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UPTET
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उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'अधिगम के आधुनिक रचनावादी और सूचना प्रक्रमण सिद्धांतों' के संदर्भ में, डेविड औसुबेल (David Ausubel) द्वारा प्रतिपादित 'सार्थक मौखिक अधिगम सिद्धांत' (Meaningful Verbal Learning Theory) के अंतर्गत 'अग्रिम संगठन' (Advance Organizers - नए ज्ञान से पहले प्रदान की जाने वाली वैचारिक रूपरेखा) के न्यूरो-संज्ञानात्मक स्वरूप, तथा रिचर्ड मयेर (Richard Mayer) द्वारा प्रतिपादित 'मल्टीमीडिया अधिगम के संज्ञानात्मक सिद्धांत' (Cognitive Theory of Multimedia Learning) के अंतर्गत 'द्वैत चैनल परिकल्पना' (Dual-Channel Assumption - श्रवण और दृश्य चैनलों का पृथक उपयोग) और 'संज्ञानात्मक भार सिद्धांत' (Cognitive Load Theory) के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक प्राथमिक समावेशी कक्षा-कक्ष शिक्षण, दृश्य-श्रव्य अनुदेशन (Audio-Visual Instruction) और विद्यार्थियों में सार्थक व दीर्घकालिक ज्ञान के निर्माण के संवर्धन में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
डेविड औसुबेल का 'सार्थक मौखिक अधिगम सिद्धांत' और 'अग्रिम संगठन' (Advance Organizers) इस बात पर जोर देते हैं कि नया ज्ञान तभी सार्थक होता है जब इसे शिक्षार्थी की मौजूदा संज्ञानात्मक संरचना (Cognitive Structure) से जोड़ा जाए। दूसरी ओर, रिचर्ड मयेर का 'मल्टीमीडिया अधिगम का संज्ञानात्मक सिद्धांत' और 'द्वैत चैनल परिकल्पना' यह स्पष्ट करती है कि मानव मस्तिष्क में दृश्य और श्रवण सूचनाओं के प्रसंस्करण के लिए अलग-अलग चैनल होते हैं। जब इनका समुचित उपयोग किया जाता है, तो संज्ञानात्मक भार (Cognitive Load) नियंत्रित रहता है और प्राथमिक समावेशी कक्षाओं में बच्चों का अधिगम अधिक प्रभावी, सार्थक और स्थायी बनता है।
Related Questions
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हिंदी भाषा शिक्षण और व्याकरण के अंतर्गत, जब वाक्य में एक प्रधान उपवाक्य हो और अन्य आश्रित उपवाक्य उसके साथ समुच्चयबोधक अव्यय (जैसे- जो, कि, क्योंकि, यदि...तो आदि) द्वारा जुड़े हों, तो ऐसे वाक्य को संरचना के आधार पर किस श्रेणी में रखा जाता है?
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उत्तर प्रदेश के भौगोलिक एवं भूगर्भीय इतिहास के संदर्भ में, 'विंध्यन क्रम की चट्टानों' (Vindhyan System Rocks) के वितरण और उनकी विशेषताओं के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. उत्तर प्रदेश के दक्षिणी पठारी एवं पहाड़ी क्षेत्र में विंध्यन क्रम की प्राचीन चट्टानें मुख्य रूप से मिर्जापुर, सोनभद्र और चित्रकूट जिलों में पाई जाती हैं, जो कैमूर (Kaimur) और रीवा (Rewa) श्रेणियों के रूप में विस्तारित हैं।
2. इस क्षेत्र में पाई जाने वाली विंध्यन चट्टानें बलुआ पत्थर (Sandstone), चूना पत्थर (Limestone) और डोलोमाइट के लिए अत्यधिक प्रसिद्ध हैं, जिनका उपयोग बड़े पैमाने पर भवन निर्माण सामग्री और सीमेंट उद्योग में किया जाता है।
3. उत्तर प्रदेश की विंध्यन चट्टानों में धात्विक खनिजों (जैसे सोना, तांबा और लोहा) के अपार और विशाल भंडार पाए जाते हैं, जिसके कारण दक्षिण प्रदेश का यह भाग राज्य का सबसे बड़ा खनिज उत्पादक औद्योगिक क्षेत्र माना जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/से हैं?
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उत्तर प्रदेश के प्रशासनिक एवं राजनीतिक इतिहास के संदर्भ में, राज्य में 'क्षेत्र पंचायत' के प्रमुख (ब्लॉक प्रमुख) के निर्वाचन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है?
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प्राचीन भारतीय इतिहास एवं उत्तर प्रदेश के पुरातत्व स्थलों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले में स्थित सई नदी घाटी के सराय नाहर राय और महदहा पुरास्थल से भारत में प्राचीनतम मानव कंकाल, माइक्रोलिथ (सूक्ष्म पाषाण उपकरण) और हड्डी के बने उपकरण प्राप्त हुए हैं, जो मध्य पाषाण काल से संबंधित हैं।
2. कौशाम्बी (पुराना नाम कौशाम्बी/कोशाम्बी) यमुना नदी के किनारे स्थित वत्स महाजनपद की राजधानी थी, जिसकी खोज और उत्खनन का कार्य मुख्य रूप से प्रोफेसर जी.आर. शर्मा के निर्देशन में किया गया था।
3. उत्तर प्रदेश के संत कबीर नगर जिले में स्थित 'लहुरा देव' नामक पुरास्थल से हालिया पुरातात्विक उत्खनन में भारतीय उपमहाद्वीप में चावल (धान) के प्राचीनतम साक्ष्य (लगभग 7000 ईसा पूर्व से 9000 ईसा पूर्व के मध्य) प्राप्त हुए हैं, जिसने कोल्हवा (कोल्हवा डीह) के साक्ष्यों को पीछे छोड़ दिया है।
4. उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में हिंडन नदी के तट पर स्थित 'आलमगीरपुर' पुरास्थल सिंधु घाटी सभ्यता का सबसे पूर्वी पुरास्थल है, जिसकी खोज वाई.डी. शर्मा द्वारा की गई थी और यहाँ से तांबे की वस्तुएं तथा मृदभांड पर चित्रकारी के साक्ष्य मिले हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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उत्तर प्रदेश की ऊर्जा परियोजनाओं, तापीय और जल विद्युत संयंत्रों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. हरदुअगंज ताप विद्युत गृह (Harduaganj Thermal Power Station) अलीगढ़ जिले में स्थित है, जिसकी स्थापना रूस (तत्कालीन सोवियत संघ) के सहयोग से की गई थी और यह राज्य के सबसे पुराने ताप विद्युत गृहों में से एक है।
2. ओबरा ताप विद्युत गृह (Obra Thermal Power Station) सोनभद्र जिले में रिहंद नदी के सहायक ओबरा नाले के पास स्थित है, जिसे सोवियत संघ की आर्थिक एवं तकनीकी सहायता से स्थापित किया गया था।
3. परीक्षा ताप विद्युत गृह (Paricha Thermal Power Station) झाँसी जिले में बेतवा नदी के तट पर स्थित है, जो बुंदेलखंड क्षेत्र को प्रमुख रूप से विद्युत आपूर्ति प्रदान करता है।
4. नरौरा परमाणु ऊर्जा संयंत्र (Narora Atomic Power Station) बुलंदशहर जिले में गंगा नदी के तट पर स्थित है, जो उत्तर प्रदेश का एकमात्र चालू परमाणु विद्युत संयंत्र है और इसमें प्रेशराइजড हेवी वाटर रिएक्टर (PHWR) तकनीक का उपयोग किया जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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