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संविधान का अंतिम व्याख्याकार (Interpreter) कौन है?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
संविधान की अंतिम व्याख्या करने का अधिकार सर्वोच्च न्यायालय के पास है।
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जहाँगीर की आत्मकथा 'तुजुक-ए-जहाँगीरी' किस भाषा में लिखी गई थी?
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भारतीय इतिहास, कला और संस्कृति के संदर्भ में, सल्तनत काल के दौरान प्रशासनिक व्यवस्था और सैन्य सुधारों से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. सल्तनत काल में 'इक्ता' (Iqta) व्यवस्था एक प्रकार की भू-राजस्व असाइनमेंट प्रणाली थी, जिसके तहत सैन्य कमांडरों या अधिकारियों (जिन्हें इक्तादार या मुक्ती कहा जाता था) को वेतन के बदले एक निश्चित क्षेत्र से राजस्व एकत्र करने का अधिकार दिया जाता था, और यह मूल रूप से सुल्तान इल्तुतमिश के शासनकाल में बड़े पैमाने पर संगठित की गई थी।
2. सुल्तान अलाउद्दीन खिलजी ने अपनी सेना को मजबूत करने और सैनिकों को नकद वेतन देने के लिए बाजार नियंत्रण (Market Control) और मूल्य स्थिरीकरण की नीति लागू की थी, जिसके तहत उसने घोड़ों की पहचान के लिए 'दाग' (Daag) प्रथा और सैनिकों के हुलिया का पंजीकरण करने की प्रणाली शुरू की थी।
3. मुहम्मद बिन तुगलक के शासनकाल में दीवान-ए-कोही (Diwan-e-Kohi) नामक एक नए कृषि विभाग की स्थापना की गई थी, जिसका मुख्य उद्देश्य राज्य की प्रत्यक्ष देखरेख में बंजर भूमि को कृषि योग्य बनाना और किसानों को तकावी (Takavi) ऋण प्रदान करना था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग IV' के अंतर्गत 'राज्य के नीति निर्देशक तत्व' (Directive Principles of State Policy - DPSP, अनुच्छेद 36-51) से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 37 के अनुसार DPSP देश के शासन में मौलिक हैं और देश के लिए कानून बनाने में इन तत्वों को लागू करना राज्य का कर्तव्य होगा, किंतु ये न्यायोचित (Justiciable) नहीं हैं, अर्थात इन्हें किसी भी न्यायालय द्वारा बलपूर्वक लागू नहीं कराया जा सकता है।
2. मूल संविधान में 'समान न्याय और निःशुल्क विधिक सहायता' (Equal justice and free legal aid) का प्रावधान नहीं था, इसे स्वर्ण सिंह समिति की सिफारिशों के आधार पर 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा अनुच्छेद 39A के रूप में जोड़ा गया था।
3. अनुच्छेद 40 के तहत राज्य ग्राम पंचायतों के संगठन के लिए कदम उठाएगा और उन्हें ऐसी शक्तियां प्रदान करेगा जो उन्हें स्वशासन की इकाइयों के रूप में कार्य करने योग्य बनाने के लिए आवश्यक हों, तथा यह प्रावधान मूलतः एक गांधीवादी विचारधारा पर आधारित नीति निर्देशक तत्व है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग XIV' के अंतर्गत 'अखिल भारतीय सेवाएँ' (All India Services) तथा 'अनुच्छेद 312' के प्रावधानों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 312 के अनुसार, यदि राज्य सभा उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के कम-से-कम दो-तिहाई बहुमत से एक संकल्प पारित कर दे कि राष्ट्रीय हित में यह आवश्यक है, तो संसद विधि द्वारा भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) और भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के अतिरिक्त किसी अन्य नई अखिल भारतीय सेवा के सृजन का उपबंध कर सकती है।
2. अखिल भारतीय सेवाओं के सदस्यों की नियुक्ति और सेवा शर्तें केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित की जाती हैं, किंतु ये अधिकारी केंद्र और राज्य दोनों सरकारों के अधीन विभिन्न पदों पर अपनी सेवाएँ देते हैं, और इनका नियंत्रण तथा अनुशासनात्मक अधिकार पूरी तरह से संबंधित राज्य सरकारों के पास होता है, केंद्र सरकार इन्हें सेवा से बर्खास्त नहीं कर सकती।
3. भारतीय वन सेवा (IFS) को वर्ष 1966 में अखिल भारतीय सेवा अधिनियम, 1951 के अंतर्गत एक अखिल भारतीय सेवा के रूप में सृजित किया गया था, और वर्तमान में भारतीय संविधान के अनुच्छेद 312 के तहत देश में कुल तीन अखिल भारतीय सेवाएँ (IAS, IPS और IFS) अस्तित्व में हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 72' के तहत राष्ट्रपति की क्षमादान की शक्ति (Pardoning Power) और इसकी न्यायिक समीक्षा के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 72 के अंतर्गत राष्ट्रपति को उन सभी मामलों में जहाँ दंड या दंडादेश ऐसे विषय से संबंधित है जिस पर संघ की कार्यकारी शक्ति का विस्तार होता है, किसी अपराध के लिए दोषी ठहराए गए किसी भी व्यक्ति के दंड को क्षमा, उसका प्रविलंबन, विराम या परिहार करने अथवा दंडादेश का निलंबन, परिहार या लघुकरण करने की शक्ति प्राप्त है, और यह शक्ति न्यायपालिका की न्यायिक समीक्षा से पूरी तरह से परे (Immune) है।
2. 'मार्-यू राम बनाम यूनियन ऑफ़ इंडिया (1980)' और 'ईश्वर सिंह बनाम उत्तर प्रदेश राज्य' जैसे ऐतिहासिक मामलों में उच्चतम न्यायालय ने यह व्यवस्था दी है कि राष्ट्रपति या राज्यपाल द्वारा क्षमादान की शक्ति का प्रयोग पूरी तरह से अनियंत्रित और मनमाना हो सकता है, और इस पर न्यायालय द्वारा कोई भी प्रश्नचिह्न नहीं लगाया जा सकता है।
3. राष्ट्रपति द्वारा क्षमादान की याचिका पर निर्णय लेते समय केंद्रीय मंत्रिमंडल (Council of Ministers) की सलाह मानना संवैधानिक रूप से बाध्यकारी है, तथा क्षमादान की याचिका के निपटारे में अत्यधिक और अस्पष्टीकृत देरी को आधार बनाकर उच्चतम न्यायालय द्वारा मृत्युदंड पाए कैदी की सजा को आजीवन कारावास में बदला जा सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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