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Indian Polity
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भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 338A' के अंतर्गत गठित 'राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग' (National Commission for Scheduled Tribes - NCST) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. इस आयोग की संरचना में एक अध्यक्ष, एक उपाध्यक्ष और तीन अन्य सदस्य होते हैं, जिनकी नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा अपने हस्ताक्षर और मुद्रा सहित आदेश द्वारा की जाती है।
- 2. आयोग के सदस्यों की सेवा शर्तें और पदावधि का निर्धारण संसद द्वारा विधि बनाकर किया जाता है, न कि राष्ट्रपति द्वारा।
- 3. राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग को अपनी प्रक्रिया स्वयं विनियमित करने की शक्ति प्राप्त है और किसी भी मामले की जाँच करते समय इसे सिविल न्यायालय की शक्तियाँ प्राप्त होती हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (NCST) में एक अध्यक्ष, एक उपाध्यक्ष और तीन अन्य सदस्य होते हैं, जिनकी नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है। कथन 2 गलत है: संविधान के अनुच्छेद 338A (4) के अनुसार, आयोग के सदस्यों की सेवा शर्तें और पदावधि राष्ट्रपति द्वारा निर्धारित की जाती हैं, न कि संसद द्वारा। कथन 3 सही है: अनुच्छेद 338A (5) के तहत आयोग को अपनी प्रक्रिया स्वयं विनियमित करने की शक्ति है और किसी भी मामले की जाँच करते समय सिविल न्यायालय की सभी शक्तियाँ प्राप्त होती हैं।
Related Questions
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भारतीय संविधान के अंतर्गत उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) की शक्तियों, क्षेत्राधिकार और न्यायिक समीक्षा से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 131 के अंतर्गत उच्चतम न्यायालय का मूल और अनन्य (Original and Exclusive) क्षेत्राधिकार केंद्र और एक या अधिक राज्यों के बीच या दो या अधिक राज्यों के बीच किसी भी प्रकार के कानूनी विवाद में सुनवाई करने का है, बशर्ते यह विवाद किसी ऐसी संधि या समझौते से उत्पन्न न हुआ हो जो संविधान लागू होने से पूर्व किया गया था।
2. अनुच्छेद 143 के अनुसार राष्ट्रपति को यह शक्ति प्राप्त है कि वह विधि या तथ्य के किसी ऐसे प्रश्न पर, जो सार्वजनिक महत्व का है, उच्चतम न्यायालय से परामर्श प्राप्त कर सकता है, और ऐसे परामर्शदाता न्याय-क्षेत्र (Advisory Jurisdiction) के तहत उच्चतम न्यायालय द्वारा दी गई राय को मानने के लिए राष्ट्रपति संवैधानिक रूप से बाध्य होता है।
3. उच्चतम न्यायालय को संविधान के अनुच्छेद 137 के तहत अपने द्वारा दिए गए निर्णय या आदेश का पुनरावलोकन (Review) करने की शक्ति प्राप्त है, और संसद विधि द्वारा उच्चतम न्यायालय की अधिकारिता को सीमित कर सकती है किंतु संविधान के मूल ढांचा (Basic Structure) को संशोधित करके इसके न्यायक्षेत्र को पूरी तरह समाप्त नहीं किया जा सकता।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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संविधान का कौन सा अनुच्छेद 'छुआछूत का अंत' (Abolition of Untouchability) करता है?
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अविश्वास प्रस्ताव किस सदन में आता है?
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भारतीय संविधान की प्रस्तावना (उद्देशिका) में उल्लिखित विभिन्न आयामों और उससे संबंधित ऐतिहासिक घटनाओं के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान की प्रस्तावना में 'स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व' (Liberty, Equality and Fraternity) के आदर्शों को अमेरिकी स्वतंत्रता की घोषणा से प्रेरित होकर अपनाया गया है, जबकि 'न्याय' (सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक) के आदर्श को रूसी क्रांति (1917) के प्रेरणास्त्रोत से लिया गया है।
2. सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 'गोलकनाथ वाद' (1967) में यह अभिनिर्धारित किया गया था कि प्रस्तावना संविधान का एक अनन्य और मूल भाग है, जिसमें संसद को अनुच्छेद 368 के तहत भी संशोधन करने की असीमित शक्ति प्राप्त है।
3. 'बेरूबारी यूनियन वाद' (1960) में सर्वोच्च न्यायालय ने यह स्पष्ट किया था कि प्रस्तावना संविधान का अंग नहीं है, इसलिए विधायिका इसमें संशोधन नहीं कर सकती, किंतु बाद में 'केशवानंद भारती वाद' (1973) में न्यायालय ने अपने इस दृष्टिकोण को बदलते हुए प्रस्तावना को संविधान का अभिन्न अंग स्वीकार किया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान के अंतर्गत नागरिकता के प्रावधानों (अनुच्छेद 5-11) और संसद की विधाई शक्तियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 9 के स्पष्ट प्रावधान के अनुसार, यदि कोई भारतीय नागरिक स्वेच्छा से किसी विदेशी राज्य की नागरिकता प्राप्त कर लेता है, तो उसकी भारतीय नागरिकता स्वतः समाप्त हो जाती है, किंतु यह नियम उन मामलों पर लागू नहीं होता जहाँ भारत सरकार द्वारा युद्ध काल की घोषणा की गई हो।
2. अनुच्छेद 11 संसद को नागरिकता के अर्जन और समाप्ति तथा नागरिकता से संबंधित अन्य सभी विषयों के संबंध में विधि बनाने की संपूर्ण और अनन्य शक्ति प्रदान करता है, और इस संवैधानिक शक्ति के तहत संसद द्वारा बनाए गए किसी भी कानून को इस आधार पर अवैध घोषित नहीं किया जा सकता कि वह भारत के राज्यक्षेत्र के बाहर के भू-भाग पर भी लागू होता है (एक्स्ट्रा-टेरिटोरियल ऑपरेशन)।
3. नागरिकता (संशोधन) अधिनियम, 2019 के अंतर्गत पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से 31 दिसंबर 2014 को या उससे पहले भारत आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदायों के प्रवासियों को अवैध प्रवासी नहीं माना जाएगा और उनके लिए देशीयकरण (Naturalisation) द्वारा नागरिकता प्राप्त करने की आवश्यक निवास अवधि को 11 वर्ष से घटाकर 5 वर्ष कर दिया गया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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