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History of India
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प्राचीन भारतीय इतिहास के संदर्भ में, ऋग्वैदिक कालीन नदियों के प्राचीन और उनके आधुनिक नामों का कौन सा युग्म सुमेलित नहीं है?

Detailed Explanation

ऋग्वेद में उल्लिखित नदियाँ और उनके आधुनिक नाम इस प्रकार हैं: 'कुभा' को काबुल नदी, 'परुष्णी' को रावी नदी, 'सुवास्तु' को स्वात नदी कहा जाता था। वहीं 'क्रुमु' नदी का आधुनिक नाम 'कुर्रम' नहीं बल्कि 'क्रुमु' ही है, जिसे आधुनिक संदर्भ में 'कुर्रम' नदी (अफगानिस्तान-पाकिस्तान सीमा क्षेत्र) कहा जाता है। हालांकि, एक अन्य महत्वपूर्ण नदी 'सदाानीरा' का आधुनिक नाम गंडक है और 'कुभा' का काबुल है। यहाँ सभी विकल्प सही हैं क्योंकि क्रुमु का आधुनिक नाम कुर्रम ही है। एक अधिक कठिन विकल्प के रूप में 'सतुद्रि' (सतलुज) या 'विपाशा' (ब्यास) का प्रयोग किया जाता है। चूँकि विकल्प (d) क्रुमु का कुर्रम सही रूप से सुमेलित है, इस प्रश्न में कोई भी युग्म असुमेलित नहीं है, अतः इस प्रकार के उच्च स्तरीय प्रश्नों में परीक्षार्थी को ऋग्वैदिक भूगोल की गहरी समझ होनी चाहिए। (नोट: इस प्रश्न का उद्देश्य छात्रों को उत्तर पश्चिमी अफगानिस्तान और पंजाब की नदियों के प्राचीन नामों से परिचित कराना है)।
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Related Questions

→ वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान दिल्ली में विद्रोहियों के नेतृत्व और मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर की भूमिका के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. दिल्ली में विद्रोह की औपचारिक शुरुआत मेरठ के सिपाहियों के आगमन के साथ हुई और उन्होंने अनिच्छुक वृद्ध मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर को भारत का 'शहनशाह-ए-हिन्दुस्तान' घोषित कर इस विद्रोह का प्रतीकीर्ण प्रतीक व संवैधानिक प्रमुख बनाया। 2. वास्तविक सैन्य नेतृत्व और प्रशासनिक नियंत्रण की बागडोर जनरल बख्त खान के नेतृत्व में बनी 'सैनिक अदालत' (Court of Soldiers) के हाथों में थी, जिसमें विभिन्न रेजिमेंटों से आए सिपाही और अधिकारी शामिल थे। 3. ब्रिटिश सेना द्वारा दिल्ली पर पुनः अधिकार करने के पश्चात जनरल हडसन ने हुमायूं के मकबरे से बहादुर शाह जफर को गिरफ्तार किया और उनके पुत्रों को सरेआम गोली मार दी, तथा जफर को आजीवन निर्वासन के लिए रंगून भेज दिया गया, जहाँ 1862 में उनका निधन हो गया। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → ब्रिटिश भारत में लागू की गई विभिन्न भू-राजस्व प्रणालियों (स्थाई बंदोबस्त, रयतवारी और महालवारी) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. लॉर्ड कार्नवालिस द्वारा 1793 में बंगाल, बिहार और उड़ीसा में लागू किए गए 'स्थाई बंदोबस्त' (Permanent Settlement) के तहत जमींदारों को भूमि का वास्तविक स्वामी मान लिया गया, जिससे पारंपरिक कृषकों की स्थिति केवल किरायेदारों (Tenants) तक सीमित हो गई और 'सूर्योस्त कानून' (Sunset Law) के कारण अनेक जमींदारों की अपनी पुश्तैनी ज़मीनें भी नीलाम हो गईं। 2. थॉमस मुनरो और कैप्टन रीड द्वारा मुख्य रूप से मद्रास और बंबई प्रेसीडेंसी में विकसित 'रयतवारी व्यवस्था' में सरकार और किसान (रयत) के बीच सीधा भू-राजस्व समझौता हुआ, जिसमें बीच के बिचौलियों या जमींदारों को समाप्त कर दिया गया, किंतु अत्यधिक ऊँची लगान दरों और अकाल के समय भी कर में कोई छूट न मिलने के कारण किसान साहूकारों के चंगुल में फंसते चले गए। 3. हॉल्ट मैकेंज़ी द्वारा परिकल्पित और विलियम बेंटिंक के शासनकाल में उत्तर-पश्चिम प्रांत, मध्य भारत और पंजाब के क्षेत्रों में लागू 'महालवारी व्यवस्था' के अंतर्गत भू-राजस्व का निर्धारण व्यक्तिगत किसान या पूरे गाँव (महाल) के स्तर पर सामूहिक रूप से किया गया, जिसमें गाँव के मुखिया या लंबरदार को राजस्व संग्रह की व्यक्तिगत और सामूहिक जिम्मेदारी सौंपी गई थी। 4. इन तीनों प्रमुख भू-राजस्व प्रणालियों का दीर्घकालिक प्रभाव यह हुआ कि भारतीय कृषि का बड़े पैमाने पर व्यावसायीकरण (Commercialization of Agriculture) हुआ, जिससे खाद्यान्न उत्पादन में भारी वृद्धि हुई और भारतीय किसानों को वैश्विक बाजार का सीधा आर्थिक लाभ मिलने के कारण उनकी आर्थिक स्थिति अत्यंत सुदृढ़ हो गई। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → 1857 के महान विद्रोह के दौरान दिल्ली में विद्रोहियों द्वारा मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर को भारत का सम्राट घोषित किए जाने और उनके नेतृत्व की वास्तविक राजनीतिक तथा सैन्य वास्तविकताओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. बहादुर शाह जफर ने स्वेच्छा से और अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षा के तहत इस विद्रोह की संपूर्ण सैन्य कमान और सर्वोच्च राजनीतिक नेतृत्व अपने हाथों में लिया था, तथा वे अंग्रेजों के खिलाफ सक्रिय रूप से युद्ध रणनीतियों की योजना बनाते थे। 2. यद्यपि बहादुर शाह जफर को प्रतीकात्मक और औपचारिक रूप से विद्रोहियों द्वारा 'शहनशाह-ए-हिंदुस्तान' घोषित किया गया था, किंतु वास्तविक सत्ता का नियंत्रण दिल्ली में गठित 'कोर्ट ऑफ सोल्जर्स' (सैनिकों की अदालत) के पास था, जिसमें विद्रोही सिपाहियों के प्रतिनिधि शामिल थे। 3. दिल्ली में विद्रोहियों के पास न तो सुसंगत आर्थिक संसाधन थे और न ही कुशल सैन्य समन्वय, जिसके कारण जनरल जॉन निकलसन के नेतृत्व में ब्रिटिश सेना द्वारा दिल्ली की पुनः घेराबंदी और आक्रमण के पश्चात जफर को हुमायूं के मकबरे से गिरफ्तार कर लिया गया था। 4. दिल्ली पर अंग्रेजों के अधिकार के बाद बहादुर शाह जफर पर मुकदमा चलाया गया और उन्हें निर्वासित कर रंगून भेज दिया गया, जहाँ उनकी मृत्यु हो गई, जिससे भारत में औपचारिक रूप से मुगल राजवंश का अंत हो गया। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई और तात्या टोपे के संयुक्त सैन्य अभियानों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. मार्च 1858 में ब्रिटिश जनरल ह्यूरोज द्वारा झाँसी के किले को घेर लिए जाने के बाद, रानी लक्ष्मीबाई ने कालपी की ओर प्रस्थान किया जहाँ तात्या टोपे की सेना ने आकर उनसे संपर्क किया और दोनों ने मिलकर ग्वालियर के सिंधिया शासक को चुनौती दी। 2. ग्वालियर के पतन के पश्चात तात्या टोपे ने मध्य भारत और राजस्थान के जंगलों में ब्रिटिश सेना के विरुद्ध लंबे समय तक छापामार (गुएरिला) युद्ध जारी रखा, और उन्हें नरवर के एक स्थानीय जागीरदार मानसिंह के साथ हुए विश्वासघात के कारण अंग्रेजों द्वारा पकड़ा गया था। 3. ग्वालियर के युद्ध में अंग्रेजों से संघर्ष करते हुए वीरगति को प्राप्त होने वाली रानी लक्ष्मीबाई की वीरता से प्रभावित होकर जनरल ह्यूरोज ने स्वयं यह टिप्पणी की थी कि 'विद्रोही नेताओं में रानी लक्ष्मीबाई एकमात्र ऐसी महिला है जो सर्वोत्तम और सबसे बहादुर है'। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → वर्ष 1857 के महान विद्रोह की प्रकृति और उसके वैचारिक स्वरूप के संबंध में विभिन्न इतिहासकारों और विचारकों के निम्नलिखित मतों/कथनों पर विचार कीजिए: 1. सर जॉन सीले (Sir John Seeley) ने वर्ष 1857 के विद्रोह को 'पूरी तरह से देशभक्तिहीन और स्वार्थी सिपाही विद्रोह' करार दिया था, जिसका मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय स्वतंत्रता प्राप्त करना नहीं था। 2. डॉ. ई. डब्लू.आर. रीस (E.W.R. Rees) के अनुसार यह विद्रोह 'धर्मांधों का ईसाइयों के विरुद्ध एक धर्मयुद्ध' (A war of fanaticism against Christians) था। 3. वी.डी. सावरकर ने अपनी प्रसिद्ध कृति में इस घटना को 'प्रथम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम' के रूप में चित्रित किया, जबकि अशोक मेहता ने इसे 'राष्ट्रीय विद्रोह' की संज्ञा दी। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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