त्वरित लिंक्स
Indian Polity
3 views
भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 312' के अंतर्गत 'अखिल भारतीय सेवाओं' (All-India Services) के सृजन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. संसद को नई अखिल भारतीय सेवा बनाने का अधिकार केवल तभी प्राप्त होता है जब राज्य सभा उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई बहुमत से एक संकल्प पारित करे।
- 2. इस प्रकार सृजित की गई नई अखिल भारतीय सेवा में भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) और भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के अलावा भारतीय न्यायिक सेवा (Indian Judicial Service) को भी शामिल किया गया है, जिसका गठन संविधान लागू होने के साथ ही कर दिया गया था।
- 3. यह प्रावधान देश की संघीय व्यवस्था में राज्य सभा को एक विशिष्ट और अनन्य शक्ति प्रदान करता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 312 के अनुसार, यदि राज्य सभा उपस्थित और मतदान करने वाले कम से कम दो-तिहाई सदस्यों के समर्थन से एक संकल्प पारित कर दे कि राष्ट्रीय हित में ऐसा करना आवश्यक है, तो संसद विधि द्वारा अखिल भारतीय सेवाओं (संघ और राज्यों के लिए उभयनिष्ठ) के सृजन का उपबंध कर सकती है। इस प्रकार कथन 1 सही है। वर्तमान में केवल तीन अखिल भारतीय सेवाएं हैं- IAS, IPS और भारतीय वन सेवा (IFoS)। 'भारतीय न्यायिक सेवा' (IJS) के सृजन का प्रावधान संविधान में है, लेकिन अभी तक इसका गठन नहीं किया गया है; अतः कथन 2 गलत है। यह शक्ति केवल राज्य सभा को प्राप्त है, जो लोकसभा की तुलना में राज्य सभा की स्थिति को मजबूत और विशिष्ट बनाती है। अतः कथन 3 भी सही है।
Related Questions
→
भारतीय निर्वाचन आयोग (Election Commission of India) और चुनाव सुधारों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 324 के अंतर्गत निर्वाचन आयोग के मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति का अधिकार राष्ट्रपति को प्राप्त है, तथा संविधान में यह स्पष्ट रूप से अनिवार्य किया गया है कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त को हटाने की प्रक्रिया वही होगी जो उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश को हटाने के लिए अपनाई जाती है, जबकि अन्य निर्वाचन आयुक्तों को मुख्य निर्वाचन आयुक्त की लिखित सिफारिश के बिना राष्ट्रपति द्वारा नहीं हटाया जा सकता है।
2. वर्ष 1993 में टी.एन. शेषन वाद के पश्चात संसद द्वारा निर्वाचन आयोग को एक बहु-सदस्यीय निकाय के रूप में स्थायी रूप से वैधानिक मान्यता दी गई, जिसमें मुख्य निर्वाचन आयुक्त और दो अन्य निर्वाचन आयुक्तों के बीच शक्तियों का विभाजन किया गया और यह प्रावधान किया गया कि आयोग के भीतर किसी भी निर्णय पर मतभेद होने की स्थिति में बहुमत का नियम लागू होगा, जहाँ मुख्य निर्वाचन आयुक्त के पास कोई वीटो पावर नहीं होगी।
3. जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 में किए गए संशोधनों के अनुसार, किसी निर्वाचन क्षेत्र में चुनाव प्रचार की समाप्ति की समयावधि मतदान समाप्त होने के लिए नियत समय से ठीक अड़तालीस घंटे पूर्व निर्धारित की गई है, और इस मौन अवधि (Silence Period) के दौरान प्रिंट मीडिया, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया तथा सोशल मीडिया पर किसी भी प्रकार के राजनीतिक प्रचार या जनसभाओं के आयोजन पर पूर्ण प्रतिबंध होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
भारतीय संविधान के अंतर्गत उपराष्ट्रपति के पद, उनकी शक्तियों, निर्वाचन प्रक्रिया तथा प्रधानमंत्री और केंद्रीय मंत्रिपरिषद से संबंधित संवैधानिक प्रावधानों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 66 के अनुसार उपराष्ट्रपति का निर्वाचन संसद के दोनों सदनों (निर्वाचित और मनोनीत दोनों सदस्य) के सदस्यों से मिलकर बनने वाले निर्वाचक कॉलेज के सदस्यों द्वारा आनुपातिक प्रतिनिधित्व पद्धति के अनुसार एकल संक्रमणीय मत के द्वारा होता है, जिसमें राज्य विधानसभाओं के सदस्यों की कोई भूमिका नहीं होती है।
2. अनुच्छेद 75(5) के अनुसार कोई भी व्यक्ति जो संसद के किसी भी सदन का सदस्य नहीं है, प्रधानमंत्री या मंत्रिपरिषद का मंत्री नियुक्त किया जा सकता है, किंतु उसे इस पद पर बने रहने के लिए नियुक्ति की तिथि से छह मास के भीतर संसद के किसी न किसी सदन का सदस्य निर्वाचित होना अनिवार्य होता है, अन्यथा वह मंत्री पद पर नहीं रहेगा।
3. सर्वोच्च न्यायालय ने विभिन्न प्रकरणों में यह स्पष्ट किया है कि राष्ट्रपति या राज्यपाल द्वारा मंत्रिपरिषद की सलाह के बिना या मंत्रिपरिषद के बहुमत खो देने के पश्चात भी अपने विवेक से प्रधानमंत्री या मंत्रियों की नियुक्ति की जा सकती है, और मंत्रिपरिषद के सामूहिक उत्तरदायित्व के सिद्धांत के तहत लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव पारित होने पर प्रधानमंत्री सहित संपूर्ण मंत्रिपरिषद को त्यागपत्र देना पड़ता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
टायफाइड और कालरा (हैजा) किसके विशिष्ट उदाहरण हैं?
