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UPTET
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उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'अधिगम अक्षमता और डिस्लेक्सिया (Dyslexia - पठन वैकल्य)' के न्यूरो-संज्ञानात्मक सिद्धांतों के संदर्भ में, शेविट्ज़ और साथियों (Shaywitz & Shaywitz) द्वारा प्रतिपादित 'फोनोलॉजिकल डेफिसिट मॉडल' के अंतर्गत मस्तिष्क के 'बाएं हेमिस्फेयर के टेम्पोरो-पैरिएटल जंक्शन' (Left Temporo-Parietal Junction), 'इन्फीरियर फ्रंटल गाइरस' (Inferior Frontal Gyrus - Broca's Area) और 'ऑसिपिटो-टेम्पोरल वर्ड फॉर्म एरिया' (Visual Word Form Area - VWFA) के बीच दृश्य-श्रव्य एकीकरण, फॉनोलॉजिकल डिकोडिंग और ऑर्थोग्राफिक मैपिंग की सक्रियण विसंगति, तथा उता फ्रिथ (Uta Frith) द्वारा प्रतिपादित 'पठन विकास के त्रि-चरणीय मॉडल' (लॉगोग्राफिक, ऑर्थोग्राफिक और अल्फ़ाबेटिक चरण) के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक प्राथमिक समावेशी कक्षा-कक्ष शिक्षण, मल्टीसेंसरी फोनिक्स और संरचनात्मक साक्षरता शिक्षाशास्त्र (Structured Literacy Pedagogy) और विद्यार्थियों में ध्वन्यात्मक जागरूकता, शब्द पहचान प्रवाह व समग्र पठन दक्षता के संवर्धन में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?

Detailed Explanation

इस प्रश्न में डिस्लेक्सिया (पठन वैकल्य) के न्यूरो-संज्ञानात्मक आधार की गहरी समझ की परीक्षा ली गई है। शेविट्ज़ और अन्य न्यूरोसाइंस शोधकर्ताओं के अनुसार, डिस्लेक्सिया से पीड़ित व्यक्तियों के मस्तिष्क में बाएं हेमिस्फेयर के 'टेम्पोरो-पैरिएटल जंक्शन' और 'विजुअल वर्ड फॉर्म एरिया' (VWFA) में हाइपो-एक्टिविटी (कम सक्रियता) पाई जाती है, जिससे फॉनोलॉजिकल डिकोडिंग (ध्वनियों को पहचानने और जोड़ने) में कठिनाई होती है। उता फ्रिथ के पठन विकास मॉडल और आधुनिक समावेशी शिक्षाशास्त्र के तहत, ऐसे विद्यार्थियों के लिए 'मल्टीसेंसरी फोनिक्स' और 'संरचित साक्षरता' (Structured Literacy) सबसे प्रभावी और वैज्ञानिक शिक्षण पद्धति मानी जाती है। अतः विकल्प (b) पूर्णतः सत्य एवं सटीक है।
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