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History of India
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प्राचीन भारतीय इतिहास के संदर्भ में, मौर्यकाल में 'सीताध्यक्ष' (Sitadhyaksha) अधिकारी का मुख्य उत्तरदायित्व निम्नलिखित में से क्या था?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
मौर्यकालीन प्रशासनिक व्यवस्था में 'सीताध्यक्ष' कृषि विभाग का प्रमुख अधिकारी होता था। 'सीता' शब्द का अर्थ राजकीय भूमि से होने वाली आय या राजकीय कृषि भूमि से था। वह कृषि कार्यों, दासों, कर्मकारों और कैदियों की सहायता से सरकारी भूमि पर खेती करवाने और कृषि उत्पादन के प्रबंधन के लिए उत्तरदायी था। जबकि खानों के अध्यक्ष को 'आकराध्यक्ष' और नगर प्रशासन से जुड़े अधिकारी को 'नागरिक' कहा जाता था।
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भारत छोड़ो आंदोलन (1942) और सुभाष चंद्र बोस द्वारा गठित आज़ाद हिंद फौज (INA) के वैचारिक तथा ऐतिहासिक संबंधों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. वर्ष 1942 में जब कांग्रेस ने 'भारत छोड़ो आंदोलन' का प्रस्ताव पारित किया, तो सुभाष चंद्र बोस भारत में थे और उन्होंने महात्मा गांधी के 'करो या मरो' के नारे का पूर्ण समर्थन करते हुए इस आंदोलन के पहले चरण की कमान अपने हाथों में संभाली थी।
2. सुभाष चंद्र बोस ने जर्मनी से प्रसारित अपने रेडियो संदेशों और 'फॉरवर्ड ब्लॉक' की कार्यप्रणाली के माध्यम से यह माना था कि ब्रिटेन के युद्ध संकट का लाभ भारत को अपनी स्वतंत्रता के लिए उठाना चाहिए, जो कि कांग्रेस के कुछ अन्य नेताओं के उस दृष्टिकोण से भिन्न था जिसमें फासीवादी ताकतों के विरुद्ध मित्र राष्ट्रों का समर्थन करने की बात कही गई थी।
3. सिंगापुर और दक्षिण-पूर्व एशिया में कैप्टन मोहन सिंह द्वारा स्थापित और बाद में रास बिहारी बोस के नेतृत्व में पुनर्गठित 'आज़ाद हिंद फौज' (INA) का पुनरुद्धार और सर्वोच्च सैन्य नेतृत्व वर्ष 1943 में सुभाष चंद्र बोस के हाथों में आया, जिन्होंने 'दिल्लीचलो' और 'तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा' का ओजस्वी नारा दिया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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मध्यकालीन भारत के इतिहास में 'भक्ति और सूफी आंदोलन' के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. दक्षिण भारत में भक्ति आंदोलन को लोकप्रिय बनाने का श्रेय मुख्य रूप से आलवार (वैष्णव संत) और नयनार (शैव संत) संतों को जाता है, जिन्होंने तमिल भाषा में अपने भजनों के माध्यम से भक्ति का प्रसार किया और जातिगत भेदभाव का कड़ा विरोध किया।
2. चिश्ती सिलसिले के प्रसिद्ध सूफी संत निजामुद्दीन औलिया ने योग क्रियाओं और संगीत (समां) को अपने आध्यात्मिक साधना का मुख्य अंग बनाया था, तथा उनके उदार दृष्टिकोण के कारण उन्हें 'महबूब-ए-इलाही' (ईश्वर के प्रिय) की उपाधि से सम्मानित किया गया था।
3. सूफी संतों के शुरुआती दौर में 'बा-शरा' (इस्लामी शरीयत कानूनों के नियमों का पालन करने वाले) और 'बे-शरा' (शरीयत के बंधन से मुक्त, जिन्हें 'मदर्स' या मस्त फकीर भी कहा जाता था) नामक दो प्रमुख धाराएं विकसित हुई थीं, जिनमें चिश्ती और सुहरावर्दी सिलसिले 'बे-शरा' श्रेणी के अंतर्गत आते थे।
4. भक्ति संत कबीर दास और रामानंद ने निर्गुण और सगुण दोनों धाराओं का समन्वय करते हुए रूढ़िवादी ब्राह्मणवाद और बाह्य आडंबरों (जैसे मूर्तिपूजा और तीर्थयात्रा) का खंडन किया, तथा कबीर के उपदेश उनके शिष्यों द्वारा 'बीजक' नामक ग्रंथ में संकलित किए गए।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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यूरोपीय कंपनियों के भारत आगमन और पुर्तगाली सत्ता की स्थापना के प्रारंभिक दौर के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. वास्को डी गामा की भारत की प्रथम यात्रा (1498 ई.) के समय कालीकट के हिंदू शासक 'जमूरिन' (सामुतिरी) ने पुर्तगालियों का स्वागत किया था, क्योंकि वह अरब व्यापारियों के एकाधिकार को तोड़कर काली मिर्च और मसालों के व्यापार को बढ़ाना चाहता था।
