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UPTET
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उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'समावेशी शिक्षा और विशेष आवश्यकता वाले बालकों के मनोविज्ञान' के संदर्भ में, निकोलस हब्स (Nicholas Hobbs) द्वारा प्रतिपादित 'पारिस्थितिकीय पुनर्वास दृष्टिकोण' (Ecological Rehabilitation Approach) के अंतर्गत बालकों के 'सामाजिक पारिस्थितिकी तंत्र' (Social Ecosystem) के न्यूरो-मनोवैज्ञानिक स्वरूप तथा मस्तिष्क के 'सोशल ब्रेन नेटवर्क' (Social Brain Network जिसमें सुपीरियर टेम्पोरल सल्क्स और मेडियल प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स शामिल हैं) की संवादात्मक सक्रियण प्रक्रिया, तथा यूरी ब्रॉन्फेनब्रेनर्स (Urie Bronfenbrenner) द्वारा प्रतिपादित 'पारिस्थितिकीय प्रणाली सिद्धांत' (Ecological Systems Theory) के अंतर्गत 'माइक्रोसिस्टम' (Microsystem) से लेकर 'क्रोनोसिस्टम' (Chronosystem) तक के पांचों स्तरों के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक प्राथमिक समावेशी कक्षा-कक्ष शिक्षण, विशिष्ट आवश्यकता वाले बच्चों के सामाजिक-संवेगात्मक समायोजन और विद्यार्थियों में तहानुभूतिपूर्ण व न्यायसंगत शिक्षण वातावरण के संवर्धन में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?

Detailed Explanation

विकल्प (b) सर्वाधिक उपयुक्त और वैज्ञानिक रूप से सत्य है। यूरी ब्रॉन्फेनब्रेनर्स का 'पारिस्थितिकीय प्रणाली सिद्धांत' (Ecological Systems Theory) यह स्पष्ट करता है कि एक बालक का विकास उसके चारों ओर के विभिन्न अंतर्संबंधित पर्यावरण स्तरों (माइक्रो, मेसो, एक्सो, मैक्रो और क्रोनोसिस्टम) से प्रभावित होता है। निकोलस हब्स का पारिस्थितिकीय पुनर्वास दृष्टिकोण बालकों के सामाजिक परिवेश और उनके मानसिक स्वास्थ्य के बीच के संतुलन पर जोर देता है। आधुनिक न्यूरो-मनोविज्ञान के अनुसार, मस्तिष्क का 'सोशल ब्रेन नेटवर्क' सामाजिक परिवेश और पर्यावरणीय उद्दीपकों के साथ निरंतर अंतःक्रिया करते हुए बालक के सामाजिक-संवेगात्मक और संज्ञानात्मक विकास को आकार देता है। समावेशी शिक्षा में इन सिद्धांतों का अनुप्रयोग शिक्षकों को यह समझने में मदद करता है कि केवल कक्षा के भीतर का वातावरण नहीं, बल्कि व्यापक सामाजिक-सांस्कृतिक पारिस्थितिकी भी बालक के अधिगम को प्रभावित करती है।
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