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संविधान सभा की प्रारूप समिति (Drafting Committee) के अध्यक्ष कौन थे?

Detailed Explanation

प्रारूप समिति के अध्यक्ष डॉ. बी. आर. अम्बेडकर थे।
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→ भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग XI' (केंद्र-राज्य विधायी संबंध) तथा 'भारतीय संसद एवं राज्य विधानमंडलों की विधायी शक्तियों' के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 245 के अंतर्गत संसद को पूरे भारत या उसके किसी भी भाग के लिए कानून बनाने की शक्ति प्राप्त है, और किसी राज्य के विधानमंडल को उस राज्य के पूरे क्षेत्र या उसके किसी भाग के लिए कानून बनाने की शक्ति है, किंतु संसद द्वारा बनाया गया कोई भी कानून इस आधार पर अवैध घोषित नहीं किया जा सकता कि उसका अतिरिक्त-क्षेत्रीय प्रभाव (Extra-territorial operation) है। 2. संविधान की सातवीं अनुसूची की 'समवर्ती सूची' (Concurrent List) के किसी विषय पर यदि राज्य विधानमंडल द्वारा बनाया गया कानून संसद द्वारा बनाए गए पहले के कानून के प्रतिकूल या असंगत है, तो संसद का कानून मान्य होगा और राज्य का कानून उस सीमा तक शून्य हो जाएगा जहाँ तक वह संसद के कानून के विरुद्ध है, भले ही राज्य के कानून को संविधान के अनुच्छेद 254(2) के तहत राष्ट्रपति की अनुमति (Assent) प्राप्त हुई हो या नहीं। 3. संविधान के अनुच्छेद 250 के अनुसार यदि राष्ट्रीय आपातकाल (National Emergency) प्रवृत्त है, तो संसद को राज्य सूची (List II) में शामिल किसी भी विषय पर पूरे देश या उसके किसी भाग के लिए कानून बनाने की विधायी शक्ति प्राप्त हो जाती है, किंतु ऐसे आपातकाल की समाप्ति के पश्चात संसद द्वारा बनाए गए वे कानून ठीक छह महीने की अवधि समाप्त होने पर निष्प्रभावी हो जाते हैं, सिवाय उन बातों के जिन्हें उस अवधि से पहले किया गया है या करने का लोप किया गया है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → खेड़ा किस राज्य में स्थित है जहाँ 1918 में सत्याग्रह हुआ था? → रॉलेट एक्ट के समय भारत का वायसराय कौन था? → व्यपगत सिद्धांत (Doctrine of Lapse) के अंतर्गत सबसे पहले किस राज्य का विलय किया गया था? → भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग XV' (निर्वाचन - अनुच्छेद 324 से 329क) तथा राजनीतिक दलों के पंजीकरण एवं दलबदल विरोधी कानून (अनुच्छेद 102(2) और 191(2), एवं दसवीं अनुसूची) के प्रावधानों के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 29क के तहत भारत के निर्वाचन आयोग (Election Commission of India) को राजनीतिक दलों के पंजीकरण की शक्ति प्रदान की गई है, किंतु निर्वाचन आयोग को यह वैधानिक अधिकार प्राप्त नहीं है कि वह किसी पंजीकृत राजनीतिक दल को उसके द्वारा आंतरिक लोकतंत्र का पालन न किए जाने या अपने संविधान में संशोधन करने के बाद उसे समय पर सूचित न करने पर उसकी मान्यता को रद्द (De-register) कर सके। 2. संविधान की दसवीं अनुसूची के अंतर्गत 'दलबदल' (Defection) के आधार पर संसद या राज्य विधानमंडल के किसी सदस्य की अयोग्यता का प्रश्न यदि उठता है, तो उस सदन के सभापति या अध्यक्ष (Chairman or Speaker) का निर्णय अंतिम होता है, और सर्वोच्च न्यायालय ने अपने ऐतिहासिक निर्णय (किहोटो होलोहन मामला, 1992) में यह स्पष्ट किया था कि पीठासीन अधिकारी का यह निर्णय न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) के दायरे से पूरी तरह बाहर है और इसे किसी भी न्यायालय में चुनौती नहीं दी जा सकती है। 3. यदि लोकसभा या राज्य विधानसभा का कोई निर्वाचित सदस्य किसी राजनीतिक दल का सदस्य है और वह स्वेच्छा से उस राजनीतिक दल की सदस्यता छोड़ देता है या सदन में अपने दल के व्हिप (Whip) के विपरीत मतदान करता है तथा उसके इस आचरण को संबंधित राजनीतिक दल द्वारा पंद्रह दिनों के भीतर क्षमा नहीं किया जाता है, तो वह सदन की सदस्यता के लिए अयोग्य हो जाएगा। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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