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Civil services
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"स्वराज्य मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं इसे लेकर रहूँगा" - यह नारा किसने दिया था?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
यह नारा 1916 के लखनऊ अधिवेशन के दौरान बाल गंगाधर तिलक ने दिया था।
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 20' के अंतर्गत प्रदत्त 'दोषसिद्धि के संबंध में संरक्षण' (Protection in Respect of Conviction for Offences) तथा इसके न्यायिक दायरे के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 20(1) के तहत किसी भी व्यक्ति को ऐसा कोई आपराधिक कानून लागू होने से पूर्व दण्डित नहीं किया जा सकता, जो उस कार्य के करने के समय प्रभावी नहीं था (अर्थात 'भूताक्षरी कानून' या Ex-post facto law पर प्रतिबंध), और यह संरक्षण केवल दीवानी मामलों और कर कानूनों पर भी समान रूप से लागू होता है।
2. अनुच्छेद 20(2) में 'दोहरे खतरे' (Double Jeopardy) के सिद्धांत का प्रावधान है, जिसके अनुसार किसी भी व्यक्ति को एक ही अपराध के लिए एक से अधिक बार अभियोजित और दण्डित नहीं किया जा सकता, किंतु यह सुरक्षा केवल किसी न्यायालय या न्यायिक अधिकरण (Judicial Tribunal) के समक्ष की गई कार्यवाही तक सीमित है, न कि विभागीय या प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा की गई विभागीय जांच तक।
3. अनुच्छेद 20(3) के अनुसार किसी भी अपराध के लिए अभियुक्त व्यक्ति को 'स्वयं अपने विरुद्ध गवाही देने के लिए बाध्य' (Self-incrimination) नहीं किया जा सकता, और सर्वोच्च न्यायालय ने अपने निर्णयों में यह स्पष्ट किया है कि इस अधिकार के तहत किसी अभियुक्त की शारीरिक माप, हस्ताक्षर या अंगूठे का निशान लेने की प्रक्रिया को इस अनुच्छेद का उल्लंघन नहीं माना जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 105' के अंतर्गत संसद के सदस्यों के विशेषाधिकारों (Parliamentary Privileges) और उनकी उन्मुक्तियों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान द्वारा संसद के प्रत्येक सदन को अपने विशेषाधिकारों के हनन या सदन की अवमानना (Breach of privilege or Contempt of house) के लिए किसी भी व्यक्ति (चाहे वह सदन का सदस्य हो या बाहरी व्यक्ति) को दंडित करने की स्पष्ट और अनन्य शक्ति प्रदान की गई है।
2. संसद के किसी भी सदस्य को संसद या उसकी किसी समिति में कही गई किसी बात या दिए गए किसी मत के संबंध में देश के किसी भी न्यायालय में किसी भी प्रकार की कानूनी कार्यवाही (Civil or Criminal proceedings) के प्रति पूर्ण उन्मुक्ति प्राप्त होती है।
3. जब संसद का सत्र चल रहा हो, तो उसके आरंभ होने से 40 दिन पूर्व और उसकी समाप्ति के 40 दिन पश्चात तक संसद के किसी भी सदस्य को किसी भी दीवानी मामले (Civil cases) में गिरफ्तार नहीं किया जा सकता है, भले ही वह मामला पूर्व-लंबित (Pre-existing) हो।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग XIV' (संघ और राज्यों के अधीन सेवाएँ - अनुच्छेद 308 से 323) तथा अखिल भारतीय सेवाओं (All India Services) के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 312 के अनुसार संसद को यह अधिकार प्राप्त है कि वह राज्य सभा द्वारा उपस्थित और मतदान करने वाले कम से कम दो-तिहाई सदस्यों के समर्थित संकल्प (Resolution) के आधार पर, संघ और राज्यों के लिए साझी एक या अधिक अखिल भारतीय सेवाओं के सृजन का उपबंध कर सकती है, और इस प्रकार मूल संविधान में केवल 'भारतीय प्रशासनिक सेवा' (IAS) और 'भारतीय पुलिस सेवा' (IPS) को ही शामिल किया गया था।
2. अखिल भारतीय सेवाओं के सदस्यों की नियुक्ति और सेवा शर्तें राष्ट्रपति द्वारा निर्धारित की जाती हैं, लेकिन इन सेवाओं के अधिकारियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई (Disciplinary Action) करने या उन्हें सेवा से बर्खास्त करने का अंतिम एवं अनन्य अधिकार संबंधित राज्य सरकार के मुख्यमंत्री के पास होता है, भले ही वे अधिकारी उस समय केंद्र सरकार के अधीन प्रतिनियुक्ति (Deputation) पर हों या नहीं।
3. अखिल भारतीय सेवा का कोई भी अधिकारी किसी भी परिस्थिति में एक साथ संघ सरकार और राज्य सरकार दोनों के अधीन प्रशासनिक नियंत्रण या कार्यकारी पदों का निर्वहन नहीं कर सकता है, क्योंकि संघीय ढाँचे की पवित्रता बनाए रखने के लिए संविधान दोहरे नियंत्रण (Dual Control) को पूर्णतः प्रतिबंधित करता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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