3. अंतर-राज्य परिषद का मुख्य कार्य राज्यों के बीच उत्पन्न विवादों की जाँच करना और उन पर सलाह देना है, तथा इसके द्वारा दिए गए सभी निर्णय और संस्तुतियाँ संबंधित राज्य सरकारों और केंद्र सरकार पर पूर्णतः बाध्यकारी (Binding) होती हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → भारतीय संविधान में महत्वपूर्ण संवैधानिक संशोधनों और आपातकालीन उपबंधों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. 38वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1975 द्वारा यह प्रावधान किया गया कि राष्ट्रपति द्वारा घोषित राष्ट्रीय आपातकाल की उद्घोषणा को किसी भी न्यायालय में चुनौती (Judicial Review) नहीं दी जा सकती है, किंतु इस अलोकतांत्रिक प्रावधान को बाद में 44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 द्वारा समाप्त कर दिया गया। 2. 44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 के माध्यम से यह अनिवार्य किया गया कि राष्ट्रीय आपातकाल की उद्घोषणा के लिए मंत्रिमंडल (Cabinet) की लिखित सिफारिश का होना आवश्यक है, न कि केवल प्रधानमंत्री की मौखिक सलाह। 3. राष्ट्रीय आपातकाल के दौरान अनुच्छेद 19 द्वारा प्रदत्त छह मूल अधिकारों का स्वतः निलंबन केवल तभी हो सकता है जब आपातकाल की उद्घोषणा 'युद्ध' या 'बाह्य आक्रमण' के आधार पर की गई हो, 'सशस्त्र विद्रोह' के आधार पर नहीं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → प्रथम संविधान संशोधन कब हुआ? → भारतीय संविधान के 74वें संशोधन अधिनियम, 1992 के अंतर्गत शहरी स्थानीय शासन, नगरपालिकाओं की संरचना, और समितियों के गठन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. इस अधिनियम के तहत तीन प्रकार की नगरपालिकाओं - संक्रमणकालीन क्षेत्र के लिए 'नगर पंचायत', लघु नगरीय क्षेत्र के लिए 'नगरपालिका परिषद' और बृहत नगरीय क्षेत्र के लिए 'नगर निगम' का गठन किया जाता है, और राज्यपाल द्वारा किसी क्षेत्र की जनसंख्या, जनसंख्या घनत्व और आर्थिक महत्व के आधार पर उसे नगरीय क्षेत्र के रूप में अधिसूचित किया जाता है। 2. अनुच्छेद 243-S के अनुसार, तीन लाख या उससे अधिक जनसंख्या वाले प्रत्येक नगरपालिका क्षेत्र के लिए एक या अधिक 'वार्ड समितियों' (Wards Committees) का गठन किया जाएगा, और इस समिति के क्षेत्र के भीतर आने वाले वार्डों से चुने गए नगरपालिका के पार्षद इस समिति के पदेन सदस्य होते हैं। 3. प्रत्येक नगरपालिका के लिए एक 'जिला योजना समिति' (District Planning Committee) के गठन का प्रावधान अनुच्छेद 243-ZD के अंतर्गत किया गया है, जिसके कुल सदस्यों में से कम से कम दो-तिहाई (2/3rd) सदस्य जिले की पंचायतों और नगरपालिकाओं के निर्वाचित सदस्यों द्वारा अपने में से ही चुने जाते हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → भारतीय संविधान के अंतर्गत प्रदत्त मूल अधिकारों (Fundamental Rights) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 13 के अंतर्गत 'विधि' (Law) शब्द के व्यापक दायरे में संसद या राज्य विधानमंडलों द्वारा बनाए गए अधिनियमों और अध्यादेशों के साथ-साथ केवल प्रत्यायोजित विधान (Delegated Legislation) जैसे आदेश, उप-विधियाँ और नियम ही शामिल किए गए हैं, जबकि भारत के राज्यक्षेत्र में कानून का बल रखने वाले रूढ़ि या प्रथा (Customs or Usages) को इस अनुच्छेद के तहत 'विधि' की परिभाषा से बाहर रखा गया है। 2. अनुच्छेद 19(1)(g) के तहत कोई भी वृत्ति, व्यापार या कारोबार करने के अधिकार के अंतर्गत राज्य को यह पूर्ण शक्ति प्राप्त है कि वह नागरिकों के इन अधिकारों पर पूर्ण प्रतिबंध (Absolute Ban) लगाते हुए किसी व्यापार या व्यवसाय को पूरी तरह से अपने हाथ में ले ले, और इसके लिए राज्य द्वारा किसी नागरिक के अधिकारों को समाप्त करने के लिए कोई न्यायिक समीक्षा या क्षतिपूर्ति की आवश्यकता नहीं होती है। 3. सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 'मिनर्वा मिल्स वाद (1980)' में यह स्पष्ट रूप से निर्धारित किया गया कि भाग III (मूल अधिकार) और भाग IV (नीति निर्देशक तत्व) के बीच संतुलन संविधान की मूल संरचना (Basic Structure) का एक अनिवार्य हिस्सा है, और संसद अनुच्छेद 368 के तहत अपनी संविधान संशोधन शक्ति का प्रयोग करते हुए मूल अधिकारों को इस हद तक सीमित नहीं कर सकती कि वे संविधान के मूलभूत ताने-बाने को ही नष्ट कर दें। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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