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Geography
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सौरमंडल का सबसे छोटा ग्रह कौन सा है (2006 में प्लूटो को बौना ग्रह घोषित करने के बाद)?

Detailed Explanation

2006 में प्लूटो को बौना ग्रह (Dwarf Planet) घोषित किए जाने के बाद बुध (Mercury) सौरमंडल का सबसे छोटा ग्रह है।
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→ पृथ्वी की वायुदाब पेटियों, पवन प्रणालियों और चक्रवातों की गतिशीलता के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. उपोष्ण उच्च वायुदाब पेटियाँ (Subtropical High-Pressure Belts) गतिजन्य (Dynamically Induced) कारणों से उत्पन्न होती हैं, जहाँ विषुवत वृत्त से उठने वाली गर्म हवाएं ठंडी होकर नीचे बैठती हैं, और इस क्षेत्र में शांत एवं अवरोही हवाओं के कारण स्पष्ट बादलों का अभाव रहता है। 2. उष्णकटिबंधीय चक्रवातों (Tropical Cyclones) के विकास के लिए समुद्र की सतह का तापमान न्यूनतम 27°C होना आवश्यक है, और कोरियालिस बल (Coriolis Force) की अनुपस्थिति के कारण ये चक्रवात भूमध्य रेखा (Equator) के बिल्कुल ऊपर (0° से 5° अक्षांश के मध्य) आसानी से विकसित हो जाते हैं। 3. शीतोष्ण कटिबंधीय चक्रवात (Temperate Cyclones) केवल जलीय सतहों तक सीमित नहीं होते बल्कि ये थल और जल दोनों भागों पर विकसित हो सकते हैं, जिनका मुख्य कारण भिन्न तापमान और आर्द्रता वाली दो विपरीत वायु राशियों (Air Masses) का अभिसरण (Frontogenesis) है। उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से कथन सही है/हैं? → भारत के अपवाह तंत्र के संदर्भ में, हिमालयी नदियों और प्रायद्वीपीय नदियों की विशेषताओं के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. हिमालय की अधिकांश प्रमुख नदियाँ 'पूर्ववर्ती अपवाह' (Antecedent Drainage) का उदाहरण हैं, अर्थात उन्होंने हिमालय के उत्थान से पहले ही अपने मार्ग निर्धारित कर लिए थे और उत्थान के साथ-साथ गहरी घाटियों व महाखड्डों (Gorges) का निर्माण किया है। 2. प्रायद्वीपीय भारत की नर्मदा और तापी नदियाँ रिफ्ट घाटियों (Rift Valleys) से होकर पश्चिम की ओर प्रवाहित होती हैं और अरब सागर में डेल्टा का निर्माण करती हैं, जबकि गोदावरी और कृष्णा जैसी नदियाँ बंगाल की खाड़ी में ज्वारनदमुख (Estuaries) बनाती हैं। 3. प्रायद्वीपीय नदियाँ अपनी युवावस्था में हैं और इनका अनुदैर्ध्य प्रोफाइल अत्यधिक असंतुलित है, जिसके कारण ये वर्ष भर निरंतर जलप्रवाह बनाए रखती हैं और तीव्र अपरदन कार्यों में संलग्न रहती हैं। 4. कोसी नदी एक पूर्ववर्ती हिमालयी नदी है जो अपने मार्ग परिवर्तन के लिए कुख्यात है, किंतु इसके विपरीत ब्रह्मपुत्र नदी भारत में प्रवेश करने से पहले तिब्बत के क्षेत्र में 'سانگپो' (Tsangpo) के नाम से जानी जाती है और यह एक अनुगामी नदी है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? → भारत की विभिन्न प्रकार की मिट्टियों और उनके रासायनिक तथा भौतिक गुणों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. लाल और पीली मृदा (Red and Yellow Soils) का लाल रंग रवेदार आग्नेय और रूपांतरित चट्टानों में लौह धातु के व्यापक प्रसार के कारण होता है, जबकि इसका पीला रंग इसमें जलयोजन (Hydration) की स्थिति उत्पन्न होने के बाद दिखाई देता है। 2. लैटेराइट मृदा (Laterite Soils) उच्च तापमान और भारी वर्षा वाले क्षेत्रों में तीव्र निक्षालन (Leaching) की प्रक्रिया का परिणाम है, जिसमें सिलिका का निक्षालन हो जाने के कारण चूना, पोटाश और ह्यूमस प्रचुर मात्रा में शेष बच जाते हैं, जो इसे अत्यधिक उपजाऊ बनाते हैं। 3. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार क्षार या लवणीय मृदा (Saline and Alkaline Soils), जिन्हें 'उसर' या 'रेह' भी कहा जाता है, में सोडियम, मैग्नीशियम और कैल्शियम के लवणों की अधिकता होती है, और ये मृदाएँ आमतौर पर अनुचित जल निकास (Poor Drainage) वाले शुष्क एवं अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में विकसित होती हैं। 4. पीटमय और दलदली मृदाएँ (Peaty and Marshy Soils) भारी वर्षा और उच्च आर्द्रता वाले क्षेत्रों में मृत जैविक पदार्थों के बड़े पैमाने पर संचयन से बनती हैं, जिनमें ह्यूमस की मात्रा 10 से 40 प्रतिशत तक होती है और ये मृदाएँ सामान्यतः अम्लीय प्रकृति की होती हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → भारत की मृदाओं (मिट्टी) के वर्गीकरण, उनकी रासायनिक विशेषताओं और भौगोलिक वितरण के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. जलोढ़ मृदा (Alluvial Soils) देश के कुल क्षेत्रफल का सबसे बड़ा हिस्सा (लगभग 40%) कवर करती हैं और ये देश के उत्तरी मैदानों तथा नदी घाटियों में विस्तृत हैं, जिनमें पोटाश, फॉस्फोरस और चूने की प्रचुरता होती है, किंतु ह्यूमस (जैविक पदार्थ) की कमी पाई जाती है। 2. शुष्क और मरुस्थलीय मृदा (Arid Soils) मुख्य रूप से पश्चिमी राजस्थान में पाई जाती हैं, जिनका रंग लाल से भूरा होता है और उच्च तापमान के कारण तीव्र वाष्पीकरण से इनमें नमक की मात्रा बढ़ जाती है, जिससे जल में घुलनशील लवण (कैल्शियम कार्बोनेट) की अधिकता के कारण निचली परतों में 'कंकड़' की परत बन जाती है। 3. क्षारीय और लवणीय मृदाओं (Saline and Alkaline Soils), जिन्हें स्थानीय रूप से 'रेर, उसर, कलर या थूर' कहा जाता है, का निर्माण अधिक सिंचाई वाले क्षेत्रों में जलभराव (Waterlogging) और केशिका आकर्षण (Capillary action) की प्रक्रिया के कारण उपरी सतह पर लवणों के जमा होने से होता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से कथन सही है/हैं? → पृथ्वी सूर्य की परिक्रमा (परिक्रमण) पूरी करने में कितना समय लेती है?
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