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स्वतंत्र भारत में प्रशासनिक प्रशिक्षण और लोक सेवा संस्कृति के विकास के संदर्भ में, वर्ष 1959 में मसूरी में स्थापित 'राष्ट्रीय प्रशासनिक अकादमी' (वर्तमान में लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी - LBSNAA) के पूर्व इतिहास और इसकी स्थापना से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. इस अकादमी की स्थापना से पहले, स्वतंत्र भारत के शुरुआती प्रशासनिक अधिकारियों (ICS और IAS) के लिए प्रशिक्षण संस्थान वर्ष 1947 में 'मेटकाफ हाउस, नई दिल्ली' में 'भारतीय प्रशासनिक सेवा प्रशिक्षण स्कूल' (IAS Training School) के रूप में शुरू किया गया था।
- 2. वर्ष 1959 में मसूरी (उत्तर प्रदेश) के 'चार्लेविल होटल' (Charleville Hotel) को अधिग्रहित करके इस संस्थान को वहाँ स्थानांतरित किया गया था और इसका नाम बदलकर 'राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी' कर दिया गया था।
उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: स्वतंत्र भारत में भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों को प्रशिक्षित करने के लिए सबसे पहले 1947 में दिल्ली के मेटकाफ हाउस में 'IAS Training School' की स्थापना की गई थी। इसके अलावा, केंद्रीय सेवाओं के अधिकारियों के लिए 'IAS Staff College' शिमला में स्थापित किया गया था। कथन 2 सही है: वर्ष 1959 में, दिल्ली के IAS Training School और शिमला के IAS Staff College का विलय कर दिया गया और इसे मसूरी के ऐतिहासिक 'चार्लेविल होटल' (Charleville Hotel) परिसर में स्थानांतरित कर दिया गया, जिसका नाम 'राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी' रखा गया। बाद में इसका नाम बदलकर प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के नाम पर रख दिया गया। अतः दोनों कथन सत्य हैं।
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग IX-ख' (सहकारी समितियाँ - अनुच्छेद 243-ZH से 243-ZT) तथा 97वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2011 के प्रावधानों के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 97वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2011 के माध्यम से सहकारी समितियों का गठन करना एक मौलिक अधिकार (अनुच्छेद 19 के तहत 'संगम या संघ या सहकारी समितियाँ बनाने का अधिकार') बना दिया गया, तथा संविधान में एक नया नीति निर्देशक तत्व (अनुच्छेद 43-B) जोड़कर राज्यों को सहकारी समितियों के स्वैच्छिक गठन, स्वायत्त कामकाज और लोकतांत्रिक नियंत्रण को बढ़ावा देने का निर्देश दिया गया।
2. इस संशोधन द्वारा सहकारी समितियों के बोर्ड के सदस्यों की अधिकतम संख्या 21 तय की गई, तथा बोर्ड के निर्वाचन में अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और महिलाओं के लिए सीटों के आरक्षण की अनिवार्यता का प्रावधान किया गया, जिसमें बोर्ड में कम से कम एक सीट एससी/एसटी के लिए और दो सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी।
3. सहकारी समितियों के निदेशकों का कार्यकाल उनके निर्वाचन की तिथि से अधिकतम 5 वर्ष होगा, और यदि किसी सहकारी समिति के बोर्ड को राज्य सरकार द्वारा विघटित (Supersede) किया जाता है, तो विघटन की तिथि से अधिकतम 6 महीने के भीतर नए बोर्ड के गठन के लिए चुनाव कराना अनिवार्य है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 263' के अंतर्गत 'अंतर-राज्य परिषद' (Inter-State Council) के गठन, शक्तियों और उसके कामकाज के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राष्ट्रपति को यह शक्ति प्राप्त है कि यदि किसी समय उसे यह प्रतीत होता है कि एक अंतर-राज्य परिषद की स्थापना से लोक हितों की प्राप्ति होगी, तो वह इस परिषद की स्थापना कर सकता है और इसके गठन, कर्तव्यों तथा प्रक्रिया को परिभाषित कर सकता है।
