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UPTET
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उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'बाल विकास और थार्नडाइक के अधिगम के सिद्धांत' के संदर्भ में, एडवर्ड थार्नडाइक (Edward Thorndike) द्वारा प्रतिपादित 'प्रयास एवं त्रुटि का सिद्धांत' (Trial and Error Theory) के अंतर्गत 'प्रभाव का नियम' (Law of Effect) के न्यूरो-संज्ञानात्मक स्वरूप तथा मस्तिष्क के 'वेंट्रेल स्ट्रेटम' (Ventral Striatum), 'न्यूक्लियस एकुम्बेंस' (Nucleus Accumbens) और 'ऑर्बिटोफ्रंटल कॉर्टेक्स' (Orbitofrontal Cortex) के बीच डोपापिनर्जिक रिवॉर्ड पाथवे (Dopaminergic Reward Pathway), साहचर्य मार्ग (Associative Pathway) और सिनैप्टिक स्ट्रेंथनिंग (Synaptic Strengthening) की सक्रियण गतिकी, तथा इवान पावलोव (Ivan Pavlov) द्वारा प्रतिपादित 'शास्त्रीय अनुबंधन सिद्धांत' (Classical Conditioning) के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक प्राथमिक समावेशी कक्षा-कक्ष शिक्षण, सुदृढ़ीकरण आधारित शिक्षाशास्त्र (Reinforcement-based Pedagogy) और विद्यार्थियों में उच्च-क्रम के संज्ञानात्मक संयोजन, आदतन निर्माण और स्व-नियमित प्रतिक्रियाओं के संवर्धन में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?

Detailed Explanation

एडवर्ड थार्नडाइक का 'प्रभाव का नियम' (Law of Effect) यह बताता है कि जिन प्रतिक्रियाओं के बाद संतोषजनक परिणाम (Reward) मिलते हैं, वे मस्तिष्क में अधिक मजबूत हो जाती हैं। न्यूरो-संज्ञानात्मक दृष्टिकोण से, यह प्रक्रिया मस्तिष्क के डोपामिनर्जिक रिवॉर्ड पाथवे (विशेषकर न्यूक्लियस एकुम्बेंस और वेंट्रेल स्ट्रेटम) और ऑर्बिटोफ्रंटल कॉर्टेक्स के बीच की अंतःक्रिया पर आधारित होती है, जो सिनैप्टिक स्ट्रेंथनिंग को बढ़ावा देती है। जब इसे इवान पावलोव के शास्त्रीय अनुबंधन (Classical Conditioning) के साथ जोड़ा जाता है, तो यह शिक्षकों को आधुनिक समावेशी कक्षाओं में सकारात्मक सुदृढ़ीकरण (Positive Reinforcement) आधारित शिक्षाशास्त्र लागू करने में मदद करता है, जिससे विद्यार्थियों में उचित आदतें, प्रेरणा और स्व-नियमित प्रतिक्रियाओं का विकास होता है। अतः विकल्प 'b' पूर्णतः सत्य और उपयुक्त है।
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