BaalVikas
Menu

त्वरित लिंक्स

Geography
3 views

भारत में पाई जाने वाली 'लैटरलाइट मृदा' (Laterite Soil) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. इस मृदा का निर्माण उच्च तापमान और अत्यधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में तीव्र 'निक्षालन' (Leaching) की प्रक्रिया के परिणामस्वरूप होता है।
  2. 2. इस मिट्टी में ह्यूमस की मात्रा पर्याप्त होती है, जिससे यह धान की खेती के लिए अत्यधिक उपजाऊ होती है।
  3. 3. यह मृदा मुख्य रूप से पश्चिमी घाट, पूर्वी घाट, और असम के पहाड़ी क्षेत्रों में पाई जाती है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?

Detailed Explanation

लैटरलाइट मृदा का विकास उच्च तापमान और भारी वर्षा वाले उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में होता है जहाँ रुक-रुक कर वर्षा होती है। अत्यधिक वर्षा के कारण मिट्टी के पोषक तत्व पानी के साथ घुलकर नीचे चले जाते हैं, जिसे 'निक्षालन' (Leaching) कहते हैं। इस प्रक्रिया में सिलिका का निक्षालन हो जाता है और आयरन तथा एल्युमिनियम के ऑक्साइड शेष रह जाते हैं। उच्च तापमान के कारण जीवाणु तेजी से ह्यूमस को नष्ट कर देते हैं, इसलिए इस मृदा में ह्यूमस की मात्रा बहुत कम होती है (अतः कथन 2 गलत है)। यह मृदा काजू, चाय, और कॉफी जैसी फसलों के लिए उपयुक्त होती है, न कि धान के लिए। यह मुख्य रूप से पश्चिमी घाट के शिखरों, पूर्वी घाट, राजमहल पहाड़ियों, केरल, कर्नाटक, और असम के क्षेत्रों में पाई जाती है (अतः कथन 1 और 3 सही हैं)।
Share:
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.