2. भारत में प्रथम पुर्तगाली गवर्नर के रूप में आए फ्रांसिस्को डी अल्मेडा ने 'ब्लू वाटर पॉलिसी' (शांत जल की नीति) का प्रतिपादन किया था, जिसका मुख्य उद्देश्य हिंद महासागर पर पुर्तगालियों का प्रभुत्व स्थापित करना और व्यापारिक मार्गों को सुरक्षित करना था।
3. अल्बुकर्क को भारत में पुर्तगाली साम्राज्य का वास्तविक संस्थापक माना जाता है, जिसने वर्ष 1510 में बीजापुर के आदिल शाह से गोवा को छीनकर पुर्तगालियों का मुख्य प्रशासनिक केंद्र बनाया और भारतीयों के साथ विवाह की नीति (पुनर्जागरण विवाह) को हतोत्साहित किया।
4. पुर्तगालियों ने हिंद महासागर से होने वाले व्यापार पर नियंत्रण स्थापित करने के लिए 'कार्टेज' (Cartaz) व्यवस्था लागू की थी, जिसके तहत अन्य एशियाई जहाजों को पुर्तगाली बंदरगाहों से कर चुकाकर लाइसेंस लेना अनिवार्य था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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हिन्दुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन (HRA) से जुड़े क्रांतिकारी आंदोलन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. वर्ष 1928 में दिल्ली के फिरोजशाह कोटला मैदान में हुई बैठक में चंद्रशेखर आजाद के नेतृत्व में HRA का नाम बदलकर 'हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन' (HSRA) कर दिया गया और इसमें समाजवाद को मुख्य वैचारिक आधार बनाया गया।
2. वर्ष 1925 में घटित 'काकोरी ट्रेन एक्शन' के दौरान डाउन सहारनपुर-लखनऊ पैसेंजर ट्रेन को लूटने की योजना रामप्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खान और राजेंद्र लाहिरी के नेतृत्व में बनाई गई थी, जिसका मुख्य उद्देश्य क्रांतिकारी गतिविधियों के लिए ब्रिटिश खजाने का धन प्राप्त करना था।
3. साइमन कमीशन के विरोध प्रदर्शन के दौरान लाला लाजपत राय पर हुए लाठीचार्ज का बदला लेने के लिए भगत सिंह, सुखदेव और चंद्रशेखर आजाद ने दिसंबर 1928 में लाहौर में ब्रिटिश पुलिस अधिकारी जॉन सांडर्स की गोली मारकर हत्या कर दी थी।
4. भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त ने जन-विरोधी 'पब्लिक सेफ्टी बिल' और 'ट्रेड डिस्प्यूट्स बिल' के विरोध में 8 अप्रैल 1929 को केंद्रीय विधानसभा में बम फेंके, और अपनी गिरफ्तारी के समय 'इंकलाब जिंदाबाद' का नारा देते हुए न्यायालय को अपने प्रचार का मंच बनाया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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चंपारण सत्याग्रह (1917) और असहयोग आंदोलन (1920-22) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. चंपारण सत्याग्रह के दौरान राजकुमार शुक्ल के विशेष आग्रह पर महात्मा गांधी वहाँ पहुँचे थे, जहाँ उन्होंने यूरोपीय नील बागान मालिकों द्वारा किसानों पर थोपी गई 'तीनकठिया' प्रथा के विरुद्ध आवाज उठाई, जिसके तहत किसानों को अपनी कुल भूमि के 3/20 वें हिस्से पर अनिवार्य रूप से नील की खेती करनी होती थी।
2. सरकार द्वारा गठित 'चंपारण कृषि समिति' (Champaran Agrarian Committee) के समक्ष महात्मा गांधी ने यह कड़ा रुख अपनाया कि बागान मालिकों द्वारा किसानों से अवैध रूप से वसूले गए धन का 100 प्रतिशत हिस्सा तत्काल वापस किया जाए, और समिति ने पूर्ण शत-प्रतिशत वापसी की उनकी इस मांग को स्वीकार करते हुए एक भी पैसा कम नहीं किया।
3. वर्ष 1920 में प्रारंभ हुए असहयोग आंदोलन के दौरान नागपुर अधिवेशन में कांग्रेस ने 'शांतिपूर्ण और वैध तरीकों से स्वराज की प्राप्ति' को अपना मुख्य लक्ष्य घोषित किया तथा आंदोलन के सकारात्मक कार्यक्रमों के तहत राष्ट्रीय विद्यालयों और पंचायतों की स्थापना को प्रमुखता दी।
4. चौरी-चौरा कांड (फरवरी 1922) की हिंसक घटना से आहत होकर महात्मा गांधी ने कांग्रेस की कार्य समिति की बैठक में असहयोग आंदोलन को तत्काल प्रभाव से समाप्त करने की घोषणा की, जिससे सुभाष चंद्र बोस और चित्तरंजन दास जैसे युवा नेताओं ने इस निर्णय का पुरजोर समर्थन किया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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