त्वरित लिंक्स
History of India
15 views
प्राचीन भारतीय इतिहास के संदर्भ में, सातवाहन राजवंश के किस शासक ने 'एका ब्राह्मण' (अद्वितीय ब्राह्मण) की उपाधि धारण की थी और वेदों के अध्ययन को पुनः स्थापित करने का दावा किया था?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
गौतमीपुत्र सातकर्णि सातवाहन राजवंश का सबसे महान शासक था। नासिक प्रशस्ति (उसकी माता गौतमी बालाश्री द्वारा जारी) में उसे 'एका ब्राह्मण' (अनूठा ब्राह्मण या ब्राह्मणों का रक्षक) तथा 'आगमों का निलय' कहा गया है। उसने क्षत्रियों के अंहकार को चूर-चूर किया और वर्णसंकर (विभिन्न जातियों के सम्मिश्रण) की प्रथा को रोका।
Related Questions
→
वर्ष 1857 के महान विद्रोह के राजनीतिक, सामाजिक, धार्मिक और आर्थिक कारणों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. लॉर्ड डलहौजी द्वारा लागू की गई 'व्यपगत सिद्धांत' (Doctrine of Lapse) नीति के तहत सतारा, नागपुर और झाँसी के अतिरिक्त अवध को भी कुशासन के आधार पर 1856 में ब्रिटिश साम्राज्य में मिला लिया गया, जिससे वहाँ के सैनिकों और अभिजात वर्ग में तीव्र असंतोष उत्पन्न हुआ।
2. ब्रिटिश सरकार द्वारा 1850 में पारित 'धार्मिक अयोग्यता अधिनियम' (Religious Disabilities Act) के तहत यह प्रावधान किया गया कि धर्म परिवर्तन करने से पुश्तैनी संपत्ति से अधिकार समाप्त नहीं होगा, जिसे रूढ़िवादी भारतीयों द्वारा ईसाई धर्म को बढ़ावा देने के षड्यंत्र के रूप में देखा गया।
3. भू-राजस्व की कठोर नीतियों और 'इनाम आयोग' (Inam Commission) के माध्यम से बिना कर वाली जागीरें और दास्य भूमि वापस ले लिए जाने के कारण ग्रामीण और अभिजात वर्ग दोनों पर भारी आर्थिक संकट आ गया, जिससे अंग्रेजों के विरुद्ध असंतोष की ज्वाला भड़क उठी।
4. ब्रिटिश अधिकारियों द्वारा भारतीयों के प्रति नस्लीय श्रेष्ठता का भाव (आरियान और नेटिव का भेद), सामाजिक भेदभाव तथा भारतीय रीति-रिवाजों में सुधार के नाम पर किए जा रहे हस्तक्षेप ने पारंपरिक समाज की धार्मिक और सांस्कृतिक अस्मिता को खतरे में डाल दिया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
1857 के विद्रोह के दौरान झाँसी और ग्वालियर क्षेत्र में रानी लक्ष्मीबाई और तात्या टोपे के सैन्य अभियानों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मार्च 1858 में सर ह्यूरोज के नेतृत्व में ब्रिटिश सेना ने झाँसी के किले को घेर लिया, जिसके उपरांत रानी लक्ष्मीबाई पुरुष वेशभूषा धारण कर अंग्रेजों से संघर्ष करते हुए कालपी की ओर प्रस्थान करने में सफल हुईं, जहाँ उन्हें तात्या टोपे का सैन्य सहयोग प्राप्त हुआ।
2. कालपी की पराजय के पश्चात रानी लक्ष्मीबाई और तात्या टोपे ने ग्वालियर की ओर रुख किया और सिंधिया शासक (जयाजीराव सिंधिया) की सेना को पराजित कर ग्वालियर के सामरिक दुर्ग पर अधिकार कर लिया, जहाँ नाना साहब को पेशवा घोषित किया गया।
3. ग्वालियर पर अधिकार करने के बाद तात्या टोपे ने संयुक्त मराठा सेना के मुख्य कमांडर के रूप में अंग्रेजों के विरुद्ध मोर्चा संभाला, किंतु ग्वालियर के अंतिम निर्णायक युद्ध में सर ह्यूरोज की सेना से लड़ते हुए रानी लक्ष्मीबाई वीरगति को प्राप्त हुईं।
4. रानी लक्ष्मीबाई की मृत्यु के पश्चात तात्या टोपे नेपाल की तराई में चले गए, जहाँ ब्रिटिश सेना द्वारा उन्हें कभी पकड़ा नहीं जा सका और उन्होंने शेष जीवन वहीं अज्ञातवास में बिताया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
भारतीय स्वतंत्रता, माउंटबेटन योजना और देश का विभाजन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 3 जून 1947 को घोषित माउंटबेटन योजना में भारत के विभाजन की रूपरेखा स्पष्ट की गई थी, जिसके तहत बंगाल और पंजाब विधानसभाओं की बैठकों में हिंदू और मुस्लिम बहुसंख्यक जिलों के सदस्यों द्वारा अलग-अलग बैठक कर प्रांत के विभाजन के पक्ष या विपक्ष में निर्णय लिया जाना था।
2. माउंटबेटन योजना के आधार पर ब्रिटिश संसद में प्रस्तुत 'भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम 1847' (Indian Independence Act 1847) को ब्रिटिश क्राउन की स्वीकृति मिलने के पश्चात 15 अगस्त 1947 को भारत और पाकिस्तान दो स्वतंत्र डोमिनियन अस्तित्व में आए।
