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UPTET
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उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'नैतिक विकास और संज्ञानात्मक अंतर्संबंधों' के संदर्भ में, लॉरेंस कोहलबर्ग (Lawrence Kohlberg) द्वारा प्रतिपादित 'नैतिक विकास का सिद्धांत' (Theory of Moral Development) के अंतर्गत 'उत्तर-रूढ़िगत नैतिकता स्तर' (Post-conventional Morality Level) के विशिष्ट चरणों—'सामाजिक अनुबंध और व्यक्तिगत अधिकार' तथा 'सार्वभौमिक नैतिक सिद्धांत'—के न्यूरो-मनोवैज्ञानिक स्वरूप और मस्तिष्क के 'प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स' तथा 'इंसुला' (Insula) की सहानुभूतिपूर्ण निर्णय लेने की प्रक्रिया, तथा कैरोल गिलिगन (Carol Gilligan) द्वारा प्रतिपादित 'देखभाल का नैतिकता दृष्टिकोण' (Ethics of Care) के अंतर्गत 'स्वयं केंद्रितता से सार्वभौमिक उत्तरदायित्व तक' के चरणों के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक प्राथमिक समावेशी कक्षा-कक्ष शिक्षण, नैतिक दुविधाओं (Moral Dilemmas) के समाधान और विद्यार्थियों में सामाजिक-संवेगात्मक न्यायसंगत व्यवहार के संवर्धन में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?

Detailed Explanation

लॉरेंस कोहलबर्ग का नैतिक विकास का सिद्धांत न्याय (Justice), सार्वभौमिक मानवाधिकारों और तार्किक नियमों पर आधारित है, जबकि कैरोल गिलिगन ने 'देखभाल की नैतिकता' (Ethics of Care) प्रस्तुत करते हुए अंतर्संबंधों, सहानुभूति और उत्तरदायित्व पर बल दिया। न्यूरो-मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण से, नैतिक निर्णय लेते समय मस्तिष्क का 'प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स' (तार्किक मूल्यांकन के लिए) और 'इंसुला' (सहानुभूति और संवेगात्मक प्रतिक्रिया के लिए) सहयोगात्मक रूप से कार्य करते हैं। आधुनिक समावेशी प्राथमिक कक्षाओं में इन दोनों सिद्धांतों का समन्वय विद्यार्थियों में न केवल तार्किक न्याय बल्कि पारस्परिक सहानुभूति और नैतिक दुविधाओं के सकारात्मक समाधान को बढ़ावा देता है।
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