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गांधीजी ने पूना पैक्ट के समय कहाँ पर आमरण अनशन किया था?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
गांधीजी ने दलितों को हिंदुओं से अलग करने के ब्रिटिश प्रयासों के विरोध में यरवदा जेल में उपवास शुरू किया था।
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गोदावरी की सबसे बड़ी सहायक नदी कौन सी है?
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भारतीय इतिहास और राष्ट्रीय आंदोलन के संदर्भ में, 'वर्ष 1930 के सविनय अवज्ञा आंदोलन' (Civil Disobedience Movement) और उससे जुड़े विभिन्न घटनाक्रमों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. सविनय अवज्ञा आंदोलन की शुरुआत महात्मा गांधी द्वारा प्रसिद्ध 'डांडी मार्च' (Dandi March) के साथ की गई थी, जिसमें गांधीजी ने अपने 78 चुने हुए सहयात्रियों के साथ साबरमती आश्रम से दांडी तक की 240 मील की पदयात्रा की थी और 6 अप्रैल 1930 को सांकेतिक रूप से नमक कानून तोड़कर आंदोलन का औपचारिक श्रीगणेश किया था।
2. उत्तर-पश्चिम सीमा प्रांत में खान अब्दुल गफ्फार खान (जिन्हें 'सीमांत गांधी' कहा जाता है) के नेतृत्व में 'खुदाई खिदमतगार' (Khudai Khidmatgars) नामक संगठन ने इस आंदोलन में अत्यंत सक्रिय भूमिका निभाई थी, जिसे लाल कुर्ती आंदोलन (Red Shirts Movement) के नाम से भी जाना जाता है।
3. सविनय अवज्ञा आंदोलन के दौरान महिलाओं, व्यापारियों और औद्योगिक श्रमिकों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया, और इसी कालखंड में आयोजित 'प्रथम गोलमेज सम्मेलन' (First Round Table Conference) में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के आधिकारिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया था ताकि संवैधानिक सुधारों पर एक संप्रभु चर्चा की जा सके।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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संविधान के किस अनुच्छेद के तहत 'अन्य अधिकरणों' की स्थापना की जा सकती है?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग V' के अंतर्गत 'संसद के विशेषाधिकार' (Parliamentary Privileges - अनुच्छेद 105) और 'विधानमंडल के विशेषाधिकार' (अनुच्छेद 194) से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 105 के तहत संसद के दोनों सदनों, उसके सदस्यों और समितियों को कुछ विशेष अधिकार और उन्मुक्तियाँ प्रदान की गई हैं, और ये विशेषाधिकार संसद के सदस्यों को सदन के भीतर उनके द्वारा कही गई किसी बात या दिए गए किसी मत के संबंध में न्यायालय में किसी भी प्रकार की कानूनी कार्रवाई से पूर्ण संरक्षण प्रदान करते हैं, भले ही वह बात सदन के नियमों के विपरीत क्यों न हो।
2. 'संसदीय विशेषाधिकारों' के अंतर्गत प्रत्येक सदन को यह अनन्य अधिकार प्राप्त है कि वह अपनी कार्यवाही के प्रकाशन को रोक सकता है और सदन के सदस्यों या बाहरी व्यक्तियों द्वारा विशेषाधिकार हनन (Breach of Privilege) या सदन की अवमानना (Contempt of the House) के लिए उन्हें दंडित या भर्त्सना कर सकता है, तथा इस प्रकार के दंडात्मक मामलों में न्यायालयों को सदन के निर्णय की न्यायिक समीक्षा करने का पूर्ण अधिकार प्राप्त है।
3. यद्यपि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 105(3) में यह प्रावधान किया गया था कि जब तक संसद विशेषाधिकारों को संहिताबद्ध (Codify) नहीं करती है, तब तक इसके विशेषाधिकार वही माने जाएंगे जो ब्रिटिश हाउस ऑफ कॉमन्स के पास संविधान लागू होने के समय थे, तथापि 44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 द्वारा इस संदर्भ में ब्रिटिश हाउस ऑफ कॉमन्स के संदर्भ को हटाकर इसे संसद के सदनों, उसके सदस्यों और समितियों की उस समय की शक्ति और विशेषाधिकारों के समतुल्य कर दिया गया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 129' और 'अनुच्छेद 215' के अंतर्गत 'अभिलेख न्यायालय' (Court of Record) तथा 'न्यायिक अवमानना' (Contempt of Court) के प्रावधानों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 129 के अनुसार उच्चतम न्यायालय और अनुच्छेद 215 के अनुसार उच्च न्यायालय 'अभिलेख न्यायालय' होते हैं, जिसका अर्थ यह है कि उनके सभी निर्णय, अभिलेख और न्यायिक कार्यवाही स्थायी स्मरण और साक्ष्य के रूप में सुरक्षित रखे जाते हैं और किसी भी अन्य न्यायालय में उनकी प्रामाणिकता पर प्रश्न नहीं उठाया जा सकता है।
2. 'न्यायिक अवमानना अधिनियम, 1971' के अंतर्गत अवमानना को 'सिविल अवमानना' (Civil Contempt) और 'आपराधिक अवमानना' (Criminal Contempt) में वर्गीकृत किया गया है, और आपराधिक अवमानना के अंतर्गत किसी न्यायिक कार्यवाही की निष्पक्षता को पूर्वाग्रहित करना या न्याय प्रशासन में हस्तक्षेप करना शामिल है।
3. 'प्रशांत भूषण अवमानना मामला (2020)' और 'बरवारा मामला' में सर्वोच्च न्यायालय ने यह स्पष्ट किया कि भारतीय संविधान के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता (अनुच्छेद 19(1)(a)) असीमित नहीं है और न्यायालय की आलोचना के नाम पर न्यायपालिका की गरिमा को धूमिल करने वाले बयानों पर स्वतः संज्ञान (Suo Motu) लेते हुए उच्च न्यायालयों को भी सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बिना आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू करने का पूर्ण अधिकार है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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