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पर्यावरण और पारिस्थितिकी के संदर्भ में 'जैविक समावेशन' या 'माइकोरेमीडिएशन' (Mycoremediation) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. माइकोरेमीडिएशन एक ऐसी तकनीक है जिसमें कवक (Fungi) का उपयोग पर्यावरण से प्रदूषकों (जैसे हाइड्रोकार्बन, भारी धातुएँ और सिंथेटिक डाई) को हटाने या उन्हें कम करने के लिए किया जाता है।
  2. 2. कवक अपने कवकजाल (Mycelium) के माध्यम से एंजाइमों का स्राव करते हैं जो जटिल कार्बनिक प्रदूषकों के रासायनिक बंधों को तोड़कर उन्हें कम जहरीले रूपों में बदल देते हैं।
  3. 3. यह तकनीक केवल स्थलीय मृदा प्रदूषण को ठीक करने तक ही सीमित है, इसका उपयोग जल स्रोतों या अपशिष्ट जल के उपचार (Wastewater Treatment) में बिल्कुल नहीं किया जा सकता है।

उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है: माइकोरेमीडिएशन (Mycoremediation) जैव-उपचार (Bioremediation) की एक विशेष शाखा है जिसमें पर्यावरण के प्रदूषकों को विघटित करने या निष्प्रभावी करने के लिए कवक (Fungi) का उपयोग किया जाता है। कथन 2 सही है: कवक अपने कवकजाल (Mycelium) और उससे स्रावित होने वाले विशिष्ट बाह्यकोशिकीय एंजाइमों (जैसे लिग्निन पेरोक्सीडेस) के माध्यम से प्लास्टिक, पेट्रोलियम हाइड्रोकार्बन और भारी धातुओं जैसे जटिल प्रदूषकों को तोड़ देते हैं। कथन 3 गलत है: माइकोरेमीडिएशन केवल मृदा तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उपयोग जलीय पारिस्थितिकी तंत्र, दूषित जल स्रोतों और औद्योगिक अपशिष्ट जल के उपचार में भी सफलतापूर्वक किया जाता है।
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