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मौलिक अधिकारों के अलावा 'अन्य प्रयोजनों' के लिए रिट जारी करने की शक्ति किसके पास है?

Detailed Explanation

उच्च न्यायालय मौलिक अधिकारों के अलावा कानूनी अधिकारों के प्रवर्तन के लिए भी रिट जारी कर सकते हैं।
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→ भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 123' के अंतर्गत 'राष्ट्रपति की अध्यादेश प्रख्यापित करने की शक्ति' (Ordinance Making Power of President) के प्रावधानों और उनकी न्यायिक समीक्षा के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. राष्ट्रपति की अध्यादेश जारी करने की शक्ति संसद की विधि बनाने की शक्ति के सह-विस्तारित (Co-extensive) होती है, जिसका अर्थ है कि राष्ट्रपति उसी विषय पर अध्यादेश प्रख्यापित कर सकता है जिस पर संसद कानून बना सकती है, और इस शक्ति का प्रयोग केवल तभी किया जा सकता है जब संसद के दोनों सदन सत्र में न हों। 2. सर्वोच्च न्यायालय के 'डीडी वसु वाद' और 'कुशल कुमार सिन्हा वाद' के ऐतिहासिक निर्णयों के अनुसार, राष्ट्रपति या राज्यपाल द्वारा प्रख्यापित अध्यादेश की न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) पूरी तरह से प्रतिबंधित है, और अध्यादेश जारी करने के लिए संतुष्टि का विषय पूरी तरह से कार्यपालिका का अनंतिम स्वविवेक होता है जिसे न्यायालय में चुनौती नहीं दी जा सकती। 3. प्रत्येक अध्यादेश को संसद के पुनः समवेत (Reassembly) होने पर उसके दोनों सदनों के समक्ष रखा जाना अनिवार्य होता है, और यदि संसद इसे बिना किसी अनुमोदन के छह सप्ताह की अवधि के भीतर अस्वीकार कर देती है या यदि इस अवधि के समाप्त होने से पहले ही दोनों सदन संकल्प द्वारा इसे नापसंद कर देते हैं, तो अध्यादेश स्वतः निष्प्रभाव (Cease to operate) हो जाता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग XV' (निर्वाचन - अनुच्छेद 324 से 329) के अंतर्गत 'भारत के निर्वाचन आयोग' (Election Commission of India - ECI) से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 324 के अनुसार, निर्वाचन आयोग एक स्थायी निकाय है जिसमें मुख्य निर्वाचन आयुक्त और उतने ही अन्य निर्वाचन आयुक्तों, यदि कोई हों, से मिलकर बनेगा, जितने समय-समय पर राष्ट्रपति द्वारा तय किए जाते हैं, तथा मूल संविधान में निर्वाचन आयोग को एक बहु-सदस्यीय निकाय (Multi-member body) के रूप में ही स्थापित किया गया था। 2. मुख्य निर्वाचन आयुक्त को उसके पद से उसी रीति से और उन्हीं आधारों पर हटाया जा सकता है जिस रीति से और जिन आधारों पर उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश को हटाया जाता है, जबकि अन्य निर्वाचन आयुक्तों को मुख्य निर्वाचन आयुक्त की सिफारिश के बिना राष्ट्रपति द्वारा नहीं हटाया जा सकता है। 3. निर्वाचन आयोग के पास संसद और राज्य विधानमंडलों के चुनावों के अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण की शक्ति है, किंतु संविधान या किसी कानून के तहत किए गए चुनावों से संबंधित विवादों का न्यायनिर्णयन (Adjudication) करने की शक्ति केवल निर्वाचन आयोग के पास ही होती है, और इस पर न्यायालयों के हस्तक्षेप का पूर्ण प्रतिषेध है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → लोकमान्य (Lokmanya) की उपाधि से किसे विभूषित किया गया था? → भारतीय राजव्यवस्था और संसद की विधायी प्रक्रिया के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 110' के अंतर्गत 'धन विधेयक' (Money Bill) की परिभाषा और उसकी पारित होने की प्रक्रिया के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. कोई विधेयक धन विधेयक तभी माना जाएगा जब उसमें केवल ऐसे उपबंध हों जो कर-अध्यारोपण, उत्सादन, छूट, परिवर्तन या विनियमन से संबंधित हों, तथा इसके अंतर्गत किसी स्थानीय प्राधिकारी या निकाय द्वारा स्थानीय करों (Local taxes) के आरोपण से संबंधित उपबंध भी शामिल होते हैं। 2. लोकसभा द्वारा पारित किए जाने के बाद जब धन विधेयक को राज्यसभा में भेजा जाता है, तो राज्यसभा के पास इसे संशोधित करने या अस्वीकार करने की पूर्ण शक्ति होती है, बशर्ते वह इसे 14 दिनों के भीतर वापस लोकसभा को भेज दे। 3. यदि लोकसभा द्वारा राज्यसभा की किसी भी सिफारिश को अस्वीकार कर दिया जाता है, तो भी वह धन विधेयक दोनों सदनों द्वारा उस रूप में पारित माना जाता है जिस रूप में वह लोकसभा द्वारा मूलतः पारित किया गया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 371' (Article 371) के अंतर्गत विभिन्न राज्यों के लिए किए गए विशेष प्रावधानों और उनके उद्देश्यों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 371-A के तहत नागालैंड राज्य के संबंध में विशेष प्रावधान किए गए हैं, जिसके अनुसार संसद का कोई भी अधिनियम नागाओं के धार्मिक या सामाजिक प्रथाओं, नागा रूढ़िगत कानून और प्रथाओं, तथा रूढ़िगत कानून के अनुसार सिविल या आपराधिक न्याय के प्रशासन से संबंधित मामलों में तब तक लागू नहीं होगा जब तक कि नागालैंड राज्य की विधानसभा एक प्रस्ताव द्वारा ऐसा निर्णय न ले। 2. अनुच्छेद 371-D के तहत आंध्र प्रदेश और तेलंगाना राज्यों के संबंध में केंद्रीय विश्वविद्यालयों की स्थापना और शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश तथा राज्य सरकार के सेवाओं में स्थानीय कैडर के आरक्षण के लिए विशेष निर्देश देने की शक्ति राष्ट्रपति में निहित की गई है। 3. अनुच्छेद 371-F के अंतर्गत सिक्किम राज्य के संबंध में यह विशेष प्रावधान किया गया है कि सिक्किम के मूल निवासियों (लेप्चा, भूटिया आदि) के अधिकारों और हितों की रक्षा के लिए राज्यपाल के पास कानून और व्यवस्था के रखरखाव के संबंध में अंतिम और विशेष उत्तरदायित्व है, जिसके लिए वह मंत्रिपरिषद की सलाह से स्वतंत्र होकर कार्य कर सकता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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