2. सरकारी आयोग (Sarkaria Commission) की संस्तुतियों के आधार पर वर्ष 1990 में पहली बार राष्ट्रपति के आदेश द्वारा अंतर-राज्य परिषद का गठन किया गया था, और प्रधानमंत्री इस परिषद के पदेन अध्यक्ष (Ex-officio Chairman) होते हैं।
3. अंतर-राज्य परिषद एक स्थायी संवैधानिक निकाय (Permanent Constitutional Body) है जिसकी बैठकें संविधान के प्रावधानों के तहत वर्ष में अनिवार्य रूप से तीन बार आयोजित की जानी चाहिए, और इसके द्वारा लिए गए सभी निर्णय राज्यों के लिए बाध्यकारी (Binding) होते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 32' के अंतर्गत प्रदत्त 'संवैधानिक उपचारों के अधिकार' (Right to Constitutional Remedies) और रिट अधिकारक्षेत्र (Writ Jurisdiction) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत केवल मूल अधिकारों के प्रवर्तन के लिए ही उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाया जा सकता है, और डॉ. बी.आर. अंबेडकर ने इसी अनुच्छेद को 'संविधान का हृदय और आत्मा' (Heart and Soul of the Constitution) कहा था।
2. 'बंदी प्रत्यक्षीकरण' (Habeas Corpus) रिट का शाब्दिक अर्थ 'कोशिश करना या प्रस्तुत करना' है, जिसे केवल सार्वजनिक प्राधिकरण (Public Authority) के विरुद्ध जारी किया जा सकता है, और यह निजी व्यक्तियों (Private Individuals) के अवैध निरोध के खिलाफ कभी भी जारी नहीं की जा सकती है।
3. 'उत्प्रेषण' (Certiorari) और 'प्रतिषेध' (Prohibition) दोनों ही रिटें न्याययिक और अर्द्ध-न्यायिक प्राधिकरणों के विरुद्ध जारी की जाती हैं, जहाँ प्रतिषेध मुख्य रूप से एक निवारक (Preventive) उपाय है जो निचली अदालत को अपनी अधिकारिता से बाहर जाने से रोकता है, जबकि उत्प्रेषण निवारक के साथ-साथ उपचारात्मक (Curative) दोनों प्रकृति की होती है जो लंबित मामले के निर्णय को रद्द करने के लिए जारी की जाती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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किस राज्य सरकार ने 2026–2036 के लिए Deep Sea Fishing Mission को मंजूरी दी है?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग V' (संघ - अनुच्छेद 52 से 151) के अंतर्गत 'भारत के महान्यायवादी' (Attorney General for India - AG) से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 76 के अनुसार, भारत के महान्यायवादी की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है, और वह व्यक्ति इस पद पर नियुक्त होने के लिए अर्ह होगा जो उच्चतम न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्त होने के लिए योग्य हो, अथवा राष्ट्रपति की दृष्टि में एक प्रख्यात विधिवेत्ता हो।
2. महान्यायवादी को भारत के सभी न्यायालयों में सुनवाई का अधिकार प्राप्त है, तथा संसद के दोनों सदनों या उनकी संयुक्त बैठकों में बोलने और भाग लेने का अधिकार भी है, किंतु उसे संसद में किसी भी प्रश्न पर मतदान करने का अधिकार प्राप्त नहीं होता है।
3. महान्यायवादी भारत सरकार का मुख्य कानूनी सलाहकार होता है, और वह एक पूर्णकालिक (Full-time) सरकारी कर्मचारी होता है, जिसके लिए यह सांविधिक रूप से अनिवार्य किया गया है कि वह अपने कार्यकाल के दौरान किसी भी निजी मुकदमे या प्रैक्टिस में वकालत नहीं कर सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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