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साइमन कमीशन का विरोध क्यों किया गया था?

Detailed Explanation

साइमन कमीशन में कोई भी भारतीय सदस्य नहीं था, इसलिए इसे 'श्वेत कमीशन' कहकर विरोध किया गया।
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→ भारतीय राजव्यवस्था के संदर्भ में, 'सामूहिक उत्तरदायित्व' (Collective Responsibility) और 'व्यक्तिगत उत्तरदायित्व' (Individual Responsibility) के सिद्धांतों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 75(3) के अनुसार मंत्रिपरिषद लोकसभा के प्रति सामूहिक रूप से उत्तरदायी होती है, जिसका अर्थ है कि लोकसभा में मंत्रिपरिषद के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पारित होने पर केवल प्रधानमंत्री को अपना त्यागपत्र देना होता है, जबकि अन्य मंत्रियों का पद स्वतः सुरक्षित रहता है जब तक कि वे व्यक्तिगत रूप से इस्तीफा न दें। 2. व्यक्तिगत उत्तरदायित्व के सिद्धांत (अनुच्छेद 75(2)) के तहत, प्रत्येक मंत्री राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत (during the pleasure of the President) पद धारण करता है, और व्यावहारिक रूप से राष्ट्रपति प्रधानमंत्री की सलाह पर ही किसी मंत्री को उसके पद से हटा सकते हैं। 3. ब्रिटेन की संसदीय प्रणाली के विपरीत, भारतीय संविधान में मंत्रियों द्वारा किए गए शासकीय कृत्यों के लिए प्रतिहस्ताक्षर (Counter-signature) की कोई संवैधानिक या विधिक अनिवार्यता नहीं है, जिसका अर्थ है कि भारत में मंत्रियों के आधिकारिक आदेशों की वैधता को न्यायालय में इस आधार पर चुनौती नहीं दी जा सकती कि उस पर राष्ट्रपति या राज्यपाल के हस्ताक्षर के साथ किसी मंत्री का प्रतिहस्ताक्षर नहीं था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 356' के अंतर्गत 'राष्ट्रपति शासन' (President's Rule) की उद्घोषणा और उसके प्रभावों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. राष्ट्रपति शासन की उद्घोषणा राष्ट्रपति द्वारा किसी राज्य के राज्यपाल की रिपोर्ट पर या अन्यथा इस संतोष के आधार पर की जा सकती है कि राज्य की सरकार संविधान के प्रावधानों के अनुसार नहीं चल सकती है, और इस उद्घोषणा के लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल की लिखित सलाह होना अनिवार्य है। 2. राष्ट्रपति शासन की उद्घोषणा को संसद के दोनों सदनों द्वारा उसकी घोषणा की तारीख से 'दो मास' के भीतर साधारण बहुमत से अनुमोदित किया जाना अनिवार्य होता है, अन्यथा यह उद्घोषणा दो महीने की समाप्ति पर स्वतः निष्प्रभावी हो जाती है। 3. राष्ट्रपति शासन के प्रभावी होने के दौरान, राष्ट्रपति राज्य के उच्च न्यायालय (High Court) की सभी या किसी भी शक्तियों को अपने हाथ में ले सकता है या उच्च न्यायालय के कामकाज से संबंधित संवैधानिक प्रावधानों को पूरी तरह या आंशिक रूप से निलंबित कर सकता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → भारतीय संविधान के 'मूल अधिकार' (Fundamental Rights) और 'संविधान की संशोधन शक्ति' के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. 'गोलकनाथ बनाम पंजाब राज्य (1967)' मामले में उच्चतम न्यायालय की 11-न्यायाधीशों की पीठ ने यह निर्णय दिया था कि संसद को मौलिक अधिकारों में संशोधन करने की कोई शक्ति प्राप्त नहीं है, क्योंकि संविधान का अनुच्छेद 13(2) 'विधि' शब्द के अंतर्गत संविधान संशोधन अधिनियमों को भी शामिल करता है। 2. चौबीसवां संविधान संशोधन अधिनियम, 1971 द्वारा संसद ने अनुच्छेद 13 और अनुच्छेद 368 में संशोधन करते हुए यह स्पष्ट कर दिया कि अनुच्छेद 368 के तहत किया गया संविधान संशोधन अनुच्छेद 13 के अर्थ के अंतर्गत कोई 'विधि' (Law) नहीं है, जिससे संसद को मूल अधिकारों सहित संविधान के किसी भी हिस्से में संशोधन करने की असीमित शक्ति मिल गई। 3. 'केशवानंद भारती बनाम केरल राज्य (1973)' मामले में उच्चतम न्यायालय ने 24वें संविधान संशोधन की संवैधानिक वैधता को तो बरकरार रखा, किंतु साथ ही 'न्यायिक समीक्षा' और 'संविधान के बुनियादी ढाँचे (Basic Structure)' के सिद्धांत को प्रतिपादित करते हुए यह स्पष्ट किया कि संसद अनुच्छेद 368 के तहत मौलिक अधिकारों में संशोधन तो कर सकती है, किंतु संविधान के मूल स्वरूप को नष्ट नहीं कर सकती। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → Department of Atomic Energy (DAE) द्वारा दुनिया की पहली कॉपर-क्लोरीन (Cu-Cl) थर्मोकेमिकल हाइड्रोजन उत्पादन सुविधा कहाँ स्थापित की गई है? → भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग XX' के अंतर्गत 'संविधान संशोधन प्रक्रिया' (Amendment of the Constitution - अनुच्छेद 368) से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के संशोधन के लिए विधेयक संसद के किसी भी सदन में (लोकसभा या राज्यसभा) प्रस्तुत किया जा सकता है, किंतु इसे प्रस्तुत करने के लिए राष्ट्रपति की पूर्व अनुमति (Prior Permission) प्राप्त करना अनिवार्य होता है, तथा यह विधेयक राज्य विधानमंडलों में कभी भी पुनः स्थापित नहीं किया जा सकता है। 2. संविधान के अनुच्छेद 368 के तहत संशोधन विधेयक को संसद के प्रत्येक सदन द्वारा अलग-अलग विशेष बहुमत (अर्थात सदन की कुल सदस्य संख्या का बहुमत तथा उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों का कम से कम दो-तिहाई बहुमत) द्वारा पारित किया जाना अनिवार्य है, और इस प्रक्रिया में दोनों सदनों की संयुक्त बैठक (Joint Sitting) बुलाने का कोई प्रावधान नहीं है। 3. संघ सूची के विषयों, राष्ट्रपति के निर्वाचन की प्रक्रिया, या संसद में राज्यों के प्रतिनिधित्व से संबंधित प्रावधानों में संशोधन करने के लिए न केवल संसद के विशेष बहुमत की आवश्यकता होती है, बल्कि देश के कम से कम आधे राज्यों के विधानमंडलों द्वारा साधारण बहुमत से उसका अनुमोदन (Ratification) किया जाना भी अनिवार्य है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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