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UPTET
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उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'अधिगम अक्षमता' (Learning Disabilities) के संदर्भ में, चिकित्सा और मनोवैज्ञानिक निदान में प्रयुक्त होने वाली शब्दावली 'डिस्प्रैक्सिया' (Dyspraxia) का संबंध मुख्य रूप से निम्नलिखित में से किस प्रकार के मनोवैज्ञानिक एवं शारीरिक विकार से है?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
डिस्प्रैक्सिया (Dyspraxia), जिसे विकासात्मक समन्वय विकार (Developmental Coordination Disorder - DCD) भी कहा जाता है, एक न्यूरोलॉजिकल स्थिति है जो मस्तिष्क से मांसपेशियों तक जाने वाले संकेतों को प्रभावित करती है। इसके परिणामस्वरूप व्यक्ति को शारीरिक समन्वय (coordination), संतुलन, और सूक्ष्म मोटर कौशल (जैसे जूते के फीते बांधना, लिखना, बटन लगाना) तथा सकल मोटर कौशल (दौड़ना, कूदना) में कठिनाई होती है। विकल्प (a) 'डिस्कैल्कुलिया' (Dyscalculia), विकल्प (c) 'डिस्लेक्सिया' (Dyslexia), और विकल्प (d) भाषा विकार (Language/Communication Disorder) से संबंधित हैं। अत: विकल्प (b) सही है।
Related Questions
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उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'क्रियाप्रसूत अनुबंध सिद्धांत' (Operant Conditioning Theory) के संदर्भ में, अमेरिकी मनोवैज्ञानिक बी. एफ. स्किनर (B. F. Skinner) द्वारा प्रतिपादित इस सिद्धांत के अंतर्गत 'पुनर्बलन अनुसूचियाँ' (Schedules of Reinforcement) में से 'आंशिक या अंतरावल पुनर्बलन अनुसूची' (Intermittent or Partial Reinforcement Schedule)—विशेषकर 'परिवर्ती अनुपात अनुसूची' (Variable Ratio Schedule)—के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा वैज्ञानिक कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?
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जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत (Theory of Cognitive Development) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. पियाजे के अनुसार, पूर्व संक्रियात्मक अवस्था (Pre-operational Stage - लगभग 2 से 7 वर्ष) के दौरान बच्चों में 'संरक्षण' (Conservation) की क्षमता पूरी तरह विकसित हो जाती है, जिससे वे यह समझ जाते हैं कि किसी वस्तु के आकार या रूप बदलने पर उसका द्रव्यमान या आयतन अपरिवर्तित रहता है।
2. मूर्त संक्रियात्मक अवस्था (Concrete Operational Stage - लगभग 7 से 11 वर्ष) में बालक विकेंद्रीकरण (Decentration) की योग्यता अर्जित कर लेता है और वस्तुओं के वर्गीकरण तथा श्रेणीबद्धता (Seriation) जैसे तार्किक संक्रियाओं को भली-भांति समझने लगता है।
3. औपचारिक संक्रियात्मक अवस्था (Formal Operational Stage - लगभग 11 वर्ष और उससे आगे) में किशोरों के भीतर अमूर्त चिंतन (Abstract Thinking) और परिकल्पनात्मक-निगमनात्मक तर्क (Hypothetico-deductive reasoning) की क्षमता का पूर्ण विकास होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
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उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत' के न्यूरो-संज्ञानात्मक संदर्भ में, 'मूर्त संक्रियात्मक अवस्था' (Concrete Operational Stage) के अंतर्गत 'संरक्षण' (Conservation), 'वर्गीकरण' (Classification), और 'क्रमबद्धता' (Seriation) के न्यूरो-बायोलॉजिकल स्वरूप तथा मस्तिष्क के 'पैरिएटल लोब' (Parietal Lobe), 'डॉर्सोलैटरल प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स' (Dorsolateral Prefrontal Cortex) और 'हिप्पोकैम्पस' के बीच स्थानिक तर्क, मानसिक संचालन (Mental Operations) और तार्किक प्रतिवर्तीता (Reversibility) की सक्रियण गतिकी, तथा बारबरा रोगाफ (Barbara Rogoff) द्वारा प्रतिपादित 'निर्देशित सहभागिता' (Guided Participation) और सांस्कृतिक संदर्भीकरण के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक प्राथमिक समावेशी कक्षा-कक्ष शिक्षण, अनुभवात्मक और गतिविधि-आधारित शिक्षाशास्त्र (Activity-based Pedagogy) और विद्यार्थियों में मूर्त से अमूर्त तार्किकता, समस्या-समाधान क्षमता व समग्र संज्ञानात्मक लचीलेपन के संवर्धन में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?
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उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'व्यक्तित्व मापन' (Personality Assessment) के संदर्भ में, मनोवैज्ञानिक हरमन रोर्शाक (Hermann Rorschach) द्वारा 1921 में विकसित 'रोर्शाक स्याही धब्बा परीक्षण' (Rorschach Inkblot Test) के मूल्यांकन के दौरान, किसी परीक्षार्थी द्वारा कार्ड्स पर बने आकृतियों में 'पूरे धब्बे' के बजाय 'छोटे विशिष्ट भागों' (Small Details) या सूक्ष्म तत्वों पर अत्यधिक ध्यान केंद्रित करने की प्रवृत्ति मनोवैज्ञानिक रूप से निम्नलिखित में से किस मुख्य विशेषता या संकेतक को दर्शाती है?
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लॉरेंस कोहलबर्ग (Lawrence Kohlberg) के नैतिक विकास के सिद्धांत (Moral Development Theory) के संदर्भ में, 'उत्तर-रूढ़िगत नैतिकता' (Post-Conventional Morality) के अंतर्गत आने वाले दोनों चरणों (सामाजिक अनुबंध अभिविन्यास और सार्वभौमिक नैतिक सिद्धांत अभिविन्यास) की निम्नलिखित प्रमुख विशेषताओं पर विचार कीजिए:
1. सामाजिक अनुबंध अभिविन्यास (Social Contract Orientation) के चरण में व्यक्ति यह मानता है कि नियम और कानून समाज के कल्याण के लिए एक 'सामाजिक समझौते' के रूप में बनाए गए हैं, इसलिए यदि कोई कानून समाज के अधिकांश लोगों के अधिकारों या हितों की रक्षा करने में असफल रहता है, तो उसमें लोकतांत्रिक तरीके से बदलाव किया जाना चाहिए।
2. सार्वभौमिक नैतिक सिद्धांत अभिविन्यास (Universal Ethical Principles Orientation) के चरण में व्यक्ति बाहरी नियमों, कानूनों या सामाजिक दबावों से परे जाकर अपने अंतःकरण (Conscience) के स्व-चयनित नैतिक सिद्धांतों के आधार पर निर्णय लेता है, भले ही वे नियम न्याय, मानवाधिकार और समानता के नाम पर कानून के विरुद्ध ही क्यों न हों।
3. इस उच्चतर स्तर पर पहुँचने वाले बालक या वयस्क का मुख्य नैतिक दृष्टिकोण पूरी तरह से 'कानून और व्यवस्था बनाए रखने' तथा 'समाज द्वारा स्वीकृति प्राप्त करने' पर केंद्रित होता है, ताकि वह समाज में एक 'अच्छा लड़का या अच्छी लड़की' की छवि बना सके।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/से हैं?
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