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MPTET
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राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा (NCF) 2005 के अनुसार, विज्ञान शिक्षा के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सबसे अधिक उपयुक्त है?

Detailed Explanation

NCF 2005 के अनुसार, विज्ञान शिक्षा का उद्देश्य शिक्षार्थियों को ऐसी प्रक्रियाओं से जोड़ना है जो उन्हें ज्ञान का सृजन करने, पूछताछ करने और तार्किक रूप से सोचने में सक्षम बनाती हैं। विज्ञान केवल तथ्यों का संकलन नहीं है, बल्कि यह अवलोकन, प्रयोग और निरंतर जाँच-पड़ताल की एक गतिशील प्रक्रिया है।
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, जॉन डीवी (John Dewey) के 'प्रगतिशील शिक्षा और अनुभवात्मक अधिगम सिद्धांत' (Progressive Education and Experiential Learning Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण शैक्षणिक अवधारणा—**'करके सीखना' (Learning by Doing)** और **'चिंतनशील चिंतन' (Reflective Thinking)**—जिसके तहत शिक्षा को केवल भविष्य के जीवन की तैयारी न मानकर स्वयं जीवन का एक वर्तमान अनुभव माना जाता है, तथा शिक्षार्थी अपनी सक्रिय सहभागिता, वास्तविक जीवन की समस्याओं के अन्वेषण और वैज्ञानिक पद्धति के माध्यम से ज्ञान का निर्माण करते हैं—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के लोकतांत्रिक मूल्यों के विकास, आलोचनात्मक समस्या-समाधान और अनुभवात्मक ज्ञान के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है? मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, लेव वाइगोत्स्की (Lev Vygotsky) के 'सामाजिक-सांस्कृतिक सिद्धांत' (Socio-Cultural Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—**'समीपस्थ विकास का क्षेत्र या जेडपीडी' (Zone of Proximal Development - ZPD)**—जिसे उस वास्तविक विकासात्मक स्तर (जो स्वतंत्र समस्या-समाधान द्वारा निर्धारित होता है) और संभावित विकासात्मक स्तर (जो वयस्क मार्गदर्शन या अधिक सक्षम साथी यानी MKO के सहयोग से प्राप्त किया जाता है) के बीच के अंतर के रूप में परिभाषित किया जाता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के संज्ञानात्मक विस्तार, मचान निर्माण (Scaffolding) और अंतःक्रियात्मक शिक्षण के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है? मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, कार्ल रोजर्स (Carl Rogers) के 'मानवतावादी अधिगम सिद्धांत' (Humanistic Learning Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित 'अर्थपूर्ण अनुभवात्मक अधिगम' (Experiential Learning) की अवधारणा—जिसके तहत शिक्षार्थी की व्यक्तिगत जिज्ञासा, स्वतंत्रता और उसकी अपनी समस्याओं को हल करने की प्रक्रिया को सर्वोपरि माना जाता है, जहाँ शिक्षक एक 'सुविधाप्रदाता' (Facilitator) की भूमिका निभाता है और अधिगम तब वास्तविक होता है जब छात्र विषय-वस्तु को अपने स्व (Self) और जीवन के अनुभवों से जोड़ता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के आंतरिक अभिप्रेरण, स्व-निर्देशित अध्ययन और संवेगात्मक विकास के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है? मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, अल्बर्ट बंडूरा (Albert Bandura) के 'सामाजिक अधिगम सिद्धांत' (Social Learning Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित 'आत्म-प्रभावकारिता' (Self-Efficacy) की अवधारणा—जिसके तहत किसी विशिष्ट कार्य को सफलतापूर्वक निष्पादित करने की अपनी क्षमता के बारे में व्यक्ति का व्यक्तिगत विश्वास और मूल्यांकन शामिल होता है, जो उसके प्रेरणा स्तर, लक्ष्य निर्धारण और चुनौतियों के सामने टिके रहने के दृढ़ संकल्प को प्रत्यक्ष रूप से नियंत्रित करता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के स्वायत्त ज्ञानार्जन, आंतरिक अभिप्रेरणा और संज्ञानात्मक पुनर्बलन के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है? मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, जेरोम ब्रूनर (Jerome Bruner) के 'संज्ञानात्मक विकास और खोजपूर्ण अधिगम सिद्धांत' (Discovery Learning Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित प्रतिनिधित्व के तीन रूपों में से एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय स्तर—**'प्रतीकात्मक प्रतिनिधित्व' (Symbolic Representation)**—जिसे भौतिक वस्तुओं या दृश्य छवियों के स्थान पर भाषा, प्रतीकों, और अमूर्त संकेतों (जैसे गणितीय चिह्न, वर्णमाला और वैचारिक सूत्र) के माध्यम से ज्ञान को मानसिक रूप से कोडित करने, संचित करने और संचालित करने की क्षमता के रूप में परिभाषित किया जाता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के अमूर्त चिंतन (Abstract Thinking), उच्च-स्तरीय संज्ञानात्मक प्रसंस्करण और तार्किक प्रतीकात्मक संवाद के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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