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UPTET
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उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'अधिगम पठार (Plateaus of Learning) और मानसिक थकान के न्यूरो-मनोवैज्ञानिक सिद्धांतों' के संदर्भ में, आर्थर जिट्स (Arthur Jersild) और विलियम ब्रिग्ज (William Briggs) द्वारा प्रतिपादित 'अधिगम पठार के कारणों' के न्यूरो-संज्ञानात्मक स्वरूप तथा मस्तिष्क के 'पिट्यूटरी-एड्रेनल अक्ष' (Hypothalamic-Pituitary-Adrenal Axis - HPA Axis) और 'प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स' की अत्यधिक संज्ञानात्मक भार (Cognitive Load) तथा न्यूरो-ट्रांसमीटर 'डोपामाइन और नॉरएपिनेफ्राइन' की कमी से उत्पन्न होने वाली विफलता की प्रक्रिया, तथा सेली (Hans Selye) द्वारा प्रतिपादित 'सामान्य अनुकूलन सिंड्रोम' (General Adaptation Syndrome - GAS) के अंतर्गत 'चेतावनी चरण' (Alarm Phase), 'प्रतिरोध चरण' (Resistance Phase), और 'थकान चरण' (Exhaustion Phase) के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक प्राथमिक समावेशी कक्षा-कक्ष शिक्षण, विश्राम रणनीतियों और विद्यार्थियों में अधिगम दक्षता के पुनरुत्थान में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?

Detailed Explanation

यह प्रश्न 'अधिगम पठार', 'मानसिक थकान', और 'न्यूरो-मनोवैज्ञानिक सिद्धांतों' पर आधारित है। विकल्प (b) सर्वाधिक उपयुक्त और वैज्ञानिक रूप से सत्य है क्योंकि अधिगम पठार केवल बाहरी कारकों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ये मस्तिष्क के प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स में अत्यधिक संज्ञानात्मक भार, एचपीए अक्ष (HPA Axis) की सक्रियता और न्यूरो-रासायनिक परिवर्तनों से गहरे जुड़े हुए हैं। हैंस सेली के 'सामान्य अनुकूलन सिंड्रोम' (GAS) के माध्यम से यह स्पष्ट होता है कि लंबे समय तक अत्यधिक मानसिक दबाव और थकान से गुजरने पर विद्यार्थी का अधिगम स्तर स्थिर (पठार पर) हो जाता है।
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