3. पंजाब और बंगाल में सीमाओं के निर्धारण के लिए सर सिरिल रेडक्लिफ की अध्यक्षता में गठित 'सीमा आयोग' (Boundary Commission) ने अपने अंतिम पंचाट (Award) की घोषणा 15 अगस्त 1947 से पूर्व ही कर दी थी, किंतु प्रशासनिक और राजनीतिक कारणों से इसे स्वतंत्रता दिवस के ठीक दो दिन बाद यानी 17 अगस्त 1947 को सार्वजनिक किया गया।
4. इस योजना के प्रावधानों के अंतर्गत उत्तर-पश्चिमी सीमा प्रांत (NWFP) और असम के सिलहट जिले में भारत या पाकिस्तान में शामिल होने का निर्णय लेने के लिए जनमत संग्रह (Referendum) कराया गया था, जिसमें दोनों स्थानों की जनता ने पाकिस्तान के पक्ष में मतदान किया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
मध्यकालीन भारत के इतिहास में भक्ति और सूफी आंदोलन के दार्शनिक स्वरूप, उनके प्रमुख संतों तथा उनकी विचारधाराओं के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. शंकराचार्य द्वारा प्रतिपादित 'अद्वैत वेदांत' के अनुसार ब्रह्म ही एकमात्र सत्य (परम सत्य) है और जगत एक 'माया' (भ्रम) है, जबकि इसके विपरीत रामानुजचार्य ने 'विशिष्टाद्वैत' का सिद्धांत दिया जिसके अंतर्गत जीवात्मा और जगत ब्रह्म का ही विशिष्ट अंश हैं।
2. सूफी सिलसिले (सिलसिला) मुख्य रूप से दो भागों में विभाजित थे: 'बा-शरा' (जो इस्लामिक कानून यानी शरिया के नियमों का सख्ती से पालन करते थे, जैसे चिश्ती और सुहरावर्दी) और 'बे-शरा' (जो शरिया के पारंपरिक बंधनों से पूरी तरह मुक्त होकर जीवन बिताते थे, जैसे कलंदरी और मदारिया)।
3. उत्तर भारत में भक्ति आंदोलन को लोकप्रिय बनाने वाले रामानंद ने जातिगत भेदभाव और ऊँच-नीच की पारंपरिक रूढ़ियों का कड़ा विरोध किया तथा उनके शिष्यों में संत कबीर (जुलाहा), रैदास (मोची), सेना (नाई) और पीपा (राजपूत शासक) जैसे विभिन्न सामाजिक वर्गों के प्रतिनिधि शामिल थे।
4. चिश्ती सिलसिले के महान संत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती के प्रमुख शिष्य निजामुद्दीन औलिया थे, जिनके दरबार में सुल्तान अलाउद्दीन खिलजी से लेकर मुहम्मद बिन तुगलक तक कई सुल्तानों ने व्यक्तिगत रूप से भेंट की थी, किंतु औलिया ने कभी भी किसी भी शासक से राजकीय अनुदान या वित्तीय सहायता स्वीकार नहीं की।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
बिहार में 1857 के महान विद्रोह के महान सेनानी बाबू वीर कुंवर सिंह और उनके भाई अमर सिंह के नेतृत्व एवं संघर्ष के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. आरा पर विजय प्राप्त करने के बाद वीर कुंवर सिंह ने उत्तर प्रदेश में बलिया के निकट गंगा नदी को पार करते हुए आजमगढ़ के ब्रिटिश अधिकारियों को पराजित किया था और ब्रिटिश सेना के विरुद्ध अपनी अंतिम सफल सैन्य गतिविधि के रूप में जगदीशपुर वापस लौटते समय अप्रैल 1858 में कैप्टन ली ग्रांड की सेना को पूरी तरह खदेड़ दिया था।
2. वीर कुंवर सिंह की मृत्यु के बाद उनके छोटे भाई अमर सिंह ने ब्रिटिश सत्ता के विरुद्ध सशस्त्र संघर्ष को जारी रखा और कैमूर की पहाड़ियों (कैमूर रेंज) को अपना सुरक्षित अड्डा बनाते हुए ब्रिटिश सेना के खिलाफ एक प्रभावी गोरिल्ला युद्ध (छापामार युद्ध) का संचालन किया था।
3. अमर सिंह द्वारा कैमूर की पहाड़ियों से संचालित इस समानांतर प्रतिरोध और प्रशासन को समाप्त करने के लिए ब्रिटिश जनरल एसाइल (Douglas) और कमिश्नर सैमुअल्स ने व्यापक सैन्य अभियान चलाया, जिसके तहत उनके सहयोगियों को पकड़कर कठोर दंड दिया गया, किंतु अमर सिंह ब्रिटिश गिरफ्त से अंत तक दूर रहे और नेपाल की तराई में उनकी मृत्यु हुई।
4. वीर कुंवर सिंह ने अपनी इस संपूर्ण सैन्य यात्रा के दौरान ब्रिटिश सेनाओं के पास आधुनिक हथियारों और तोपखाने की कमी का लाभ उठाते हुए केवल पारंपरिक भालों और तलवारों का उपयोग किया था, और कभी भी ब्रिटिश सेना से आधुनिक बंदूकों या तोपों का अधिग्रहण नहीं किया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.