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UPTET
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उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'सृजनात्मकता' (Creativity) के संदर्भ में, मनोवैज्ञानिक जे.पी. गिलफोर्ड (J.P. Guilford) द्वारा प्रतिपादित 'बुद्धि की संरचना' (Structure of Intellect - SOI) मॉडल और सृजनात्मक चिंतन के विश्लेषण के अंतर्गत, 'अपसारी चिंतन' (Divergent Thinking) की प्रक्रिया में निम्नलिखित में से किस मुख्य बौद्धिक आयाम या योग्यता को सबसे अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है?

Detailed Explanation

उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के दृष्टिकोण से सृजनात्मकता (Creativity) और गिलफोर्ड के मॉडल में 'अपसारी चिंतन' (Divergent Thinking) वह प्रक्रिया है जिसमें किसी समस्या के समाधान के लिए अनेक संभावित और नए रास्ते खोजे जाते हैं। इसके मुख्य चार प्रमुख घटक या आयाम गिलफोर्ड द्वारा बताए गए हैं: प्रवाह (Fluency - विचारों या उत्तरों की मात्रा), लचीलापन (Flexibility - विचारों में विविधता या दृष्टिकोण बदलना), मौलिकता (Originality - अनोखे या दुर्लभ विचार) और विस्तारण (Elaboration - विचारों को विस्तार देना)। अतः विकल्प (a) सही है।
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→ उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'अधिगम की शैलियां (Learning Styles)' के न्यूरो-संज्ञानात्मक संदर्भ में, डेविड कोब (David Kolb) द्वारा प्रतिपादित 'अनुभवात्मक अधिगम चक्र' (Experiential Learning Cycle: ठोस अनुभव, चिंतनशील अवलोकन, अमूर्त अवधारणा और सक्रिय प्रयोग) के न्यूरो-बायोलॉजिकल स्वरूप तथा मस्तिष्क के 'संवेदी कॉर्टेक्स' (Sensory Cortex), 'पोस्टीरियर पिरिएटल कॉर्टेक्स' (Posterior Parietal Cortex), और 'प्र्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स' (Prefrontal Cortex) के बीच सूचना एकीकरण, संज्ञानात्मक लचीलेपन, और योजना-आधारित मोटर निष्पादन की सक्रियण गतिकी, तथा नील फ्लेming (Neil Fleming) के 'VARK मॉडल' (Visual, Auditory, Reading/Writing, Kinesthetic) के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक प्राथमिक समावेशी कक्षा-कक्ष शिक्षण, 'न्यूरो-स्टाईल ऑप्टिमाइज्ड पेडागोजी' (Neuro-Style Optimized Pedagogy) और विद्यार्थियों में बहुसंवेदी प्रसंस्करण (Multi-sensory Processing), वैयक्तिकृत अधिगम रणनीतियों व समग्र संज्ञानात्मक दक्षता के संवर्धन में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है? → उत्तर प्रदेश के भौगोलिक एवं पर्यावरणीय परिदृश्य के अंतर्गत 'तराई एवं भाबर' क्षेत्रों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. 'भाबर' क्षेत्र शिवालिक पहाड़ियों के ठीक नीचे सिंधु से तीस्ता नदी तक फैला हुआ एक संकीर्ण बेल्ट है, जहाँ नदियाँ भारी मात्रा में कंकड़, पत्थर और बोल्डर जमा करती हैं, जिसके कारण अधिकांश छोटी नदियाँ इस पारगम्य (Permeable) धरातल में विलुप्त हो जाती हैं और भूमिगत बहती हैं। 2. 'तराई' क्षेत्र भाबर के ठीक दक्षिण में स्थित एक नम, दलदली और अधिक उपजाऊ क्षेत्र है, जहाँ भाबर क्षेत्र में विलुप्त हुई नदियाँ पुनः धरातल पर प्रकट होती हैं, और यह क्षेत्र प्रचुर वर्षा तथा घने वनों के कारण गन्ने, धान और जूट की कृषि के लिए अत्यधिक उपयुक्त माना जाता है। 