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भारतीय कला और संस्कृति के संदर्भ में, 'तंजौर पेंटिंग' (Thanjavur Painting) की मुख्य विशेषता क्या है, जो इसे अन्य चित्रकला शैलियों से अलग करती है?

Detailed Explanation

तंजौर पेंटिंग (या तंजावुर चित्रकला) दक्षिण भारत की एक शास्त्रीय चित्रकला शैली है, जिसकी उत्पत्ति 16वीं शताब्दी में मराठा शासन के दौरान तंजौर में हुई थी। इस शैली की सबसे प्रमुख विशेषता इसके समृद्ध और जीवंत रंग, सोने के पत्थरों (Gold foil) का उदार उपयोग, और पारंपरिक रूप से जड़े हुए अर्द्ध-कीमती पत्थर तथा कांच के टुकड़े हैं, जो चित्रों को एक अनूठा और उभरा हुआ (3D) प्रभाव प्रदान करते हैं। ये चित्र मुख्य रूप से हिंदू देवी-देवताओं पर आधारित होते हैं।
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