→
भारतीय संविधान के अंतर्गत 'मूल कर्तव्यों' (Fundamental Duties) के प्रावधानों, उनकी वैधिक स्थिति और स्वर्ण सिंह समिति की संस्तुतियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मूल कर्तव्यों को मूल संविधान में स्वर्ण सिंह समिति की संस्तुति के आधार पर 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा भाग IV-A के अनुच्छेद 51A के तहत शामिल किया गया था, और समिति ने यह भी संस्तुति की थी कि मूल कर्तव्यों का पालन न करने पर संसद को दंड या कर आरोपित करने की विधि बनाने की शक्ति होनी चाहिए, जिसे इंदिरा गांधी सरकार ने संविधान में अनिवार्य रूप से लागू कर दिया था।
2. स्वर्ण सिंह समिति ने केवल 8 मूल कर्तव्यों को जोड़ने की संस्तुति की थी, किंतु 42वें संविधान संशोधन के माध्यम से कुल 10 मूल कर्तव्य जोड़े गए, तथा वर्ष 2002 में 86वें संविधान संशोधन अधिनियम द्वारा 11वाँ मूल कर्तव्य जोड़ा गया।
3. वर्मा समिति (1999) ने कुछ विशिष्ट मूल कर्तव्यों के कार्यान्वयन के लिए कानूनी प्रावधानों की पहचान की थी, जैसे कि राष्ट्रगान और राष्ट्रीय ध्वज के अनादर को रोकने के लिए 'राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम, 1971' प्रवृत्त है, जो यह सिद्ध करता है कि मूल कर्तव्य प्रकृति से केवल नैतिक नहीं बल्कि कई मायनों में विधिनियत भी हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
भारतीय संविधान के अंतर्गत राज्य विधानमंडल—विधानसभा और विधान परिषद—की संरचना, गठन और विधायी शक्तियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 169 के अंतर्गत संसद किसी राज्य में विधान परिषद के सृजन या उत्सादन के लिए कानून बना सकती है, बशर्ते संबंधित राज्य की विधानसभा ने उस राज्य के कुल सदस्यों के बहुमत तथा उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई बहुमत से इस आशय का एक संकल्प पारित कर दिया हो, और ऐसा संकल्प पारित होने पर संसद के लिए उस राज्य में विधान परिषद का गठन करना संवैधानिक रूप से अनिवार्य हो जाता है।
2. विधान परिषद की कुल सदस्य संख्या उस राज्य की विधानसभा के कुल सदस्यों की संख्या के एक-तिहाई से अधिक नहीं हो सकती है, किंतु किसी भी परिस्थिति में विधान परिषद के सदस्यों की कुल संख्या चालीस से कम नहीं होनी चाहिए (अपवादस्वरूप जम्मू-कश्मीर के समय स्थिति भिन्न थी)।
3. विधान परिषद के सदस्यों के निर्वाचन और मनोनयन के संबंध में, इसके कुल सदस्यों का 1/12 भाग ऐसे स्नातकों द्वारा चुना जाता है जो उस राज्य के भीतर कम से कम तीन वर्ष पूर्व ग्रेजुएट हो चुके हैं, तथा 1/6 भाग राज्यपाल द्वारा साहित्य, विज्ञान, कला, सहकारिता आंदोलन और समाज सेवा के क्षेत्र में विशेष ज्ञान या व्यावहारिक अनुभव रखने वाले व्यक्तियों में से मनोनीत किया जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.