3. उत्तर प्रदेश के संदर्भ में, तराई बेल्ट में पीलीभीत, लखीमपुर खीरी, बहराइच और सिद्धार्थनगर जैसे जिले शामिल हैं, जहाँ हाल के दशकों में कृषि के अत्यधिक विस्तार के कारण प्राकृतिक साल के वनों का तेजी से संकुचन हुआ है। उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/से हैं? → उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'हावर्ड गार्डनर के बहुबुद्धि सिद्धांत' (Multiple Intelligences Theory) के न्यूरो-संज्ञानात्मक संदर्भ में, गार्डनर द्वारा प्रतिपादित 'प्रकृतिवादी बुद्धि' (Naturalistic Intelligence: प्राकृतिक पैटर्न, जीव-जंतुओं और वनस्पतियों का वर्गीकरण और पर्यावरणीय संवेदनशीलता) के न्यूरो-बायोलॉजिकल स्वरूप तथा मस्तिष्क के 'पैरिएटल लोब के विजुअल-स्पेशियल प्रोसेसिंग क्षेत्र' (Parietal Lobe - पर्यावरणीय दृश्यों और स्थानिक पैटर्न का विश्लेषण), 'इंसुला और प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स' (Insula & Prefrontal Cortex - पर्यावरणीय संवेदनाओं, वर्गीकरण और संज्ञानात्मक निर्णय), और 'टेंपोरल लोब के मेमोराइजेशन सर्किट' (Temporal Lobe - जैविक और प्राकृतिक डेटा का दीर्घकालिक भंडारण) के बीच विजुअल-स्पेशियल इंटीग्रेशन, सिनेप्टिक प्लास्टिसिटी, और पारिस्थितिक तंत्रिका नेटवर्क (Ecological Neural Networks) की सक्रियण गतिकी, तथा डेनियल गोलमैन के 'संवेगात्मक बुद्धि' (Emotional Intelligence) के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक प्राथमिक समावेशी कक्षा-कक्ष शिक्षण, 'न्यूरो-नेचुरलिस्टिक ऑप्टिमाइज्ड पेडागोजी' (Neuro-Naturalistic Optimized Pedagogy) और विद्यार्थियों में पर्यावरणीय जागरूकता, पैटर्न पहचान व समग्र संवेगात्मक-संज्ञानात्मक दक्षता के संवर्धन में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है? → उत्तर प्रदेश के लोक नृत्यों और सांस्कृतिक परंपराओं के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा युग्म (नृत्य शैली और उससे संबंधित क्षेत्र/समुदाय) सुमेलित नहीं है? → जीन पियाजे (Jean Piaget) के 'संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत' (Theory of Cognitive Development) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. 'पूर्व-संक्रियात्मक अवस्था' (Pre-operational Stage - लगभग 2 से 7 वर्ष) के दौरान बालकों में 'संरक्षण' (Conservation) की क्षमता का पूर्ण विकास हो जाता है, जिससे वे यह समझ पाते हैं कि किसी वस्तु के आकार या रूप बदलने पर उसकी मात्रा या द्रव्यमान अपरिवर्तित रहता है। 2. 'मूर्त संक्रियात्मक अवस्था' (Concrete Operational Stage - लगभग 7 से 11 वर्ष) में बालक वस्तुओं को उनके गुणों के आधार पर आरोही या अवरोही क्रम में व्यवस्थित करने की क्षमता यानी 'क्रमबद्धता' (Seriation) और 'वर्गीकरण' (Classification) सीख जाता है। 3. 'औपचारिक संक्रियात्मक अवस्था' (Formal Operational Stage - 11 वर्ष से आगे) की एक प्रमुख विशेषता 'परिकल्पित-निगमनात्मक तर्क' (Hypothetico-deductive Reasoning) का विकास है, जिसमें किशोर अमूर्त विचारों और वैज्ञानिक रूप से समस्याओं के समाधान की कल्पना करने में सक्षम हो जाते हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/से हैं?
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