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कांग्रेस के किस अधिवेशन में पहली बार 'स्वराज' शब्द का प्रयोग हुआ?

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1906 के कलकत्ता अधिवेशन में दादाभाई नौरोजी ने पहली बार स्वराज शब्द का प्रयोग किया।
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→ क्रिप्स मिशन (1942) के संबंध में कौन-सा कथन सही है? → भारतीय इतिहास, कला एवं संस्कृति के संदर्भ में, प्राचीन भारतीय वास्तुकला की 'नागर शैली' (Nagara Style) और उससे जुड़े मंदिर निर्माण के विशिष्ट लक्षणों से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. नागर शैली के मंदिर आमतौर पर एक ऊंचे चबूतरे (जगती) पर बनाए जाते हैं, और इस शैली के मंदिरों में दक्षिण भारतीय (द्रविड़) शैली के विपरीत आमतौर पर विशाल प्रवेश द्वार (गोपुरम) और विशाल प्राचीर दीवारों (Boundary walls) की अनुपस्थिति होती है। 2. नागर शैली के मंदिरों का मुख्य शिखर (Garbhagriha tower) घुमावदार रेखीय होता है, जिसे 'शिखर' कहा जाता है, जिसके शीर्ष पर एक गोलाकार, कुशन जैसी आकृति वाली संरचना होती है जिसे 'आमलक' (Amalaka) कहा जाता है, और आमलक के ऊपर कलश स्थापित किया जाता है। 3. ओडिशा के प्रसिद्ध सूर्य मंदिर (कोणार्क) और खजुराहो के मंदिर नागर शैली के उत्कृष्ट उदाहरण हैं, तथा ओडिशा वास्तुकला में मुख्य मंदिर के सामने बनाए जाने वाले सभा मंडप को 'मंडप' कहा जाता है, जबकि नागर शैली के अन्य क्षेत्रों में इसे 'जगमोहन' के नाम से जाना जाता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → भारतीय पर्यावरण कानून और 'राष्ट्रीय हरित अधिकरण' (National Green Tribunal - NGT) के विधिक क्षेत्राधिकार, अपीलीय प्रावधानों तथा शक्तियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम, 2010 की धारा 14 के तहत NGT को पर्यावरण से जुड़े उन विशिष्ट सिविल मामलों में न्यायनिर्णयन की व्यापक शक्ति प्राप्त है जो अधिनियम की अनुसूची I में सूचीबद्ध सात विशिष्ट पर्यावरण कानूनों के प्रवर्तन से संबंधित हैं, किंतु इसके पास 'वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972' और 'अनुसूचित जनजाति और अन्य पारंपरिक वन निवासी (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियम, 2006' के अंतर्गत आने वाले मामलों पर विचार करने का कोई वैधानिक अधिकार नहीं है। 2. 'मद्रास बार एसोसिएशन बनाम भारत संघ (2021)' मामले में उच्चतम न्यायालय ने यह स्पष्ट किया है कि राष्ट्रीय हरित अधिकरण के किसी भी आदेश, निर्णय या पुरस्कार के विरुद्ध अपील सीधे देश के सर्वोच्च न्यायालय यानी उच्चतम न्यायालय में ही की जा सकती है, और NGT के फैसलों के खिलाफ देश के किसी भी उच्च न्यायालय के समक्ष संविधान के अनुच्छेद 226 या 227 के तहत रिट अधिकारक्षेत्र का प्रयोग पूरी तरह से वर्जित है। 3. 'सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन बनाम भारत संघ' और अन्य न्यायिक निर्णयों के अनुसार, अधिकरण के पास अपने आदेशों, निर्देशों या निर्णयों का पालन न किए जाने पर सिविल अवमानना (Civil Contempt) के साथ-साथ आपराधिक अवमानना (Criminal Contempt) के तहत भी दंडित करने की वही वैधानिक शक्तियाँ प्राप्त हैं जो देश के उच्च न्यायालयों को होती हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 20' के अंतर्गत प्रदत्त 'दोषसिद्धि के संबंध में संरक्षण' (Protection in Respect of Conviction for Offences) तथा इसके न्यायिक दायरे के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 20(1) के तहत किसी भी व्यक्ति को ऐसा कोई आपराधिक कानून लागू होने से पूर्व दण्डित नहीं किया जा सकता, जो उस कार्य के करने के समय प्रभावी नहीं था (अर्थात 'भूताक्षरी कानून' या Ex-post facto law पर प्रतिबंध), और यह संरक्षण केवल दीवानी मामलों और कर कानूनों पर भी समान रूप से लागू होता है। 2. अनुच्छेद 20(2) में 'दोहरे खतरे' (Double Jeopardy) के सिद्धांत का प्रावधान है, जिसके अनुसार किसी भी व्यक्ति को एक ही अपराध के लिए एक से अधिक बार अभियोजित और दण्डित नहीं किया जा सकता, किंतु यह सुरक्षा केवल किसी न्यायालय या न्यायिक अधिकरण (Judicial Tribunal) के समक्ष की गई कार्यवाही तक सीमित है, न कि विभागीय या प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा की गई विभागीय जांच तक। 3. अनुच्छेद 20(3) के अनुसार किसी भी अपराध के लिए अभियुक्त व्यक्ति को 'स्वयं अपने विरुद्ध गवाही देने के लिए बाध्य' (Self-incrimination) नहीं किया जा सकता, और सर्वोच्च न्यायालय ने अपने निर्णयों में यह स्पष्ट किया है कि इस अधिकार के तहत किसी अभियुक्त की शारीरिक माप, हस्ताक्षर या अंगूठे का निशान लेने की प्रक्रिया को इस अनुच्छेद का उल्लंघन नहीं माना जाता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग XV' (निर्वाचन - अनुच्छेद 324 से 329A) के अंतर्गत 'भारत के निर्वाचन आयोग' (Election Commission of India - ECI) और चुनावी सुधारों से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 324 के अनुसार निर्वाचन आयोग एक स्थायी और स्वतंत्र निकाय है, जिसमें मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा संसद द्वारा बनाई गई किसी विधि के अधीन की जाती है, तथा मूल संविधान में इसे एक बहु-सदस्यीय निकाय बनाया गया था जिसे बाद में 1989 में एकल-सदस्यीय कर दिया गया था। 2. निर्वाचन आयोग के पास संसद और राज्य विधानमंडलों के चुनावों के अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण की शक्ति है, परंतु यह आयोग केवल लोकसभा और विधानसभा के चुनावों का संचालन करता है; देश में स्थानीय निकायों (पंचायतों और नगरपालिकाओं) के चुनावों का संचालन करने की जिम्मेदारी पूरी तरह से इसी आयोग की होती है। 3. 'मुख्य निर्वाचन आयुक्त' (CEC) को उसके पद से उसी रीति से और उन्हीं आधारों पर हटाया जा सकता है जो सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश को हटाने के लिए लागू होते हैं, जबकि अन्य चुनाव आयुक्तों को मुख्य चुनाव आयुक्त की संस्तुति के बिना राष्ट्रपति द्वारा किसी भी समय हटाया जा सकता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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