त्वरित लिंक्स
General Science
3 views
मानव शरीर में 'हृदय चक्र' (Cardiac Cycle) के दौरान 'वेंट्रिकुलर सिस्टोल' (Ventricular Systole) की प्रारंभिक अवस्था में 'आसोवोल्यूमेट्रिक संकुचन' (Isovolumetric Contraction) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. इस छोटी सी अवधि में निलय (Ventricles) का दबाव तेजी से बढ़ता है, जिससे एट्रियोवेंट्रिकुलर (AV) वाल्व और अर्धचंद्राकार (Semilunar) वाल्व दोनों एक साथ बंद हो जाते हैं।
- 2. इस प्रावस्था के दौरान निलय के भीतर रक्त का आयतन स्थिर रहता है क्योंकि सभी वाल्व बंद होते हैं और किसी भी कक्ष से रक्त का प्रवेश या निकास नहीं होता है।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
मानव हृदय चक्र में 'आसोवोल्यूमेट्रिक संकुचन' (Isovolumetric Contraction) वह चरण है जो निलय के संकुचन (Ventricular Systole) की शुरुआत में होता है। 1. जैसे ही निलय में संकुचन शुरू होता है, निलय का दबाव आलिंद (Atria) के दबाव से अधिक हो जाता है, जिससे रक्त को पीछे लौटने से रोकने के लिए द्विवलनी (Mitral) और त्रिवलनी (Tricuspid) वाल्व बंद हो जाते हैं (जिससे 'पहला हृदय ध्वनि' या 'Lub' उत्पन्न होती है)। इस समय अर्धचंद्राकार वाल्व (Aortic and Pulmonary valves) भी बंद रहते हैं क्योंकि महाधमनी और फुफ्फुसीय धमनी का दबाव अभी निलय से अधिक होता है। 2. चूंकि इस समय सभी चारों वाल्व बंद होते हैं, इसलिए निलय के भीतर रक्त का आयतन पूरी तरह से अपरिवर्तित (Constant) रहता है (इसलिए इसे 'आसोवोल्यूमेट्रिक' या समआयतनिक संकुचन कहा जाता है)। अतः दोनों कथन पूरी तरह सही हैं।
Related Questions
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.