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UPTET
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उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'अधिगम के अंतर्दृष्टि या सूझ के सिद्धांत' (Insight Learning Theory) के न्यूरो-संज्ञानात्मक संदर्भ में, कॉहलर (Wolfgang Köhler) द्वारा प्रतिपादित 'गेस्टाल्ट अधिगम' (Gestalt Learning) के न्यूरो-बायोलॉजिकल स्वरूप तथा मस्तिष्क के 'पैरिएटल लोब' (Parietal Lobe), 'इन्फीरियर टेम्पोरल कॉर्टेक्स' (Inferior Temporal Cortex) और 'पूर्व-ललाट पालि' (Prefrontal Cortex) के बीच समग्र मैपिंग, समस्या के अवयवों के पुनर्गठन और 'अहा! अनुभव' (Aha! Moment) की सक्रियण गतिकी, तथा कर्ट कोफ्का (Kurt Koffka) द्वारा प्रतिपादित 'संज्ञानात्मक क्षेत्र और संगठन के नियमों' के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक प्राथमिक समावेशी कक्षा-कक्ष शिक्षण, समस्या-समाधान और खोज-आधारित शिक्षाशास्त्र (Discovery-Based Pedagogy) और विद्यार्थियों में अमूर्त चिंतन, तार्किक पुनर्गठन व समग्र संज्ञानात्मक अंतर्दृष्टि के संवर्धन में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?

Detailed Explanation

उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के बाल विकास और शिक्षाशास्त्र के अंतर्गत गेस्टाल्टवादियों (कोहलर, कोफ्का और वर्दीमर) द्वारा प्रतिपादित 'अंतर्दृष्टि या सूझ का सिद्धांत' (Insight Learning Theory) इस बात पर जोर देता है कि अधिगम केवल क्रमिक प्रयासों या त्रुटियों का परिणाम नहीं है, बल्कि यह स्थिति के समग्र रूप (Gestalt) की तात्कालिक समझ पर आधारित होता है। न्यूरो-संज्ञानात्मक दृष्टिकोण से, जब कोई विद्यार्थी किसी समस्या का समाधान अचानक खोज लेता है (जिसे 'अहा! अनुभव' या Aha! Moment कहा जाता है), तो उसमें मस्तिष्क के 'प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स' (कार्यकारी निर्णय और योजना), 'पैरिएटल लोब' (स्थानिक और समग्र एकीकरण) तथा 'इन्फीरियर टेम्पोरल कॉर्टेक्स' के बीच एक तीव्र न्यूरल सिंक्रनाइज़ेशन होता है। यह प्रक्रिया आधुनिक खोज-आधारित और समस्या-समाधान शिक्षाशास्त्र (Discovery-Based Pedagogy) के साथ पूरी तरह संरेखित है, जो बच्चों में रटने की प्रवृत्ति के स्थान पर तार्किक पुनर्गठन और समग्र संज्ञानात्मक अंतर्दृष्टि का संवर्धन करती है। अतः विकल्प (a) सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है।
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